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ढिंढोरा पीटना का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

ढिंढोरा पीटना का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

ढिंढोरा पीटना मुहावरे का अर्थ dhindora pitna muhavare ka arth – ऐलान करना

दोस्तो पुराने जमाने मे जो राजा हुआ करता था ‌‌‌तो जब वह कुछ ऐलान करता तो वह अपने राज्य मे ढिंढोरा पिटाकर अपने राज्य के लोगो ‌‌‌तक अपनी बात पहुंचाता था । जिसके कारण से जब कही पर ढिंढोरा  ‌‌‌पीटा जाता तो वहां के लोगो को यह खबर पहुंच जाती की आज जरूर कुछ ऐलान या घोषणा हुआ है । इस तरह से तब से जब भी कोई कुछ ऐलान या घोषण करता है तब उसके लिए ढिंढोरा पीटना मुहावरे का प्रयोग किया जाने लगा । इस तरह से इस मुहावरे का अर्थ ऐलान करना होता है ।

ढिंढोरा पीटना का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

ढिंढोरा पीटना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग

  • ‌‌‌महाराज पर्णवली ने आज ढिंढोरा पिट कर कहा है की अगर उनके राज्य मे किसी ने चोरी भी कर ली तो उसके हाथ काट दिए जाएगे ।
  • पुलिस ने यह ढिंढोरा पिटा है की जो भी कोई कालिया डाकू को पकडेगा उसे 50000 का इनाम मिलेगा ।
  • जब से नोकरी लगी है तब से यह ढिंढोरा पिट रहा है की जब भी इसे पहली तनख्वाह ‌‌‌मिलेगी तो यह गाव के लोगो को भर पेट भोजन कराएगा ।
  • महाराज आपके मंत्री ने ही राज्य मे ढिंढोरा पिटवाया था की जो भी कोई आपके खिलाफ जाएगा उसे मार दिया जाएगा ।
  • राजेश ने गाव मे ढिंढोरा पिट कर बताया ‌‌‌की इस बार सरपंच मे उसे ही वोट देना है ।
  • ‌‌‌गाव के मूखिया ने ढिंढोरा पिटवाया है की जो भी आपस मे लडाई करेगे उन्हे हरजाना भरना पडेगा ।
ढिंढोरा पीटना का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

ढिंढोरा पीटना मुहावरे पर कहानी

प्राचिन समय की बात है सुरजसिंह नाम का एक राजा हुआ करता था । राजा बहुत ही शांत स्वभाव का होने के कारण जब भी उसका मन चाहता वह लोगो की मदद कर दिया करता था । इस कारण से ‌‌‌उसके राज्य के सभी लोग उसे बहुत महान मानते थे । राजा के पास धन की कोई कमी नही थी ।

राजा के दादा पडदाओ के जमाने से धनइखट्ठा करते आ रहे थे । इस कारण से अब उनके पास धन बहुत ज्यादा हो गया था । पर इस बारे मे उसके मंत्री को भी नही पता था की राजा सुरजसिंह के पास कितना धन है । क्योकी राजा को पता था की ‌‌‌पैसे के लिए आज हर कोई कुछ भी कर सकता है ।

राजा इतना शांत होने के साथ साथ बलवान भी था । वह अकेला ही बिस लोगो को धुल चटा सकता था और ऐसी ही उसकी सेना था । जिसके कारण से हर कोई उस पर हमले के नाम से ही काप जाया करता था । राजा के घर मे उसके अलावा उसकी पत्नी रहा करती थी ।

राजा के कोई संतान नही थी ‌‌‌इस कारण से राजा बहुत ही दुखी रहा करता था । एक दिन की बात है राजा के राज्य मे एक साधु आया जिसने राजा के राज्य को देखकर राजा से मिलने की सोची ।

जब साधु राजा के पास मिलने के लिए गया तो साधु ने कहा की हे राजन आपने अपने राज्य के लोगो को बहुत ही अच्छी तरह से रख रखा है इस कारण से आपको मैं वरदान ‌‌‌देना चाहता हूं । आप जो भी कुछ मागना चाहते हो वह माग सकते हो ।

तब राजा ने कहा की महाराजा इन लोगो को इसी तरह से रखने के लिए मेरे बाद मे कोई भी नही है । इस कारण से आप मुझे संतान प्राप्ती का वरदान दे । राजा की बात साधु को बहुत ही अच्छी लगी इस कारण से साधु ने उसे वरदान दे दिया और फिर वहां से चला ‌‌‌गया था ।

उस दिन के तिन महिनो बाद राजा को पता चला की उसकी पत्नी गर्भवती है । तो राजा ने भी पूरे राज्य मे ढिंढोरा पिटवाकर कहा की आपके लिए युवराज आने वाले है इस कारण से मैं आपको भर पेट भोज खिलाउगा ।

साथ ही राजा ने ऐलान कराया की जो भी कोई परेशानी मै है उसकी समस्या भी दूर होगी । ‌‌‌जब लोगो ने ढिंढोरा पिटने की आवाज सुनाई ‌‌‌दी तो वे सभी अपने अपने घरो से बहार निकल कर देखने लगे और वह जो ऐलान कर रहा था वह सुनकर अगले ही दिन लोग अपनी समस्या लेकर राजा के पास जाने लगे थे ।

तब राजा ने अपने पूरे राज्य की समस्या का निवारण किया । कुछ महिनो के बाद जब राजा के घर बेटे का जन्म हुआ तो राजा के घर की यह खबर हवा की तरह उनके राज्य के लोगो के पास पहुंच गई थी ।

जिसके कारण राज्य के सभी लोग राजा के महल के सामने इखट्ठे हो गए और अपने राज्य के युवराज को देखने के लिए तडपने लगे थे । जब राजा लोगो के सामने आया तो लोगो ने राजा से युवराज का दर्शन कराने को कहा ।

तब जाकर ‌‌‌राजा ने लोगो को युवराज का दर्शन ‌‌‌कराया । दर्शन पा कर सभी लोग अपने अपने घर की ‌‌‌ओर जाने लगे थे । धिरे धिरे समय बितता गया और राजा का बेटा काफी बडा हो गया था । ‌‌‌साथ ही उसे युद्ध कला बहुत ही अच्छी तरह से आने लगी थी ।

तब एक दिन राजा ने उसे नया राजा बनाने की सोची और अपने राज्य मे इस बात का ढिंढोरा पीटवा ‌‌‌दिया । जिसके कारण से राज्य के लोग भी राजा की इस खुशी मे शामिल हो गए । जब राजा ने अपने बेटे का राजतिलक किया तो लोग नये राजा की जय जय कार बोलने लगे ।

जब राजा का बेटा नया राजा बन गया तो उसने अपने हाथो से लोगो को धन बाटा । जिसे लेकर लोग अपने अपने घर जाने लगे थे । उस दिन के बाद राजा का बेटा अपने ‌‌‌राज्य के लोगो की समस्या का निवारण करने लगा था । राजा के बेटा का न्याय भी उनकी तरह से सही हुआ करता था ।

उनके न्याय से किसी को भी कोई तकलिफ नही होती थी । इस तरह से फिर उनके राज्य के लोगो को कोई तकलिफ नही थी और सभी अपना जीवन आराम से गुजारने लगे थे । इस तरह से आप इस कहानी से मुहावरे का ‌‌‌समझ गए होगे ।

ढिंढोरा पीटना मुहावरे पर निबंध

साथियो ढिंढोरा एक ढोलक की तरह ही होता है जो उपर से गोल और निचे से गोलाई मे कुछ तिखा होता है । ढिंढारे के उपर चमडा लगा होता है और जब उसे बजाया जाता है तो एक ध्वनी निकलती है जो काफी दूर तक जाती है ।

जिसके कारण से लोगो को पता चलता है की जरूर आज ‌‌‌कुछ बात हो रही है । क्योकी ‌‌‌पुराने जमाने मे ढिंढोरा ऐलान करने के लिए बजाया जाता था ।

इस कारण से अब भी जब किसी बात का ऐलान होता है तो उसे ढिंढोरा पीटना कहा जाता है । हालाकी आज ढिंढोरा पीटा नही जाता है बल्की ऐसा कहा जाता है । इस तरह से ढिंढोरा पीटना मुहावरे का अर्थ ऐलान करना होता है ।

ढिंढोरा पीटना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of in Hindi

पहले के समय में ढिंढोरा पीटा जाता था और किसी बात का ऐलान किया जाता था । जैसे की इसके बारे मे हमने आपको उपर बताया था । तो आप इस बात ये यह समझ ही गए है की ऐलान करने के लिए ही ढिंढोरा पीटा जाता था ।

जैसे की मान ले की हमारे शहर का मंत्री है और वह किसी बात का प्रचार करना चाहता है और लोगो के बिच में ऐलान करना चाहता है जिसके लिए किसी तरह की सोसल मिडिया नही है तो प्रचार करने के लिए वह एक ऐसे व्यक्ति को बुलाता है जो की ढिंढोरा पीट कर ऐलान करता है और ऐसा व्यक्ति आने के बाद में वह पूरे शहर में ढिंढोरा पीट कर मंत्री की बात का ऐलान करता रहता है ।

तो इस बात का मतलब हुआ की ऐलान करने ​के लिए ढिंढोरा पीटा जाता है तो आप इससे समझ सकते है की dhindora pitna muhavare ka arth – ऐलान करना होता है।

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