दाँत पीसना मुहावरे का अर्थ dant pisna muhavare ka arth – अत्यधिक गुस्सा करना ।
दोस्तो कहा जाता है की क्रोध मनुष्य का शत्रु होता है । इस कारण से किसी को भी क्रोध नही करना चाहिए । पर जब कोई व्यक्ति किसी कारण से क्रोध या गुस्सा करने लग जाते है तब इसे दांत पिसना कहा जाता है ।
ऐसा इस कारण से भी कहा जाता है क्योकी ज्यादातर लोगो को जब क्रोध या गुस्सा आता है तो वे अपने दांत पिसने लग जाते है । इसी कारण से दांत पिसने का अर्थ अत्यधिक क्रोध या गुस्सा करना होता है ।

दांत पिसना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence
- बेटे के कारनामो के बारे मे जानकर सोनू के पिताजी दांत पिसने लगे ।
- मैंने तो राम से मजाक किया था पर वह तो मेरी बात सुन कर दांत पिसने लगा ।
- पिताजी के ताने सुन कर लखन दांत पिसने लगा ।
- सेठ ने जब गिरधारी को बुरा भला कहा तो वह दांत पिसने लगा पर आखिर कुछ नही कर सका ।
- पिताजी के बारे मे बुरा भला सुन कर रमेश दांत पिसने लगा ।
- राम तो बहुत ही अच्छा लडका है फिर भी तुम उसकी बात सुन कर दांत पिसने लग गए ।
- जब पति ने सरला को डाटा तो वह दांत पिसने लगी ।

दांत पिसना मुहावरे पर कहानी muhavare par kahani
प्राचिन समय की बात है किसी गाव मे राजवीर नाम का एक लडका रहा करता था । उसके घर मे उसके पिताजी और माता के अलावा उसका एक बडा भाई भी था । राजवीर के पिता गाव के जाने माने लोगो मे से एक थे ।
इस कारण से लोग भी उन्हे आदर दिया करते थे । साथ ही राजवीर के पिता बहुत ही अच्छे व्यक्ति थे । वे जहां झगडा होते देखते तो वहां से दूर चले जाया करते थे । यानि वे झगडा करने वाले लोगो से सक्त नफरत करते थे और उससे दूर ही रहा करते थे ।
राजवीर अपने पिता के जैसा नही था उसे क्रोध जल्दी आ जाया करता था जिसके कारण से वह कभी कभार किसी से झगडा भी कर लिया करता था । पर वह अपने पिता के सामने कुछ नही बोलता था जिसके कारण से उनको तो वह बहुत ही अच्छा लगता था ।
साथ ही राजवीर का बडा भाई अपने पिता के जैसा ही था वह किसी से भी कोई मतलब नही रखता था वह तो अपने काम से काम रखने वाला था । राजवीर के भाई को भी उसके बारे मे पता नही था । क्योकी वह घर मे शांत रहता और वह दिन मे ज्यादातर अपने घर से बाहर ही रहा करता था ।
उस गाव मे कोई विधालय था नही इस कारण से दुसरे गाव मे वे पढने के लिए जाते नही थे । जिसके कारण से राजवीर इधर उधर गाव मे फिरता रहता था । उसके चार मित्र थे जो राजवीर की तुलना मे गरीब ही थे ।
कहने का अर्थ है की उनके घर की हालत राजवीर के घर के जैसी नही थी। इस तरह के मित्रो के साथ वह रहा करता था और उनके बिच मे वह अपने आप को अच्छा महसुस करता रहता था ।
मित्र तो अपने मित्र से हंसी मजाक कर लिया करते है इसी कारण से वे भी राजवीर से हंसी मजाक कर लेते थे । पर कभी कभार राजवीर को उनका मजाक करना अच्छा नही लगता था जिसके कारण से उसे गुस्सा आने लग जाता था ।
इसी तरह से एक बार राजवीर अपने दोस्ते के साथ गाव मे बैठा था । तब उसके चारो दोस्तो ने योजना बनाई की आज राजवीर से मजाक करेगे । इस कारण से वे चारो मित्र राजवीर से मजाक करने लगे थे ।
जब राजवीर ने उन चारो को एक साथ मजाक करते देखा तो वह उसे अच्छा नही लगा इस कारण से उसे बहुत क्रोध आने लगा था । तब उसके मित्र मजाक मजाक मे कह रहे थे की देखो यह दांत पिस रहा है यह अभी हमको मारेगा ।
इतने मे राजवीन ने उनको मारने के लिए भी हाथ उठा दिया था । पर वे चार थे इस कारण से वे उससे मार नही खा सके और उसका हाथ पकड लिया । फिर चारो कहने लगे की तुम्हे तो क्रोध आ गया है हम तो तुम्हारे साथ मजाक कर रहे थे । पर अब राजवीर उनकी बात नही सुन रहा था ।
उस दिन राजवीर उन चारो से रूठ कर अपने घर चला गया था । उस दिन राजवीर बहुत गुस्से मे था । इस कारण से वह घर मे जाकर आराम से सो गया । तभी राजवीर का भाई उसके पास आया और वह उससे ऐसे ही बात करने लगा था ।
तब राजवीर अपने मित्रो का गुस्सा उसे दिखाने लगा था । तब राजवीर के भाई ने उससे कहा की मैंने तुम्हे क्या कह दिया जो तुम दांत पिसने लगे हो । तब राजवीर के भाई को पता चल गया की जरूर कुछ बात हुई है ।
तभी इस बारे मे उसने अपने पिता को जाकर बता दिया । तब उसके पिता ने राजवीर के दोस्तो से पूछा तो उन्हे पता चला की राजवीर के दोस्तो ने मजाक किया था जिसके कारण से इसे अत्यधिक क्रोध आ गया और वह उन्हे मारने भी लगा था ।
यह जान कर राजवीर के पिता को पता चल गया की यह लडका लडाई भी कर सकता है । और यही हुआ फिर समय के साथ वह बात बात पर लोगो से लडाई करने लगा था । तब उसके पिता ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की पर वह अपने पिता की बात नही मान रहा था ।
धिरे धिरे जब राजवीर की जब शादी हो गई और उसके बेटे हो गए तब भी वह इसी तरह से कर रहा था । पर अब राजवीर को उसके पिता ने लग कर दिया था । जिसके कारण से राजवीर अपनी पत्नी और बच्चो के साथ ही रहा करता था और अपना जीवन गुजारता था ।
उन दिनो के बाद मे वह कभी भी अपने मित्रो से बात नही करता था । और उन्हे देख कर ही गुस्से मे आ जाता था । इस तरह से फिर राजवीर उन चारो से हमेसा के लिए अलग हो गया था ।
इस तरह से फिर राजवीर का गाव मे कोई दोस्त भी नही था । जिसके कारण से वह समय बिताने के लिए भी किसी के पास नही जाता था । तब एक दिन उसकी पत्नी ने कहा की क्रोध करना मनुष्य के लिए हानिकारक है जिसके कारण से ही तुम्हे कोई भी पंसद नही करता है ।
साथ ही उसकी पत्नी ने कहा की हो सके तो स्वयं के क्रोध को दुसरो को दिखाना नही चाहिए । तब राजवीर को अपनी पत्नी की बाते समझ मे आ गई और फिर वह कोशिश करने लगा की वह किसी की बातो को सुन कर दांत न पिसे पर यह इतना सरल नही था ।
जिसके कारण से राजवीर ने फिर हार मान ली और इसी तरह से अपना जीवन गुजाने का फैसला ले लिया था । इस तरह से फिर राजवीर ने इसी तरह से अपना जीवन गुजारा ।
इस तरह से आपको समझ मे आ गया होगा की किस तरह से राजवीर के दांत पिसने के कारण से उसे कोई पंसद नही करता था । इस तरह से आपको इस कहानी से मुहावरे का अर्थ भी समझ मे आ गया होगा ।
दाँत पीसना मुहावरे पर निबंध || dant pisna essay on idioms in Hindi
दोस्तो कहा जाता है की जब मानव गुस्से में होता है तो उसके चेहरे को देखने मात्र यह बताया जा सकता है की यह गुस्से में है की नही । क्योकी क्रोधित होने का हाव भाव चैहरे पर दिखाई देते है ।
यह बहुत बार देखा जाता है की जब कोई गुस्से में होता है तो वह अपने दांत को पिसने लग जाता है। मतलब दांत को एक दूसरे से चिपका लेता है और फिर दोनो को रगड़ता है और यह एक बार नही बल्की बहुत बार देखा गया है ।
तो इस बात का मतलब हुआ की दांत उसी समय पीसे जाते है जब कोई गुस्से में होता है । मगर यह जो गुस्सा होता है वह काफी अधिक होता है और इस बारे में आपको पता होना जरूरी है ।
इस तरह से दांत पीसना मुहावरे का सही अर्थ अत्यधिक गुस्सा करना होता है । और यह आपको अब तक पता चल चुका है ।