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राई का पहाड़ बनाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

राई का पहाड़ बनाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

राई का पहाड़ बनाना मुहावरे का अर्थ rai ka pahad banana muhavare ka arth – छोटी सी बात को बड़ा करना

दोस्तो कुछ लोगो मे ऐसी आदते होती है जिसके कारण से वे किसी छोटी सी बात को इस तरह से बड़ा देते है की कहा जाता है की बात का तो बतगड ही बन गया है । यानि छोटी सी बात बड़ जाती है ।

इस ‌‌‌तरह से जब कोई व्यक्ति किसी छोटी सी बात को बड़ा कर देता है । तब कहा जाता है की राई का पहाड बन गया है । जैसे जब किसी छोटी सी बता को लेकर लडाई हो जाती है तब इस मुहावरे का प्रयोग कर कर कहा जाता है की राई का पहाड बन गया है । बिल्कुल ऐसे ही इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

राई का पहाड़ बनाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

राई का पहाड़ बनाना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • ‌‌‌महेश ने राई का पहाड बना दिया जिसके कारण दोनो भाईयो मे बहुत बड़ा झगडा हो गया ।
  • सुरेश से जब भी कोई कुछ कह देता है तो वह राई का पहाड बनाते देर नही लगाता ।
  • इसकी बातो पर विश्वास मत करना साहेब इसकी तो आदत ही राई का पहाड बनाने की है ।
  • राई का पहाड बनाकर तुमने दोनो ‌‌‌परिवारो को आपस मे लडाकर अच्छा नही ‌‌‌किया ।
  • बेटे की एक छोटी सी गलती पर आपने तो राई का पहाड ही बना दिया ।
  • बात बात पर राई का पहाड़ बनाना अच्छा नही होता ।
  • अगर तुम इसी तरह से राई का पहाड़ बनाकर लडते रहोगे तो एक दिन तुम ही इसमे फंस ‌‌‌जाओगे ।
राई का पहाड़ बनाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

राई का पहाड़ बनाना मुहावरे पर कहानी muhavare par kahani

किसी समय की बात है किसी नगर मे दामोदर नाम का एक आदमी रहा करता था । दामोदर के पास धन दोलत की इतनी अधिकता था जिसके कारण लोग भी उसके घरो पर भोजन कर लिया करते थे ।

दामोदर बहुत ही शांत स्वभाव का आदमी था वह किसी से भी कोई मतलब नही रखता था । पर जब ‌‌‌कभी उसके घर मे कोई आ जाता तो वह उसे खाली पेट जाने नही देता था । यानि उसे भोजन करा कर ही भेजता था ।

इसी तरह से दामोदर के पिता थे उसके घर मे दामोदर के अलावा उसके पिता ही थे । दामोदर की माता की मृत्यु हो जाने के कुछ वर्षो के बाद की बात है दामोदर के पिता ने उसका विवाह करने की ‌‌‌सोची । तभी उनके ‌‌‌घर दो व्यक्ति आ रहे थे जो दामोदर के गाव के ही थे ।

तब उन्होने दामोदर के पिता से बात कर कर दामोदर का रिस्ता तय कर दिया था । तब दामोदर के पिता को भी वह कन्या बहुत ही अच्छी लगी थी । शादी हो जाने के कुछ महिनो के बाद ही दामोदर को उसकी पत्नी के बारे मे पता चला की उसकी पत्नी कैसी है। ‌‌‌

यानि दामोदर की पत्नी को बहुत अधिक घुस्सा आता था । और जब भी वह किसी से लडाई कर लेती थी तो उसकी छोटी सी बात का बतगड बनाकर इस तरह से लडाई करने लगती थी की मानो बहुत बडी बात हो गई हो ।

जब इस बारे मे दामोदर ने अपने पिता से कहा तो उसके पिता ने कहा की कोई बात नही एक तो ऐसा होना चाहिए जो लडाई कर ‌‌‌सके क्योकी हमारे घर मे ‌‌‌कोई भी लडाई करने वाला नही है । अपने पिता की बात सुन कर दामोदर को भी लागा की ‌‌‌यह तो सही बात है।

इसी तरह से दामोदर का जीवन चल रहा था की एक दिन की बात है । दामोदर के पडोसी उसके घर आए और दामोदर को भला बुरा कहने लगे । जिसके कारण से दामोदर की पत्नी बिच मे आकर बोलने लगी जिसके कारण से वे लोग वापस ‌‌‌अपने घर चले गए थे ।

यह बात दामोदर की पत्नी को खटकने लगी थी की वे लोग उसके घर मे आकर उसके पति को ऐसे कैसे कह सकते है । इस कारण से एक महिने के बाद दामोदर के पडोसी दामोदर की पत्नी से ऐसे ही कुछ कह दिया था ।

क्योकी दामोदर की पत्नी को उस दिन की बात अभी तक खटक रही थी । इस कारण से उसने इस छोटी सी ‌‌‌को बड़ा कर लिया और उन लोगो से लडने लगी थी । उस दिन दामोदर अपने घर पर था नही इस कारण से दामोदर की पत्नी उन लोगो से बहुत समय तक लडती रही ।

जब रात्री हुई तब दामोदर अपने घर आया तो उसके पडोसी उसे कहने लगे की तुम्हारी पत्नी एक छोटी सी बात को लेकर लडने लगी थी । तभी उसकी पत्नी फिर आई और वह फिर लडने ‌‌‌लगी ।

जब दामोदर ने उसे चुप रहने को कहा तो ‌‌‌उसने अपने पति को सफाई देते हुए कहा की इन्होने मुझे बहुत बुरा भला कहा था । साथ ही इस तरह से बात को बड़ा कर कहने लगी थी । तब यह सुन कर उनके पडोसी कहने लगे की ऐसा कुछ नही है हमने तो ऐसा नही कहा था ।

इस तरह से लडाई सुन कर गाव के लोग भी उनके घर के चारो और आ गए थे । तब ‌‌‌दामोदर ने लोगो को देख कर किसी तरह से अपनी पत्नी को चुप करा कर अपने घर मे ले गया । और कमरे मे ले जाकर उसे समझा बुझा कर बहार आ गया ।

जब वह बाहर आया तब लोग उससे पुछने लगी की क्या हुआ लडाई किस कारण से हो रही थी । तब दामोदर ने कहा की मैं अभी अभी काम से आया हुं पता नही पडोसियो ने कुछ कह दिया होगा ‌‌‌इस तरह से कह कर दामोदर ने बात को टाल दिया ।

इस तहर की लडाई होने के बाद दामोदर के पडोसियो को अच्छी तरह से पता चल गया था की उस दिन की लडाई के कारण दामोदर की पत्नी ने राई का पहाड बना दिया और उस दिन की भडास निकालने लगी ।

उस दिन के बाद मे कभी भी दामोदर के पडोसी उससे बात नही करते थे । इस बारे ‌‌‌मे दामोदर को पता था की इसने ही कुछ किया होगा । इस कारण से वह अपनी पत्नी से कहने लगा की मुझे पता है की तुम उस दिन की भडास निकालने के लिए ही आज राई का पहाड बना दिया और उनसे लडने लगी ।

तब दामोदर की पत्नी इनकार करने लगी थी । पर सच यही था यह दामोदर को बहुत ही अच्छी तरह से पता था । इस तरह से ‌‌‌फिर कभी भी अगर उसे कुछ बात सही नही लगती तो वह उस छोटी सी बात को बड़ा कर लडाई करने लगती थी । और इसी तरह से दामोदर का जीवन गुजर गया था । इस तरह से आपको इस कहानी से पता चल गया होगा की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ।

राई का पहाड़ बनाना मुहावरे पर निबंध || rai ka pahad banana essay on idioms in Hindi

साथियों वर्तमान मे आपको ऐसे बहुत से लोग मिल जाएगे जो की एक छोटी सी बात को बडा कर देते है । अगर आप​ किसी महिला से कहेगे तो कुछ और ही मगर वह बात जब बहुत से लोगो के बिच में होकर आती है तो वह और ही बन जाती है और यह आपको पता है ।

मगर वही पर कुछ ऐसी बाते भी होती है जिसका मतलब कुछ ही होता है और लोग उसका मतलब कुछ ओर ही समझ लेते है जिसके कारण से उसी बात को लेकर झगड़ा करने लग जाते है ओर यह सभी राई का पहाड़ बनाने जैसा होता है ।

वैसे आपको इसके अर्थ के बारे में तो पता ही है की इसका मतलब छोटी सी बात को बड़ा करना होता है तो अब जहां पर छोटी सी बात को बड़ा करने की बात होती है वही पर राई का पहाड़ बनाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग किया जाता है और इस बात को आप अच्छी तरह से समझ सकते है ।

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