Headlines

नाच न जाने आंगन टेडा का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

नाच न जाने आंगन टेडा का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

नाच जाने आंगन टेडा मुहावरे का अर्थ naach na jaane aangan tedha muhavare ka arth – काम नही आने पर बहाना बनाना

दोस्तो जब किसी ऐसे व्यक्ति को नाचने के लिए कहा जाता है जिसे नाच नही आती है । तो वह व्यक्ति अपने आप की यह कमजोरी स्वीकार न कर कर यही कहता है की मुझे नाचना आता ‌‌‌पर जब वह नाचने लगता है तो उससे सही तरह से नाचा नही जाता और वह तब भी अपनी इस कमजोरी को स्वीकार नही करता है और बहाने बनाते हुए आंगन को टेडा बताने लगता है । इस तरह से कहा जाता है की नाच न जाने आंगन टेडा जिसका अर्थ होता है कार्य नही आने पर बहाने बनाना ।

नाच न जाने आंगन टेडा का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

‌‌‌नाच जाने आंगन टेडा का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • जब शिला को देखने आए लडके वालो ने उसे ‌‌‌नृत्य ‌‌‌करने को कहा तो वह राग न होने का बहाना बनाने लगी तब लडके वालो को पता चल गया की नाच न जाने आंगन टेडा ।
  • अगर ठिक समय पर तुम नृत्य करने से मना करोगे तो लोग तुम्हे नाच न जाने आंगन टेडा ही समझेगे ।‌‌‌
  • रिया दसवी कक्षा मे तिन बार फैल हो जाने पर फैल कैसे हो गई इसके लिए बहाने बनाने लगी तब उसके माता पिता को पता चल गया की नाच न जाने आंगन टेडा ।
  • राहुल ऐसे तो बहुत कहता फिरता है ‌‌‌मैं बलवान हूं पर जब से उसे कुस्ती मे भेजने को कहा है तो वह हाथ मे दर्द का बहाना बनाकर बैठा है । इसी बात पर समझा जा ‌‌‌सकता है की नाच न जाने आंगन टेडा ।
  • जब सुनिल बार बार पेपर में फैल होने लगा तो वह पेपर चेक करने वालो को ही गलत बताने लगा यह सुन कर लोगो को पता चल गया की नाच न जाने आंगन टेडा ।
  • अगर तुम्हे यह कार्य करना आता तो इस तरह से बहाने नही बनाते तुम तो वही बात कर रहे हो की नाच न जाने आंगन टेडा ।
  • तुम्हारे लिए तो ‌‌‌हर काम नाच न हाने आंगन टेडा है ।
नाच न जाने आंगन टेडा का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

नाच न जाने आंगन टेडा पर कहानी  naach na jaane aangan tedha par kahaanee

किसी समय की बात है किसी गाव मे एक औरत रहा करती थी । वह औरत बहुत ही शांत स्वभाव की थी । वह कभी भी किसी से लडाई झगडा नही किया करती थी । उस औरत का पति भी इसी तरह का था । पर उसके पति को जब कोई कार्य नही आता तो वह साफ साफ बता देता की मुझे यह कार्य नही आता है ।

इस तरह से उस औरत ‌‌‌के घर मे उसके और उसके पित के अलावा उसकी एक बेटी भी थी । जिसका नाम सुसिला था । वह औरत चाहती थी की उसकी बेटी नृत्य करना सिखे । पर नृत्य उस गाव मे किसी को आता नही था । इस कारण से कोई भी सुसिला को नृत्य नही सिखा सका । और गाव से बाह भेजने के लिए सुसिला की माता के पास पैसे नही थे ।

इस कारण ‌‌‌से सुसिला की मां ने उसे ऐसे ही घर पर नृत्य की तैयारी कराई थी । पर उसकी मां को भी कुछ नही आता था इस कारण से वह ऐसे वैसे उसे हाथ हिलाना सिखा दिया था । इसी तरह से धिरे धिरे जब सुसिला बडी हो गई तो वह लोगो को कहने लगी की मुझे नृत्य आता है ।

इस तरह से जब लोगो ने सुसिला का नृत्य देखा तो लोगो‌‌‌को भी लगा की इसे तो नृत्य आता है । ऐसा लोगो को इस कारण से लगा था क्योकी वहा के लोगो को नृत्य आता नही था और न ही कभी किसी का नृत्य देखा था ।

जिसके कारण से लोग सुसिला को बहुत ही अच्छा नृत्य करने वाली मानने लगे थे । इसी तरह से फिर सुसिला के पास गाव की लडकिया भी नृत्य सिखने के लिए आने ‌‌‌लगी थी । इस तरह से फिर सुसिला को दो वर्ष और बित गए तब एक दिन की बात है सुसिला के गाव के शहर से कुछ बडे लोग आ रहे थे ।

इस कारण से गाव के लोगो ने ‌‌‌उनका सम्मान करने के लिए एक छोटा सा प्रोग्राम रखा था । जिसके लिए गाव के लोगो ने एक बहुत ही अच्छी नृत्यक को शहर से बुलाया था । पर जब वे बडे लोग गाव ‌‌‌मे आ गए तो उसी दिन उस नृत्यक ने गाव मे आने से मना कर दिया ।

जिसके कारण से गाव के लोगो को लगा की अगर अब वे उनके सम्मान के लिए नृत्य नही रखेगे तो वे लोग हमारे गाव का विकाश नही करेगे । इस तरह से सोच कर गाव के लोग बहुत ही ‌‌‌उदास गए थे ।

तभी उन लोगो को सुसिला की याद आई । जिसके कारण से उन लोगो ने ‌‌‌सुसिला को बुलाकर कहा की तुम्हे शहर के लोगो को एक छोटा सा नृत्य का प्रोग्राम दिखाना है । यह सुन कर सुसिला कहने लगी की मैं नृत्य दिखा दुगी ।

इस तरह से कुछ ही समय बाद सुसिला की नृत्य करने की बारी आई तो वह स्टेज पर नृत्य करने के लिए पहुंच गई थी । वहा जाकर उसने देखा तो गाव के सभी लोग उसे ‌‌‌देख ‌‌‌रहे थे । यह देख कर सुसिला कुछ घबराने लगी थी ।

पर अब हो क्या सकता था जिसके कारण से सुसिला नृत्य करने लगी थी । तभी अचानक नृत्य की धुन नही आई जिसके कारण से सुसिला वहा से जाने लगी । जिसके कारण से लोगो ने कहा की तुम जा क्यो रही हो नृत्य करो तुम्हे क्या नृत्य करना नही आता ।

तब सुसिला कहने‌‌‌ लगी की मैं नृत्य कैसे करू धुन ही सही तरह से नही आ रही है । यह सुन कर लोगो ने फिर धुन को सही किया तो सुसिला फिर से नाचने लगी थी । पर अचानक वह गिर गई । तब लोगो ने कहा की तुम गिर क्यो रही हो नृत्य करना आता है वे गिरते नही है ।

तब सुसिला कहने लगी की नही मुझे नृत्य करना आता है पर आपने यह ‌‌‌स्टेज सही तरह से नही लगाया है । यह सुन कर गाव के लोगो ने फिर कहा की सुसिला तुम तो नृत्यक हो तुम नाच सकती हो । इस तरह से कहने पर सुसिला फिर से नृत्य करने लगी थी ।

पर अब भी वह सही तरह से नृत्य नही कर रही थी । जिसके कारण से कुछ समय डटने के बाद उसने कहा की आपने आंगन ही टेडा कर रखा है । इतना ‌‌‌कह कर वह वहा से चली गई । तब शहर से आए लोगो ने कहा की आप तो बहुत ही अच्छी नृत्यक लेकर आए हो ।

जिसे नाचना आता नही और आंगन टेडा बता रही है । तब उन लोगो ने कहा की ऐसे लोगो के लिए तो कहा जाता है की नाच न जाने आंगन टेडा । इसका अर्थ समझाते हुए उन लोगो ने कहा कही जिनको काम नही आता वे बहाने बनाने लगते ‌‌‌है ।

इस तरह से फिर वे लोग शहर जाने लगे थे । और गाव के लोग भी निराश होकर अपने अपने घर चले गए । तब लोगो को सही तरह से समझ मे आ गया की सुसिला को कोई नृत्य नही आता है । इस तरह से आपको भी समझ मे आ गया होगा की इस कहानी से मुहावरे का अर्थ क्या है ।

नाच न जाने आंगन टेडा मुहावरे पर निबंध || naach na jaane aangan tedha essay on idioms in Hindi

साथियों हमेशा एक बात का ध्यान रखना की अगर आपको कुछ आता नही है तो उसे स्वीकार कर लेना और दूसरो के सामने रख देना और कहना की मुझे यह नही आता है । मगर आप ऐसा नही करते है तो आपके लिए यह मुहावरा पूरी तरह से सही बैठेगा ।

दरसल जो लोग काम नही आने पर बहाना बनाते  है उनके लिए ही यह मुहावरा बना गया है और उनके लिए ही कहा जाता है की नाच न जाने आंगन टेडा । मतलब जिसको नाच नही आ रही है वह साफ साफ नाच नही आ रही है ऐसा न कह कर कर आंगन को टैडा बता रही है तो इस तरह से अर्थ यही हुआ की काम नही आने पर बहाना बनाना ।

अब जहां पर भी काम नही आने पर बहाना बनाने की बात होती है वही पर इस मुहावरे का प्रयोग होता है और आप इस बात को अच्छी तरह से समझ सकते है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *