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बात का बतंगड़ बनाना मुहावारे का मतलब और वाक्य में प्रयोग

बात का बतंगड़ बनाना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है

बात का बतंगड़ बनाना मुहावरे का अर्थ baat ka batangad banana muhavare ka arth – छोटी सी बात को अधिक बढ़ा देना

बात का बतंगड़ बनाना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त बात का बतंगड़ बनाना  मुहावरे का छोटी सी बात को अधिक बढ़ा देना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
बात का बतंगड़ बनाना   छोटी सी बात को अधिक बढ़ा देना ।
बात का बतंगड़ बनाना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है

बात का बतंगड़ बनाना  मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो जब दो ‌‌‌व्यक्तियों मे झगडा होता है तो ‌‌‌ झगडा होने से पहले उन दोनो के बिच मे एक छोटी सी बात होती है । मगर झगडा हो जाने के कारण से दोनो ‌‌‌व्यक्ति अपने पक्ष को मजबुत करने के लिए उस बात को बढाने लगते ‌‌‌है । या इस तरह से कह सकते है की जब कभी किसी कारण से एक छोटी सी बात इस तरह से बढ चढ जाए की उसका अर्थ बहुत ही अलग निकलने लगे तो इसे बात का बतंगड़ बनाना कहा जाता है ।

बात का बतंगड़ बनाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  baat ka batangad banana muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌‌‌‌जया को जब 100 रूपय नही मिले तो वह अपने पति के साथ झगडा करने लगी और बात का बतंगड़ बना दिया ।

रामू और जामू के बिच मे झगडा हो जाने के कारण से दोनो ने पुलिस बुला ली जिसके कारण से पुलिस ने सच पता लगाने के ‌‌‌लिए दोनो को ही जेल डाल दिया इसे कहते है बात का बतंगड़ बनाना ।

रोटी सब्जी पर चला झगडा महेश और उसकी पत्नी को तलाक तक लेकर पहुंच गया यही है बात का बतंगड़ बनाना ।

बात का बतंगड़ बनाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  baat ka batangad banana muhavare ka vakya me prayog

जब सब्जी वाले ने गलती से खराब सब्जी डाल दी तो महेश जोर कर कर सब्जी वाले के साथ झगडा करने लगा और वहां काफी भिड इक्ट्ठा ‌‌‌करने लगा, तब सब्जी वाले ने कहा की भाई क्यो बात का बतंगड़ बना रहे हो अगर ‌‌‌मेने खराब सब्जी दे दी तो वापस रख दो ।

महेशवरी की तो बात का बतंगड़ बनाने की आदत है उससे बात करने का कोई फायदा नही ।

1 रूपय को लेकर तुम दोनो ‌‌‌इस तरह से लड रहे हो की लाखो रूपय खो गए हो इस तरह से बात का बतंगड़ बनाना अच्छा नही है ।

बात का बतंगड़ बनाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  baat ka batangad banana muhavare ka vakya me prayog

बात बात पर बात का बतंगड़ बना देते हो यह कहा की बात हो गई ।

खेत के बटवारे के बाद मे भाई ने दो शब्द क्या बोल दिए बात का बतंगड़ बनते देर नही लगी ।

यह पैसो का मामला है जनाब यहां बात का बतंगड़ बनते देर नही लगेगी।

बात का बतंगड़ बनाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  baat ka batangad banana muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌बात का बतंगड़ बनाना मुहावरे पर कहानी baat ka batangad banana muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक साहुकार रहा करता था । साहुकार के पास धन दोलत की कमी नही थी मगर वह बहुत ही कंजुस था । जिसके कारण से घर मे उपयोग होने वाली वस्तु को वह लाने मे बहुत ही कंजुसी बतरता था । यह देख कर साहुकार की पत्नी बहुत ही नाराज रहा करती ‌‌‌थी ।

मगर इस बात से साहुकार को कोई लेना देना नही था । वह तो अपने पैसो को खर्च करना नही चाहता था । मगर फिर भी उसे खाने के लिए अच्छा भोजन चाहिय होता था । अगर अच्छा भोजन नही होता तो वह अपनी पत्नी के साथ झगडा भी कर लिया करता था ।

मगर सभी सामग्रीयों के बिना अच्छा भोजन कैसे बन सकता है ‌‌‌यह साहुकार को उसकी पत्नी समझाने का प्रयास करती थी । मगर साहुकार नही समझता क्योकी वह पैसे खर्च नही करना चाहता था ।

इस कारण से साहुकार के घर मे हमेशा ही झगडा होता रहता था । इस तरह से रोजाना झगडा होने से साहुकार की पत्नी परेशान हो गई थी। जिसके कारण से एक दिन जब साहुकार ने भोजन को लेकर बात की तो ‌‌‌साहुकार की पत्नी भी उससे झगडा करने लगी थी। उस दिन यह हुआ था की साहुकार अपना काम कर कर अपने घर आया था।

जैसे ही साहुकार घर अया तो उसकी पत्नी ने उसके स्नान करने के लिए पानी गर्म कर दिया । और जब पानी गर्म हो गया तो साहुकार नहाने के लिए चला गया ।

उसके बाद मे साहुकार की पत्नी सब्जी बनाने के ‌‌‌लिए बैठी तो उसे पता चला की तेल नही है । जिसके कारण से उसने साहुकार से इस बारे मे कहा । मगर साहुकार ने कोई जबाब नही दिया । फिर साहुकार की पत्नी सोचने लगी की बिना तेल के ही सब्जी बना लेती हूं ।

यह सोच कर साहुकार की पत्नी बिना तेल के सब्जी बनाने के लिए बैठ गई । अब उसे पता चला की लहसुन और ‌‌‌मिर्च मसाला भी नही है । जिसके कारण से फिर उसने साहुकार से कहा ।

मगर अब भी साहुकार ने अपनी पत्नी की बात नही सुनी । अब साहुकार की पत्नी को भी क्रोध आने लगा था जिसके कारण से उसने भी सोच लिया की अगर मेरी कोई सुन नही रहा है तो मैं जो है उसी से सब्जी बना लेती हूं ।

इसके बाद मे साहुकार की ‌‌‌पत्नी ने बिना तेल और मिर्च मसाले के ही सब्जी बना दी। बादमे वह रोटिया बनाने लगी । जब रोटिया बन गई तो वह अपने ‌‌‌पति को पकडाने के लिए रोटिया लेकर चली गई । जिसके कारण से साहुकार रोटियां खाने लगा तो उसे सब्जी बिल्कुल ‌‌‌भी स्वाद नही लगी ।

मगर अब वह यह नही सोच रहा था की उसकी पत्नी ने ‌‌‌पहले ही इस बारे मे कहा था की उसके पास सब्जी बनाने के लिए नमक मिर्ची व तेल नही है । बल्की वह तो अपनी पत्नी के साथ झगडा करने लगा था की इस तरह की सब्जी कोई बनता है भला इसमे नमक मिर्ची तेल कुछ भी नही है ।

क्योकी रोज ऐसी ही बात होती रहती थी और साहुकार बात बात पर अपनी पत्नी को सुनाता रहता था । ‌‌‌जिसके कारण से साहुकार की पत्नी परेशान हो गई । और अब इस बात को लेकर साहुकार की पत्नी ने कहा की मैंने आपको पहले ही कहा था की सब्जी बनाने के लिए तेल मिर्च मसाला नही है ।

यह बात सुन कर सहुकार ने इनकार कर दिया की उसने कब कहा था । इस तरह से इस बात को लेकर दोनो मे बहुत देर तक झगडा होता रहा और अंत ‌‌‌मे साहुकार की पत्नी अपने कपडे लेकर अपने गाव जाने लगी ।

यह देख कर साहुकार भी उसे कहने लगा की जाओ चली जाओ मुझे तुम्हारी कोई जरूरत नही। इस तरह से साहुकार भी उसे जाने को कहने लगा । क्योकी काफी देर तक झगडा होता रहा जिसके कारण से गाव के लोगो मे इस बात को फैलते देर नही लगी ।

जिससे गाव के लोग भी ‌‌‌साहुकार के घर ‌‌‌के चारो और आ गए । जब साहुकार की पत्नी घर से चली गई तो दो ‌‌‌तीन दिनो तक साहुकार ने किसी तरह से घर का काम कर कर अपना काम चला लिया । मगर फिर उसे पता चलने लगा की सच मे उसकी पत्नी बहुत ही परेशान थी ।

साथ ही उसे रोटिया और सब्जी बनाने मे भी काफी परेशानी आने लगी । जिसके कारण से ‌‌‌उसने सोचा की चलो जो हो गया सो हो गया पत्नी को वापस लेकर आ जाता हूं । इस तरह से सोच कर साहुकार अपने ससुराल चला गया । मगर अब साहुकार की पत्नी साहुकार के साथ नही ‌‌‌आ रही थी । बल्की वहा भी झगडा होने लगा ।

क्योकी साहुकार भी अपनी गलती नही मान रहा था जिससे साहुकार की पत्नी भी घर नही जा रही थी । यह ‌‌‌देख कर गाव की कुछ औरतो ने साहुकार की पत्नी को समझाने का प्रयास किया मगर साहुकार की पत्नी ने कहा की यह इनका रोज का काम है ये इसी तरह से लडते रहते है ।

यह सुन कर वे औरते कुछ नही बोल रही थी। इस तरह से फिर साहुकार को अपने गाव वापस आना पडा । इस बात को कुछ ही दिन बिते थे की साहुकार के पास एक ‌‌‌वकील ‌‌‌आ गया ‌‌‌। ‌‌‌जो साहुकार और उसकी पत्नी का तलाक कराने के लिए आया था ।

जब साहुकार को इस बारे मे पता चला तो वह क्रोधित था इस कारण से उसने ‌‌‌तलाक करने के लिए हां कह दी । मगर तभी साहुकार ‌‌‌को ‌‌‌वकील ने कहा की तुम्हे अपनी पत्नी को आधा धन देना होगा । यह बात सुन कर साहुकार नही माना । जिसके कारण से दोनो ‌‌‌पति पत्नी तलाक के लिए कोर्ट मे चले गए ।

कोर्ट मे दोनो पक्षो के वकिलो ने दोनो से खुब रूपय ठगे और फिर दोनो मे तलाक करवा दिया । अब दोनो मे तलाक हो जाने के कारण से साहुकार अलग रहने लगा था और उसकी पत्नी अलग रहने लगी थी । यह सब देख कर गाव के लोग बात करने लगे की साहुकार की कंजुसी ‌‌‌के कारण से बात का बंतगड बन गया और दोनो पति पत्नी अलग हो गए ।

‌‌‌इस तरह से फिर दोनो ने अपना जीवन अलग अलग बिताना शुरू कर दिया । इस तरह से आपको इस कहानी से समझ मे आ गया होगा की इसका अर्थ क्या है ।

बात का बतंगड़ बनाना मुहावरे पर निबंध baat ka batangad banana muhavare par nibandh

साथियो किसी के मुह से कहे जाने वाले कुछ शब्दो को बात कहा जाता है और बतंगड़ उन शब्दो को तोड मोड कर इस तरह से पेश किया जाए ‌‌‌की उस बात का अर्थ कुछ ‌‌‌ओर बन जाए, साथ ही यह बात काफी अधिक बडी भी हो जाए इसे बतंगड़ बनना कहा जाता है ।

जब कभी किसी कारण से एक छोटी सी बात इस तरह से बढ जाती है तो इसे बात का बतंगड़ बनाना कहा जाता है । इस तरह से वही इस मुहावरे का प्रयोग होता है जहां छोटी सी बात ‌‌‌बहुत अधिक बढ जाती है । इस तरह से इस मुहावरे का अर्थ छोटी सी बात को अधिक बढ़ा देना होता है ।

बात का बतंगड़ बनाना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of baat ka batangad banana in Hindi

दोस्तो इस मुहावरे को समझने के लिए सबसे अच्छा उदहारण महिलाओ का हो सकता है । दरसल बहुत सी महिलाए क्या करती है की अगर कोई बात है तो उस बात में मिर्च मसाला लगा कर यानि बात को बढा कर दूसरो के सामने प्रकट करती है ओर इसी तरह से दूसरी महिला करती है ।

तो इस तरह से करने के कारण से जो छोटी सी बात होती है वह बढ जाती है और उसका अर्थ कुछ और ही बन जाता है और यह शायद आप जानते है ।

तो अगर कभी ऐसा कुछ होता है चाहे किसी भी कारण से होता हो मगर ऐसा होता है तो वहां पर इसका प्रयोग किया जा सकता है ।

और आप यह भी समझ ले की baat ka batangad banana muhavare ka arth – छोटी सी बात को अधिक बढ़ा देना ही होता है ।

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