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पेट में चूहे दौड़ना मुहावरे का मतलब और वाक्य में प्रयोग

पेट में चूहे दौड़ना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

पेट में चूहे दौड़ना मुहावरे का अर्थ pet me chuhe daudna muhavare ka arth – बहुत अधिक भूख लगना

पेट में चूहे दौड़ना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त पेट में चूहे दौड़ना मुहावरे का अर्थ  बहुत अधिक भूख लगना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
पेट में चूहे दौड़ना बहुत अधिक भूख लगना ।
पेट में चूहे दौड़ना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

पेट में चूहे दौड़ना मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो आपने लोगो से यह तो कहते हुआ होगा की आज तो बहुत अधिक भूख लगी है पेट में चूहे दोड रहे है । तो भूख लगने पर ही इस मुहावरे का प्रयोग किया गया । मगर यहां पर साधारण भूख का उपयोग न ‌‌‌कर कर तेज भूख का उपयोग किया गया है।

जिसके कारण से वह भूख सहन नही हो रही हो जैसे माना कोई व्यक्ति कई दिनो से भुखा हो और उसके सामने खाना आते ही वह जानवरो की तरह ‌‌‌टूट पडता है और खाना खाता है। इस तरह की बहुत तेज भूख लगने ‌‌‌पर ही इस मुहावरे का प्रयोग करते है ।

‌‌‌पेट मे चूहे दौड़ना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  pet me chuhe daudna muhavare ka vakya me prayog

आज खेत मे काम करने के कारण से पेट मे चूहे दौड़ने लगे ।

आज तो खाना खाने का भी समय नही मिला पेट मे चूहे दोड रहे है जरा कुछ भोजन लेकर आ जाओ ।

भाई अब तो मेरे से काम नही होगा पेट मे चूहे दौड़ रहे है ।

‌‌‌पेट मे चूहे दौड़ना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  pet me chuhe daudna muhavare ka vakya me prayog

रामलाल खाने को देख कर इस तरह से ‌‌‌टूट पडा जैसे मानो उसके पेट में चूहे दौड़रहे हो ।

पेट मे चूहे दौड़ते रह जाते है परन्तु इस गरीब को खाने के लिए भोजन तक नही मिल पाता ।

‌‌‌बेटे के नोकरी लग जाने के बाद ही लवणसिंह सही तरह से पेट भर कर भोजन कर सका वरना पहले तो पेट मे चूहे दौड़ते ही रहते थे ।

‌‌‌पेट मे चूहे दौड़ना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  pet me chuhe daudna muhavare ka vakya me prayog

आज खाने को कुछ नही है भले ही पेट में चूहे दौड़ते हो पानी पी कर ही काम निकालना होगा ।

आज तो माताजी का भंडारा चल रहा है भर पेट भोजन करूगा कई दिनो से पेट मे चूहे दौड़ रहे थे ।

‌‌‌पेट मे चूहे दौड़ना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  pet me chuhe daudna muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌पेट मे चूहे दौड़ना मुहावरे पर कहानी pet me chuhe daudna muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक राजा हुआ करता था । राजा बहुत ही ज्ञानी था जिसके कारण से वह ज्ञान की बाते अपनी सभा मे बताया करता था । जिसके कारण से राजा की सभा मे उसकी प्रजा भी आ जाया करती थी । इसी तरह से हर समय ज्ञान की बाते बताने के कारण से राजा ‌‌‌का ‌‌‌अपना जीवन सही रास्ते पर ‌‌‌गुजर रहा था । ‌‌‌साथ ही प्रजा भी सुखी रह कर अपना जीवन गुजार रही थी ।

मगर एक बार राजा के राज्य में भूख से लोग तडपने लगे थे मगर किसी के पास खाने ‌‌‌को अन्न नहीं था। जिससे राजा स्वयं भी बहुत परेशान हो गया था । तब राजा ने लोगो को एक कहानी ‌‌‌सुनाई जो इस प्रकार थी ‌‌‌किसी नगर मे एक बहुत ही गरीब व्यक्ति रहा करता था । उसके पास खाने को समय पर भोजन नही मिलता था ।

मगर आस पास के लोग अपना पेट भर भर कर भोजन करते थे । यह देख कर वह गरीब आदमी बहुत ही दुखी होता क्याकी वह हर समय भुखा रहता था । ‌‌‌मगर उसे समय के साथ अपना पेट भरने के लिए कुछ न कुछ मिल जाया करता था ।

इसका कारण उसका बेटा था क्योकी उसका बेटा कोई छोटा मोटा काम कर कर अपने पिता के लिए भोजन लेकर आ जाता था । जिसके कारण से पिता का पेट भर जाता था । तब वह गरीब आदमी अपने बेटे से कहता था की बेटा अगर तुम नही होते तो मैं तो भुखा ही ‌‌‌रहता क्योकी इस अमीर दुनिया मे हम जैसे गरीबो की कोई फिकर नही करता है ।

यह सुन कर उसका बेटा कहता था की पिताजी सच है यह अमीर लोग अपने आस पास के गरीब लोगो को चिंटी की तरह समझते है जो हर समय पेरो मे रहती है । साथ ही कहा की पिताजी आप बेफिकर हो जाओ जब तक मैं इस दुनिया में हूं तब तक आपको भुखा नही ‌‌‌रहने दुगा ।

अपने बेटे से ऐसा सुन कर वह गरीब आदमी बहुत ही खुश हुआ । इसी तरह से फिर उस गरीब का पेट उसका बेटा भरता रहा । इसी के चलते एक दिन वह काम करने के लिए दुसरे राज्य में गया था । मगर दुसरे राज्य मे जाने पर उस गरीब के बेटे को उस राज्य के राजा ने चोर समझ कर जेल मे डाल दिया ।

‌‌‌मगर वह राजा से कहने लगा की मेरा पिता जो बहुत ही गरीब है उसके पास खाने को कुछ नही है अगर मैं समय पर अपने राज्य में नही गया तो वे भूख के मारे मर जाएगे । ऐसा कहने पर भी राजा ने उसकी बात नही सुनी ।

जिसके कारण से उसे कारागार मे कुल 4 महिनो तक रहना पडा । इतने समय मे वह गरीब आदमी अपने बेटे के ‌‌‌आने की आस लगाता रहा । मगर उसे पता नही था की उसके बेटे के साथ ऐसा हो गया है । जब चार महिने हुए तो उस राजा को पता चला की उसने एक ‌‌‌निर्दोश को जेल मे डाल दिया है ।

यह जानने पर राजा को अपने किए पर पछतावा होने लगा जिसके कारण से राजा ने तुरन्त उसे रिहा किया और उसे बहुत ‌‌‌सारा धन देकर कहा की बेटा मैंने तुम्हारी बात नही सुनी मुझसे गलती हो गई इस कारण से तुम कुछ धन ले लो और अपने राज्य को लोट जाओ ।

राजा के ऐसा कहने पर भी वह खुश नही था क्योकी वह सोच रहा था की पिताजी का इतने समय मे क्या हुआ होगा पता नही । यह बात राजा को मालूम थी की उसका पिता जीवित है इस कारण से ‌‌‌राजा ने इस बारे मे उसके बेटे को बताया । जिसके कारण से वह धन लेकर अपने राज्य की और चला गया ।

जब वह अपने गरीब पिता के पास पहुंचा तो उसे पता चला की उसका पिता बहुत ही बिमार हो गए है । उन्हे सही समय पर खाना नही मिलने के कारण हुआ है। यह जान कर वह अपने पिता के पास जाकर रोने लगा ‌‌‌मगर फिर भी गरीब पिता ने अपने बेटे से कुछ नही पुछा की वह इतने दिनो तक क्यो नही आया ।

मगर बेटे ने अपने पर ‌‌‌बिती सब बात अपने पिता को बता दी जिसे जान कर उसका पिता खडा हुआ और कहा की बेटा सबसे पहले तुम जाकर कुछ खाने को लेकर आओ चार महिने बित गए है अभी तक भर पेट भोजन नही किया है ।

तुम तो ऐसा समझ ‌‌‌लो की मेरे पेट मे चूहे कुद रहे है । अपने पिता की ऐसी बाते सुन कर उसका बेटा तुरन्त खाना लेने के लिए दुकान मे चला गया । और वहां से बना बनया अच्छा अच्छा खाना लेकर अपने पिता के पास पहुंच गए । जिसे देखने मात्र ही उसके पिता की भूख बढने लगी थी ।

तब गरीब पिता ने कहा की बेटा ‌‌‌जल्दी करो मेरे पेट मे ‌‌‌चूहे ‌‌‌दौड रहे है । ऐसा सुनने पर बेटे ने तुरन्त अपने पिता को भोजन ‌‌‌परोसा जिसके कारण से उसका पिता भर पेट भोजन खा सका । उसके बाद मे राजा का दिया हुआ धन उन दोनो बाप बेटे को अमीर बना दिया । जिसके कारण से सभी लोग उन्हे अच्छा मानने लगे थे ।

साथ ही अब उनका दिन इस तरह से बदल गया की वे हर समय ‌‌‌अपना पेट भर कर रखते थे । इस तरह से कहानी सुनाते हुए राजा ने कहा की उसी तरह से आज हम भूख से तडप रहे हो मगर एक समय ऐसा आएगा की हमारे पास खाने के लिए किसी चिज की कमी नही होगी । और यही हुआ क्याकी उसी वर्ष उनके राज्य मे इतनी वर्षा हुई की राज्य पुरा अन से भर गया ।

जिसके कारण से उन्हे कभी भी भोजन‌‌‌ की कमी नही दिखी । मगर इस समय वे सभी समझ गए की आखिर पेट मे चूहे दौड़ना का अर्थ क्या होता है । इस तरह से आप भी समझ गए होगे की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ।

पेट मे चूहे दौड़ना मुहावरे पर निबंध pet me chuhe daudna muhavare par nibandh

साथियो आपने चुहो को दोडते हुए देखा होगा वे कभी इधर जाते है तो कभी उधर जाते है । यानि वे एक सिधी ‌‌‌मे दौडते है मगर कुछ इधर उधर हो जाते है । मगर इसी बिच दौडने पर वे उछल कुदते हुए रहते है । बिल्कुल इसी तरह से जब पेट मे बहुत अधिक भूख लग जाती है जैसे मानो कई दिनो से पेट भरा नही है ।

तब चुहो की भाती पेट मे कुछ महसुस होने लगता है । जिसके कारण से इसे पेट मे चूहे दौड़ना कहा जाता है । क्योकी यह ‌‌‌स्थिती बहुत अधिक भूख लगने पर ही होती है इस कारण से इस मुहावरे का अर्थ बहुत अधिक भूख लगना होता है ।

पेट में चूहे दौड़ना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of pet me chuhe daudna in Hindi

दोस्तो जब मैं छोटा था तो मुझे काफी भुख लगती थी । हालाकी आज के समय में भुख में कुछ कमी है । मगर पहले जब बहुत ही अधिक भुख लगती थी और पेट खाली होता था तो अपनी माता से कहता की जल्दी से खाना बना लो आज तो पेट में चूहे कुद रहे है ।

तो इसका मतलब हुआ की मैं उस समय काफी भूखा था और इसी कारण से ऐसा कहता था और उसी तरह से जो कोई आज के समय में बहुत ही अधिक भूखा होता है वह ऐसा कहता है ।

और इस बात का मतलब यह होता है pet me chuhe daudna muhavare ka arth – बहुत अधिक भूख लगना होता है । और जहां पर भी बहुत अधिक भूख लगने की बात होती है वही पर इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ओर यह आप अच्छी तरह से समझ सकते है ।

जैसे की आपने पूरे लेख को पता है तो आशा है की आप इस मुहावरे को सही तरह से समझ गए है ।

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