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‌‌‌रंग लाना का अर्थ और वाक्य में प्रयोग व मुहावरे पर कहानी

‌‌‌रंग लाना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

‌‌‌रंग लाना मुहावरे का अर्थ rang lana muhavare ka arth – प्रभाव दिखाना

‌‌‌रंग लाना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त ‌‌‌रंग लाना मुहावरे का अर्थ  प्रभाव दिखाना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
‌‌‌रंग लानाप्रभाव दिखाना ।
‌‌‌रंग लाना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

‌‌‌रंग लाना मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो जब किसी सफेद वस्तु पर रंग गिरा दिया जाता है तो उसमे वह रंग लग जाता है । इस कारण से वह सफेद नही रहती है । मगर यह तभी होता है जब सफेद वस्तु को रंग मे गिराया जाता है । इसी‌‌‌ इसी तरह से व्यक्ति जब किसी कार्य को करता है तब उसे उस कार्य मे बहुत परिश्रम करना पडता है । तब जाकर उसे मुनाफा प्राप्त होता है ।

इस तरह से मुनाफा प्राप्त होने के कारण से एक दिन वह व्यक्ति गरीबी से मुक्त हो जाता है । मगर यह करने के लिए भी उसे परिश्रम करने की जरूर पडती थी । ‌‌‌क्योकी परिश्रम करने को मेहनत करना भी कहा जाता है ।

इस कारण से जो व्यक्ति मेहनत करता है वह अपने जीवन मे सफल जरूर होता है। इस तरह से मेहनत करने पर सफल हो जाने को मेहनत रंग लाई ऐसा कहा जाता है यानि मेहनत प्रभाव लाई ‌‌‌और इसे अब रंग लाना कहा जाता है । इस तरह से इस मुहावरे का अर्थ प्रभाव लाना हो जाता है ।

‌‌‌रंग लाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग rang lana muhavare ka vakya me prayog

सच्चे लोगो का काम कभी व्यर्थ नही जाता क्योकी इसमे समय भले ही लग सकता है मगर रंग लाती जरूर है ।

अगर तुम आज से सेठ के ‌‌‌पास सही तरह से काम करोगे तो एक दिन सेठ तुम पर बहुत अधिक भरोषा करने ‌‌‌लगेगा और हो सकता है की वे तुम्हे किसी बडे काम मे लगा दे तो उस दिन समझ जाना की तुम्हारी मेहनत रंग लाई है ।

जब मैं नोकरी लग जाउगा तब जाकर मेरी मेहनत रंग लाएगी ।

‌‌‌रंग लाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग rang lana muhavare ka vakya me prayog

मनोज दिन रात पढाई मे ही लगा रहता था तब जाकर उसकी नोकरी लग सकी ‌‌‌इससे पता चलता है की उसकी मेहनत का रंग ‌‌‌ले आई ।

आज जो तुम काम कर रहे हो उसमे भले ही तुम्हारी कोई इज्जत नही होगी मगर जब तुम इसमे सफल बन जाओगे तब तुम्हारी महेनत रंग लाएगी और लोग भी तुम्हारी इज्जत करने लगेगे ।

‌‌‌रंग लाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग rang lana muhavare ka vakya me prayog

किसान वर्षा को देख कर अपेन खेत मे फसल बोता है और एक दिन फसल पक जाती है तब किसान के द्वारा की गई मेहनत ‌‌‌रंग लाती है ।

किसन एक मामूली नोकर था मगर उसने हजारी के पास मेहनत के साथ काम किया जिसे देख कर हजारी ने ‌‌‌उसे अपना एसिसटेंट बना लिया सच है किसन की मेहनत रंग लाई ।

रंग लाना मुहावरे पर कहानी rang lana muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे रामू नाम का एक आदमी रहा करता था । उसके घर मे उसके माता पिता के अलावा और ‌‌‌कोई नही रहता था । रामू के माता पिता के पास धन की बहुत ही कमी थी उन्हे खाने को भी समय पर भोजन नही मिलता था ।

साथ ही वे फटे पुराने कपडे ही पहने रहते थे । एक सब्द मे कहे तो रामू का परिवार बहुत ही गरीब था । मगर रामू एक विश्वासदार आदमी था जो मेहनत के साथ काम किया करता था । और मेहनत करने वालो ‌‌‌को कोन काम नही देता है और एक बार काम मिल जाने पर वे उसमे मेहनत कर करके उपर बढने लगते है ।

रामू के साथ भी ऐसा ही हुआ था । क्योकी एक दिन रामू रास्ते से जा रहा था की उसे एक सेठ मिला जिसकी गाडी खराब थी और उसे ठिक करनी आती नही थी । जिसके कारण से सेठ रास्ते पर जा रहे लोगो से मदद मागता था । मगर ‌‌‌किसी ने सेठ की मदद नही की । जब रामू को अपनी और आते देखा तो सेठ‌‌‌ ने रामू से पूछा की भाई मेरी कार जरा खराब हो गई है इसे ठिक कर दोगे क्या ।

यह सुन कर रामू ने कहा की ठिक है सेठ जी मैं आपकी कार को देखता हूं । क्योकी रामू को कार ठिक करनी आती थी इस कारण से उसने सेठ की कार तुरन्त ठीक कर दी । यह देख कर सेठ को बडा ही अच्छा लगा । ‌‌‌तभी सेठ ने कहा की तुम मुझे घर ‌‌‌भी छोडकर आ सकते हो क्या । यह सुन कर फिर से रामू ने कहा की ठीक है सेठ जी ।

इस तरह से रामू फिर कार को चलाता हुआ सेठ को उसके घर छोडने के लिए चला गया । जब सेठ के घर रामू कार को लेकर पहुंचा तो सेठ ने कहा की भाया थारी मदद से मैं अपना घर आराम से पहुंच गया । इस तरह से फिर सेठ ने रामू से पूछा की तुम ‌‌‌काम क्या करते हो ।

तब रामू ने कहा की सेठ जी आजकल मुझे कोई काम नही मिल रहा है । यह सुन कर सेठ ने कहा की तो फिर मेरा ड्राइवर बनना चाहोगे । तब रामू ने कहा की क्यो नही मुझे काम चाहिए और आप काम दे रहे हो जो मुझे बहुत ही अच्छी तरह से आता है ।

इस तरह से सेठ के पास रामू काम करने लगा था । जब रामू अपने ‌‌‌घर गया तो इस काम के बारे मे रामू ने अपने पिता को बताया । तब रामू के पिता ने कहा की बेटा अगर तुम काम मे मेहनत दिखाओगे तो एक दिन वह रंग लाएगी इस कारण से काम को मेहनत और बडी ही इमानदारी के साथ करना है ।

अपने पिता की बात सुन कर रामू ने कहा की ठीक है पिताजी मैं ऐसा ही करूगा । अब रामू जब भी सेठ के ‌‌‌पास जाता तो वह केवल गाडी न चला कर सेठ का और भी बहुत काम कर देता था । अगर उसे सेठ आवाज लगाता तो वह आवाज के साथ सेठ के सामने खडा मिलता था । इस तरह से काम मे मेहनत देख कर सेठ को लगा की यह तो बहुत ही अच्छा है इसके जैसा मेहनती नोकर मेरे पास आज तक नही आया ।

तब सेठ ने सोचा की अगर यह इसी तरह से काम करता ‌‌‌रहा तो मैं इसे कभी भी काम छोड कर जाने नही दूगा । क्योकी समय के साथ सेठ की सोच के अनुसार ही हो रहा था यानि जैसा सेठ चाहता था रामू वैसा का वैसा ही हो रहा था । क्योकी उसका काम केवल गाडी चलाने का था और उसे पैसे भी उसी बात के मिलते थे मगर वह काम और भी करता था ।

जिसके कारण से सेठ ने उसकी पगार बढा दी ‌‌‌। पगार बढ जाने के कारण से रामू को समझ मे आ गया की वह जो मेहनत के साथ काम करता है यह उसी का नतीजा है । फिर रामू सेठ के पास इसी तरह से काम करता रहा । मगर एक दिन सेठ को पता चला की रामू पढा लिखा है और हिसाब किताब मे तो वह पक्का है । तो सेठ ने तुरन्त उसे  हिसाब किताब का काम करने को ‌‌‌दिया ।

जिसके कारण से सेठ को यकिन हो गया की रामू को हिसाब किताब आता है । क्योकी पैसो के हिसाब किताब मे इमानदार की ही जरूरत होती है जिसके कारण से सेठ ने रामू को परखना चाहा । तब सेठ ने रामू को कुछ रूपय किसी काम के लिए दिए ।

उस समय उन रूपयो मे कुछ रूपय ज्यादा थे मगर सेठ ने उससे कहा की यह ‌‌‌50,000 रूपय है इन सभी को इस काम मे लगा देना । जब रामू उन रूपयो को लेकर वह काम करने लगा तो उसने 50,000 रूपय उस काम मे लगा दिए मगर अभी भी उसके पास 10,000 रूपय बच गए थे ।

यह देख कर रामू सोचने लगा की जरूर सेठजी ने रूपय गिने नही थे यह तो 60,000 थे । इस तरह से फिर जब रामू सेठ के पास गया तो उन्हे इस ‌‌‌बारे मे बताया और सेठ को 10,000 रूपय वापस दे दिए । यह देख कर सेठ को पता चल गया की रामू इमानदार भी है ।

इस कारण से तुरन्त सेठ ने उसे हिसाब किताब का काम सोप दिया और उसके पैसे भी बढा दिए । साथ ही अब वह सेठ के साथ ही रहता था और उसकी गाडी और हिसाब किताब दोनो का काम करता था । जिसके कारण से रामू ‌‌‌को दो गुने रूपय मिलते थे ।

जब इस बारे मे रामू ने अपने पिता को बताया तब रामू के पिता ने कहा बेटा तुमने जो मेहनत और इंमानदारी के साथ सेठ के पास काम किया है उसने ही यह रंग लाया है । जिसके कारण से सेठ ने तुम पर भरोषा कर कर इतना बडा काम दे दिया है ।

इस तरह से फिर सेठ के पास रामू काम करता रहा और वह ‌‌‌गरीबी से मुक्त होता रहा । जिसे देख कर आसपास के लोग भी समझ गए की रामू की मेहनत ने रंग ला दिया है । इस तरह से रामू का जीवन ऐसे ही चलता रहा । इस तरह से आपको इस कहानी से मुहावरे का अर्थ समझ में आ गया होगा ।

रंग लाना मुहावरे पर निबंध rang lana muhavare par nibandh

साथियो ‌‌‌आप सभी को पता है की जब कोई व्यक्ति मेहनत करता है तो उसका प्रभाव किसी न किसी समय दिखता ही है । जिस तरह से किसान की मेहनत का प्रभाव फसल ‌‌‌पकने पर दिखता है । उसी तरह से कोई अन्य काम करने पर भी उसका प्रभाव दिखाई देता है ।

जिस तरह से रामू के काम करने के कारण से सेठ ने उसे बडी पोस्ट दे दी ‌‌‌साथ ही उसे दो गुने पैसे मिलने लगे थे । जिसके कारण से वह अपने घर बार को चमकाने ‌‌‌लगा । यह देख कर लोगो को रामू की मेहनत का प्रभाव दिखाई दिया ।

ठिक उसी तरह से आज के समय मे जब लोग अपना काम करते समय भी कुछ इस तरह से कर देते है की दुसरो को पता चल जाता है की जरूर यह मेहनत तो कर रहा है । इस तरह ‌‌‌से किसी भी कार्य मे प्रभाव दिखाने को ही इस मुहावरे का सही अर्थ माना जाता है और जहां प्रभाव दिखने की बात होती है वही मुहावरे का प्रयोग होता है । इस तरह से आप समझ गए होगे ।

‌‌‌रंग लाना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of rang lana in Hindi

दोस्तो अगर आपकी कोई बात मानता है तो जाहिर है की आप उसे जैसा कहोगे वह वैसा ही करेगा । मगर जब आपकी कोई बात नही मानता है तो आप उस व्यक्ति को काम करने को नही कहोगे ।

कुछ लोग ऐसे होते है जीनकी बात पूरे गाव के लोग मानते है और ऐसे लोगो के लिए कहा जाता है की इसने गाव में अपना प्रभाव जमाया हुआ है ।

तो अगर कही पर कोई व्यक्ति अपने प्रभाव को दिखाता है तो वहां पर इस मुहावरे का प्रयोग आप कर सकते है क्योकी rang lana muhavare ka arth – प्रभाव दिखाना ही होता है ।

जैसे की आपका मित्र आपको स्कूल के बच्चो के बिच मे अपना प्रभाव दिखाता है तो इसका मतलब हुआ की​ मित्र रंग ला रहा है और इसी तरह से इसका प्रयोग कर सकते है ।

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