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बगलें झाँकना Meaning of idiom and usage of idiom in a sentence

बगलें झाँकना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

बगलें झाँकना मुहावरे का अर्थ bangle jhankna muhavare ka arth – इधर उधर देखना या उत्तर होने पर इधर उधर देखना

बगलें झाँकना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त बगलें झाँकना मुहावरे का अर्थ  इधर उधर देखना या उत्तर होने पर इधर उधर देखना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
बगलें झाँकनाइधर उधर देखना या उत्तर होने पर इधर उधर देखना
बगलें झाँकना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

बगलें झाँकना मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो अंग्रजी शब्द बगलें का अर्थ मकान से होता है । जिसके अन्दर आज मनुष्य रहता है । और झांकने का अर्थ उसे देखने से होता है ।‌‌‌ जब कोई व्यक्ति किसी दुसरे व्यक्ति से कुछ प्रशन पूछता है तो वह उन प्रशनो के उत्तर ढूंढने लग जाता है मगर जब उसे उन प्रशनो के उत्तर नही मिलते है तो वह बगले को झांकने लग जाता है यानि बगलें को चारो और से देखने लग जाता है ।

तब समझ जाना चाहिए की इसे इन प्रशनो ‌‌‌के उत्तर का पता नही है । ‌‌‌ ‌‌‌इसी तरह से जब ‌‌‌किसी व्यक्ति उत्तर न आने पर इधर उधर देखने लग जाता है उसी समय इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है और कहा जाता है की यह तो बगलें झांक रहा है ।

बगलें झाँकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग bangle jhankna muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌जब चाचाजी ने रामलाल से पूछा की तुमरा बेटा कितना कमाता है तो रामलाल बगलें झाकने लगा क्योकी उसका बेटा बिल्कुल भी नही कमाता था ।

IAS interview मे जब सुरज से सवाल जबाब हुआ तो वह बगले झाकने लगा जिसके कारण से उसे अधिकारियो ने कहा की यहां पर बगलें झांकने वालो को नोकरी नही मिलती ।

बगलें झाँकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग bangle jhankna muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌गाव मे बिमारी के इलाज के लिए जब गाव के लोगो से सहयोग मागा गया तो सभी बगलें झांकने लगे ।

साहब ये लोग तो बगलें झांक रहे है ये हमारी मदद कैसे करेगे ।

बगलें झाँकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग bangle jhankna muhavare ka vakya me prayog

सुरज से जब अधिकारी ने गुन्हेगारो की रीपोट मागी तो वह बगलें झाकने लगा क्योकी उसने अभी एक भी गुन्हेगार को पकडा नही था ।

सरपंच गाव के विकाश के नाम पर रूपय उठा कर खां गया मगर जब गाव के लोगो को इस बारे मे पता चला तो वे सरपंच से सवाल जबाब करने लगे जिसके कारण से सरपंच बगलें झाकने लगा ।

बगलें झाँकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग bangle jhankna muhavare ka vakya me prayog

अगर ‌‌‌तुम्हे प्रशन के उत्तर का पता नही है तो सिधे सिधे बता दो ना इस तरह से बगलें झाकने से क्या होगा ।

दसवी कक्षा का पेपर देख कर सुसिला बगलें झांकने लगी ।

पहले से पढाई कर कर आई नही और जब पेपर मे प्रशनो को पढा तो बगलें झाक रही हो ।

बगलें झाँकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग bangle jhankna muhavare ka vakya me prayog

आईआईटी का पेपर देकर घर लोटा रमेश से जब उसके पिता ने प्रशन के ‌‌‌उत्तर पूछे तो रमेश बगलें झांकने लगा ।

बगलें झाँकना मुहावरे पर कहानी bangle jhankna muhavare par kahani

एक समय की बात है किसी नगर मे एक सेठ रहा करता था । जिसके घर मे उसकी पत्नी और उसका एक बेटा रहा करता था । सेठ के बेटे का नाम गुलचंद था। सेठ नाम का ही सेठ था क्योकी वह इतने ही पैसे कमा पता था की उसका घर आसानी से चल ‌‌‌जाता था । ‌‌‌फिर भी उसने गुलचंद को पढाया लिखाया ताकी वह पढ लिख कर कोई बडा आदमी बन सके ।

मगर गुलचंद पढाई में बहुत ही कंमजोर था । जो उसके पिता को दिख नही रहा था बल्की वह तो उसे जबर्दस्ती पढाई करवाने लगा था । जिसके कारण से गुलचंद पढाई करता रहा था । जब गुलचंद पढाई करते हुए बडा हो गया तो सेठ ने उसे नोकरी की ‌‌‌तैयारी करने को कहा । अपने पिता की बात सुन कर गुलचंद नोकरी की तैयारी करने मे लगा था ।

साथ ही अब वह स्वयं भी चाहने लगा था की वह कोई अच्छी जोब मे लग जाए तो उसकी Life सेटल हो जाए । ऐसा सोच कर वह नोकरी की तैयारी करने लगा था । उसने कई वर्षो तब railway मे नोकरी की तैयारी करता था । ‌‌‌मगर वह जब भी ‌‌‌पेपर देने के लिए जाता तो उसे कुछ नही आता था।

जिसके कारण से पूरे समय वह परिक्षा कमरे को झांकते रहता था । इस तरह से कई दिनो तक चलता था । मगर एक दिन सेठ को इस बारे मे पता चलने लगा था । तब सेठ ने उसे समझाया की बेटा अगर नोकरी लग जाएगा तो तुम आराम से पैसे कमा पाओगे । इस तरह से कह कर सेठ उसे नोकरी ‌‌‌का लालच देने लगा था ।

जिसके कारण से वह नोकरी की तैयारी करने मे जोरो सोरो से जुट गया । इस तरह से पढाई करने के कारण से गुलचंद की नोकरी रेलवे मे लग गई थी । मगर जब उसके चाचे के लडके को इस बारे मे पता चला तो उसने कहा की गुलचंद तुम रेलवे मे नोकरी कर कर क्या करोगे वहा पर तुम्हे दिन भर काम करना होगा ‌‌‌। इससे बेस्ट नोकरी तो मेरी है ।

उस समय गुलचंद के चाचे का लडका बैंक मे काम करता था । इस कारण से गलचंद ने उसकी बाते सुनी तो उसे भी लगा की रेलवे मे कोई भी इज्जत नही है । ऐसा सोच कर वह फिर बैंक की तैयारी मे लग गया । और रेलवे की नोकरी को ऐसे ही छोड दिया था । तब उसके पिता ने कहा की बेटा जब तक ‌‌‌तुम्हे बैंक मे नोकरी नही मिल जाती तुम रेलवे मे काम कर लो ।

मगर वह नही माना क्योकी उसके चाचे का लडका बडा ही सानदार तरह से दिखावा करता था । साथ ही गाडी मे जाता था ‌‌‌और गाडी मे आता था । यह देख कर गलचंद भी उसकी तरह बनने मे लगा रहा । इस तरह से बैंक की नोकरी मे भी वह एक ‌‌‌बार विफल हो गया ।

मगर अगली बार ‌‌‌उसने बैंक का पेपर तोड लिया । अब उसका इंट्रव्यू बचा था जिसके कारण से गुलचंद अपने चाचे के लडके से बात कर रहा था । तो उसने कह दिया की वह उसे इंट्रव्यू मे आसानी से पास करवा देगा । ऐसा सुन कर गुलचंद ने फिर पढाई करनी बंद कर दी थी । तब उसके पिता ने कहा की बेटा तुम अपनी तैयारी कर लो दूसरो ‌‌‌के भरोष मे मत रह जाना ।

मगर हुआ यह क्योकी गुलचंद अपने चाचे के लडके के भरोषे मे बिना तैयारी के इंट्रव्यू देने के लिए चला गया । जिसके कारण से जब अधिकारीयो ने उससे प्रशन पूछे तो उसे उनका उतर नही आ रहा था । जिसके कारण से वह इस इंट्रव्यू रूम को देखने लगा था । यह देख कर अधिकारी समझ गए की इसे ‌‌‌कुछ भी पता नही है ।

जिसके कारण से फिर अधिकारीयो ने उससे बहुत ही साधारण प्रशन पूछे मगर उसे उनका भी उत्तर नही आ रहा था बल्की वह अब भी इधर उधर देखर रहा था । तब अधिकारी ने गुलंचद से कहा की कुछ तैयारी कर कर आए हो की ऐसे ही आ गए हो । क्योकी हम जब भी तुम्हें प्रशन पूछते है तो तुम बगलें झाकने लग ‌‌‌जाते हो ।
अधिकारीयो की यह बात सुन कर भी गुलचंद कुछ नही बोला जिसके कारण से अधिकारियों ने उसे इंट्रव्यू से निकला दिया । जब गुलचंद अपने घर गया तो उसके पिता ने पूछा की क्या हुआ, इंट्रव्यू में पास हो गए थे क्या । तब उसने कुछ नही कहा जिसके कारण से सेठ आसानी से समझ गया की जरूर कुछ बात‌‌‌ हुई होगी ।

तब सेठ ने अपने बेटे से पूछा की तुमने उनके प्रशनो का सही तरह से जबाब तो दिया था की बेठे बेठे बगलें झांक रहे थे । यह सुन कर गुलचंद ने कहा की मैंने तो सारे सवालो के जबाब दिए मगर उन्होने मुझे फिर भी निकाल दिया ।

यह सुन कर सेठ ने कहा की बेटा मुझे पता है क्या हुआ होगा । मैंने पहले ही ‌‌‌कहा था की किसी की बातों का विश्वास मत करना । इतना सुन कर गुलचंद अपने कमरे मे चला गया । वहा जाकर वह सोचने लगा की अगर उस दिन वह रेलवे मे नोकरी कर लेता तो आज उसे इस तरह से परेशान होने की जरूरत नही पडती ।

इस तरह से वह ‌‌‌पहले की गई गलती के बारे मे सोच सोच कर दूखी हो रहा था । इस तरह से गुलचंद को नोकरी ‌‌‌नही मिल पाई । अब आपको इस कहानी से पता चल गया होगा की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ।

बगलें झांकना मुहावरे पर निबंध bangle jhankna muhavare par nibandh

साथियो कुछ लोग जब भी किसी के घर मे जाते है तो उनके घर को बडी ही गोर से देखने लग जाते है । साथ ही कुछ लोग बात करते समय दूसरो के घरो को देखते है की किसने अपने घर को किस तरह से सजा ‌‌‌रखा है । इस तरह से ‌‌‌देखने को ही बगलें झाकना कहा जाता है । साथ ही अध्यापक जब विधार्थी से कोई प्रशन पूछता है तो वह या तो प्रशन का उतर दे देता है मगर जब उसे उतर नही आता है तो वह कलाश रूप को इधर उधर देखता है ।

जिसके कारण से उत्तर न आने पर इधर उधर देखने पर भी इस मुहावरे का प्रयोग होता है । इस तरह ‌‌‌से संक्षिप्त में कह सकते है की इस मुहावरे का अर्थ उत्तर न होने पर इधर उधर देखना या इधर उधर देखना होता है ।

बगलें झाँकना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of bangle jhankna in Hindi

दोस्तो यहां पर जिस बगले शब्द का प्रयोग किया जा रहा है वह मकान को देखने के बारे में नही होता है । हालाकी आप ऐसा समझने के लिए मान सकते है । दरसल इधर उधर देखना ही इसका अर्थ होता है जो की आपने उपर जो कुछ पढा है उसके माध्यम से समझ गए है ।

और जब आप इधर उधर देखते है चाहे फिर किसी भी कारण से देखते हो तो उस समय इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है और यह आपको पता होना चाहिए ।

दरसल दोस्तो मुहावरा जो होता है उसका वही पर प्रयोग होता है जहां पर मुहावरे का अर्थ निकलता हो ।

दोस्तो आपको बता दे की यह जो मुहावरा है वह आपके लिए काफी उपयोगी हो सकता है क्योकी इस मुहावरे को पीछले कुछ वर्षों में बार बार एग्जामों में पूछा जाता है और इसका मलतब हुआ की यह आपके लिए उपयोगी है ।

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