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लकीर पीटना Meaning of idiom and usage of idiom in a sentence

लकीर पीटना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

लकीर पीटना मुहावरे का अर्थ lakir pitna muhavare ka arth पुरानी प्रथा या रीति पर चलना

लकीर पीटना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त लकीर पीटना मुहावरे का अर्थ  पुरानी प्रथा या रीति पर चलना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
लकीर पीटनापुरानी प्रथा या रीति पर चलना
लकीर पीटना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

लकीर पीटना मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो पुराने समय में जैसा पिता होता था वैसा ही बेटा होता था । अगर पिता अच्छा और नेक दिल होता तो उसका बेटा भी अच्छा और नेक दिल होता था । साथ ही वह अपने पिता की रीति पर ही चलता था यानि जैसा पिता करता था वैसा ही बेटा करता था । अगर कोई उस समय ऐसा नही करता तो उसे बहुत भला बुरा कहा जाता था ।

मगर आज ऐसा नही है यानि जैसा पिता होता है वैसा बेटा होगा यह जरूरी नही है । क्योकी वर्तमान मे पिता बुरा होता है तो बेटा अच्छा भी हो सकता है और इसी के विपरीत पिता अच्छा होता है तो बेटा ‌‌‌बुरा हो सकता है । ‌‌‌और आज पुरानी रितो पर कोई नही चलता है सभी अपने मन की करता है मगर जब कोई व्यक्ति पुरानी रितो के अनुसार काम करता है तो उसके लिए इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

लकीर पीटना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग lakir pitna muhavare ka vakya me prayog

रामलाल का बेटा बिल्कुल रामलाल की तरह ही है वह सब कार्य ‌‌‌अपने पिता की तरह ही करता है जैसे मानो की वह लकीर पीट रहा हो ।

जब बेटिया शिक्षा ग्रहण करने लगी तो सभी कहने लगे की बेटियो का शिक्षा ग्रहण करना अच्छा नही है मगर यह बात सुन कर कुछ ज्ञानी बोल पडे की जरूरी तो नही की हर समय लकीर पीटी जाए ।

लकीर पीटना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग lakir pitna muhavare ka vakya me prayog

पहले बेटी का जन्म होता था तो लोग अपसगुन माना करते थे मगर ‌‌‌आज ऐसा नही है बेटी के जन्म होने पर लोग लक्ष्मी का वास मानते है जिससे सिद्ध होता है की लोग लकीर पीटना छोडने लगे है ।

जनाब जमाना बदल गया है अब लोग एक जगह बैठ कर दुसरी जगह का हाल चाल जान लेते है परन्तु तुम तो अभी भी लकीर पीटने मे लगे हो ।

लकीर पीटना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग lakir pitna muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌जब सुरेश के दादाजी ने कहा की हमारे जमाने मे लोग शिक्षा लेना तक नही चाहते थे और आज बेटिया शहर जार पढ रही है तब सुरेश ने कहा की दादाजी जमाना बदल रहा है और ‌‌‌आप आज भी लकीर पीट रहे हो ।

‌‌‌वर्तमान मे लकीर पीटना मुर्खता से कम नही है ।

सेठ आज समय बदल गया है और आप अभी भी हर काम लकीर पीट कर करते हो ।

लकीर पीटना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग lakir pitna muhavare ka vakya me prayog

तुम शिक्षा ग्रहण कर चुके हो और अभी भी लकीर पीट रहे हो यह अच्छा नही है अपनी शिक्षा का उपयोग करना चाहिए ।

अपने माता पिता के रास्ते पर चल कर हर किसी को लकीर पीटना चाहिए ।

लकीर पीटना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग lakir pitna muhavare ka vakya me prayog

तुम्हारे ‌‌‌पिता गाव के सबसे नेक आदमी थे और तुम बहुत बुरे बन रहे हो अरे अपने पिता की लकीर पीटना सिख लो ।

मैं अपने पिता की लकीर पीटूगा भले ही लोग मुझे मुर्ख क्यो न समझ ले ।

लकीर पीटना मुहावरे पर कहानी lakir pitna muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे नटवरलाल नाम का एक आदमी रहा करता था । वह बहुत ही नेक आदमी था साथ ‌‌‌ही वह जो भी काम करता था वह अपने संस्कारो के हिसाब से करता था । साथ ही जो भी कोई उसके पास आता वह उसे अपने पुरानी परमराओ और संस्कारो को सिखाने लग जाता था । इसके अलावा वह अपने गाव के लोगो की मुसीबत में मदद भी करता था ।

नटवरलाल के घर मे उसकी पत्नी और एक बेटा व एक बेटी रहा करती थी । ‌‌‌साथ ही उस समय शिक्षा का दोर चल रहा था जिसके कारण से नटवर ने भी सोच ‌‌‌लिया की जब उसका बेटा बडा होगा तो वह उसे भी शिक्षा लेने का मोका देगा । अब नटवरलाल अपने बेटे के बडे होने का इंतजार कर रहा था ।

जब बेटा बडा हो गया तब नटवरलाल ने अपने बेटे को शिक्षा लेने के लिए विधायल के शिक्षक से बात की । तब उस ‌‌‌शिक्षक ने कहा की बेटो को तो आजकल सभी शिक्षा दिलवाने लगे है मगर आज का समय ऐसा आ गया है की बेटिया भी शिक्षा मे पिछे नही रह रही है । यह सुन कर नटवरलाल ने कहा की नही हमारे जमाने मे तो बेटियो को घर से बाहर तक नही जाने दिया जाता था ।

तब शिक्षक ने कहा की नटवर जी समय बदल रहा है और बेटियो का भी हक ‌‌‌बनता है की वे शिक्षा ग्रहण कर कुछ बडा काम करे । मगर नटवर नही मान रहा था । जिसके कारण से शिक्षक ने फिर से समझाते हुए कहा की नटवर जी कुछ काम ऐसे होते है जनमे लकीर पीटना जरूरी नही होता है । क्योकी आज के कुछ वर्षो के बाद मे हर कोई अपनी बेटियो को शिक्षा देने का भी मोका ‌‌‌देने लगेगा ।

क्योकी आने वाला ‌‌‌समय शिक्षा का दोर है इस कारण से जो शिक्षा से दूर रह जाता है वह अपने जीवन मे बहुत से कार्यो से दूर हो जाएगा । साथ ही शिक्षक ने कहा की बेटा बेटी जब एक समान हो गए है तो शिक्षा के मामले में भी वे एक समान हो गए यह तो आज की सरकार का फैसला बन गया है ।

इस तरह से शिक्षक के समझाने पर नटवरलाल ने कहा की अगर ‌‌‌मैं अपनी बेटी को शिक्षा लेने के लिए विधालय भेजुगा तो लोग क्या कहेगे । यह सुन कर शिक्षक ने कहा की आपको लोगो की परवाह नही करनी चाहिए अगर आप लोगो की परवाह कर ही रहे है तो आप लोगो को भी जगाए की वे अपने बेटे के समान अपनी बेटी को भी शिक्षा लेने का मोका दे ।

साथ ही शिक्षक ने कहा की अगर आज आप ऐसा ‌‌‌करोगे तो आने वाले समय मे आपका इन लोगो मे नाम होगा । इस तरह से सुन कर नटवरलाल मान गया और अपने गाव जाकर अपने गाव वासियो से प्रार्थना करने लगा की वे अपने बेटे के समान बेटियो को भी शिक्षा देने का मोका प्रदान करे ।

यह सुन कर लोग कहने लग जाते है की नटवर जी आप तो हर समय परंपरा की बात करते हो और आज आप ‌‌‌ही बेटियो को शिक्षा देने की बात कह रहे हो । तब नटवर लाल ने कहा की यह शिक्षा का मामला है और आने वाले समय मे शिक्षा के बिना कुछ नही होगा । और रही बात परंपराओ की तो हर कार्य मे लकीर पीटना भी अच्छा नही है ।

इस तरह से नटवरलाल ने लगो को जागरूक करने का बिडा उठा लिया था । मगर उसने सबसे पहले अपने ‌‌‌बेटे के साथ अपनी बेटी को शिक्षा ग्रहण करवाई । यह देख कर गाव के कुछ लोग भी नटवर की बात से सहमत हो गए थे । इस कारण से उन्होने भी अपनी बेटियो को विधालय भेज दिया ।  इस तरह से नटवर लाल ने गाव के लोगो मे शिक्षा के प्रति लडके व लडकी के भेदभाव को दूर करने का कार्य शुरू कर दिया था ।

और एक ही वर्ष में ‌‌‌लोगो को समझ मे आ गया की नटवरलाल की बात सही है की बेटियो को पहले के समय मे विधालय नही भेजा जाता था मगर आज भेजाना जरूरी हो गया है । क्योकी लकडे भी पहले पढाई नही करते थे मगर आज कर रहे है । इस कारण से शिक्षा के मामले मे लकीर पीटना अच्छा नही है ।

यह बात लोगो के समझ मे आने का एक कारण यह भी रहा था की ‌‌‌आस पास के गावो के लोग अपनी बेटियो को शिक्षा ग्रहण करने के लिए विधालय भेजने लगे थे । इस तरह से नटवरलाल ने अपने गाव के लोगो के दिमाग मे शिक्षा के प्रति पुरानी बात को नष्ट कर दिया । जिसके कारण से लडके व लडकिया दोनो शिक्षा ग्रहण करने ‌‌‌लगे । इस तरह से आपको इस काहनी से मुहावरे का अर्थ समझ ‌‌‌में आ गया होगा ।

लकीर पीटना मुहावरे पर निबंध lakir pitna muhavare par nibandh

साथियो लकीर एक टेडी मेडी या सिधी रेखा होती है यानि लकीर आ अर्थ रेखा से होता है । और पीटना का अर्थ मारने से होता है । मगर यहां पर पीटने का अर्थ लकीर पर चलने से माना गया है । अब जैसे रेखा चलती है उसी के पीछे पीछे चला जाता है । ‌‌‌यानि लकीर पीटने का अर्थ रेखा पर चलना कह सकते है । अब भी यह इसका सही अर्थ नही है क्योकी मनुष्य जीवन मे इसका प्रयोग हो रहा है ।

इस कारण से जैसे पुराने समय से मनुष्य चला आ रहा है और उसके पिछे पिछे यानि उसकी परमपराओ पर आज मनुष्य चल रहा है । इस बात के कारण से यह कह सकते है की पुरानी प्रथा या ‌‌‌निती पर आज का मनुष्य चल रहा है । क्योकी अब लकीर पीटना और मनुष्य का चलाना दोनो बात एक हो गई है ।

इस कारण से लकीर पीटना मुहावरे का सही अर्थ पुरानी निती पर चलना होता है । और जब कोई व्यक्ति पुरानी प्रथा या निति पर चलता है वही इस मुहावरे का प्रयोग होता है । इस तरह से ‌‌‌आप समझ गए होगे ।

लकीर पीटना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of lakir pitna in Hindi

दोस्तो अगर आप आज के समय में देखते है तो ऐसे बहुत ही कम लोग मिलते है जो की पुरानी प्रथा या रीति पर चलते हो । दरसल ज्यादातर ऐसे ही लोग है जो की पुरानी बातो को मानते तक नही है और वर्तमान की बातो को मानते है और उसी के अनुसार कार्य करते है । और यह आपको पता है ।

मगर आपको बात दे की हर कार्य में पुरानी बातो को न मानना भी गलत होता है क्योकी यह हमारे धर्म को नष्ट करने का काम भी करता है । दरसल अगर कोई ऐसी बात है जो की धर्म के अनुसार पुरानी है तो आप उसे नए रूप में मानते है और पुरानी बात को नही मानते है तो यह गलत होता है ।

मगर कुछ लोग होते है जो की प्रत्येक बात को पुराने जमाने के अनुसार ही मानते है । यानि हमेशा पुरानी बातो की ही बात करते है और उसी के अनुसार कार्य करते है तो ऐसे लोगो के लिए ही इस मुहावरे का प्रयोग होता है । दरसल असल में इस मुहावरे का अर्थ पुरानी प्रथा या रीति पर चलना ही होता है ।

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