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ठन ठन गोपाल का अर्थ, वाक्य मे प्रयोग और कहानी

ठन ठन गोपाल का अर्थ, वाक्य मे प्रयोग और कहानी

ठन ठन गोपाल मुहावरे का अर्थ than than gopal muhavare ka arth – बहुत गरीब होना

दोस्तो आज के समय मे हर कोई पैसे कमाने की इच्छा रखता है । पर जहां पर पैसे वाले लोग होते है वही पर गरीब लोग भी होते है जिनके पास पैसे नही होते है । अगर कोई व्यक्ति इतना गरीब हो की उसके पास समय पर खाना ‌‌‌भी नही आता है । यानि इस तरह का गरीब कोई हो तो उसके लिए इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है । इस तरह से इस मुहावरे का अर्थ बहुत गरीब होना होता है ।

ठन ठन गोपाल का अर्थ, वाक्य मे प्रयोग और कहानी

ठन ठन गोपाल मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • ‌‌‌तुम्हारे पास देने को है ही क्या तुम तो ठन ठन गोपाल हो ।
  • रमेश के पिता पहले बहुत अमीर थे पर उन्होने अपने ‌‌‌सारे पैसे गरीबो मे बाट दिए इस कारण से आज ‌‌‌वे ठन ठन गोपाल है ।
  • इस राजा ने अपने राज्य मे किसी को भी ठन ठन गोपाल नही रहने दिया ।
  • बेचारा ठन ठन गोपाल है फिर भी तुम्हे अपने घर आने के लिए कह रहा है इससे बढ कर ‌‌‌और कोई बात हो सकती है क्या ।
  • अगर तुम ठन ठन गोपाल हो तो मेहन्त करो और अपना पेट भरो ।
  • ‌‌‌गाव के सेठ ने राजेश से पैसे मागे तो लोग सेठ से कहने लगे की यह तो ठन ठन गोपाल है इसके पास पैसे कहा है ।
  • भला मे आपकी कैसे मदद कर सकता हूं मे तो ठन ठन गोपाल हूं ।
  • अगर ठन ठन गोपाल होना बुरा है तो मै इस दुनिया मे नही रहना चाहता हूं ।
ठन ठन गोपाल का अर्थ, वाक्य मे प्रयोग और कहानी

‌‌‌ठन ठन गोपाल होना मुहावरे पर कहानी Idiom story

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे बहादुर नाम का एक आदमी रहता था । उसके घर मे उसके अलावा और कोई भी नही था । उसके माता पिता भी मर गए थे । बहादुर नाम के अनुसार ‌‌‌ही बहादुर था इस कारण हर कोई उसे काम दे देता था ।

बहादुर के पिता बहुत ही अमीर थे इस कारण से उन्होने उसे ‌‌‌बहुत पढाया था । बहादुर के पिता बहुत ही शांत स्वभाव के आदमी थे और जो भी कोई उनसे मदद मागने के लिए आ जाता तो वह उसकी मदद कर देते थे । इस कारण से उनके पास गाव के अनेक लोग आते थे ।

बहादुर भी अपने पिता से जो चाहता ले सकता था । उसे बचपन मे ही अच्छा आहार मिला था इस कारण से वह बहुत ही होसियार हो गया ‌‌‌था । जब बहादुर के पिता इतने शांत स्वभाव के थे तो वह भी अपने पिता के जैसा बन गया था । पर एक बार गाव मे बाढ आ गई थी इस कारण से लोगो के घर पानी मे बह गए थे ।

लोगो पर ऐसी मुसीबत आते देखकर बहादुर के पिता ने उनकी मदद करने की सोची और लोगो ने भी उनसे मदद मागी थी । तब बहादुर के पिता के पास ‌‌‌जो भी था वह सब दान कर दिया था । दान कर देने के कारण उनके पास भी अब कुछ नही बच सका था ।

इस कारण से वे भी गाव के लोगो के साथ एक छोटी सी कुटिया बनाकर रहने लगे थे । तब तक बहादुर बहुत बढा हो गया था । कुटिया मे रहने के कारण बहादुर के माता पिता को वह माहोल जचा नही था और अनेको ‌‌‌बिमारियों के कारण उनकी ‌‌‌मृत्यु हो गई थी ।

अब बहादुर अकेला ही उस कुटिया मे रहता था । इस कारण से वह अपना पेट भरने के लिए लोगो के खेतो मे काम कर लेता और वह अपना पेट भर लेता था । उसके पिता ने लोगो को पैसे दान किए थे इस कारण से बहादुर ने उन पैसो को कभी भी लोगो से नही मागे थे ।

गाव के लोग भी उसे पैसे नही देना चाहते थे इस ‌‌‌कारण से उन्होने भी उसे पैसे नही दिए । इसी तरह से बहादुर को कभी काम मिल जाता तो कभी नही मिलता था । जिस दिन काम मिल जाता उस दिन उसे दो समय का खाना नसीब हो जाता था और जिस दिन काम नही मिलता तब उसे खाना भी नसीब नही होता था । ‌‌‌उस दिन उसे खाली पेट ही अपनी कुटिया मे सोना पडता था ।

धिरे धिरे समय बित ‌‌‌गया पर अब भी वह ‌‌‌वैसा ही रहता था । यानि उसके पास कुछ भी नही था । एक दिन की बात है उस गाव मे कुछ लोग आए थे जिनको एक पढा लिखा लडका चाहिए था जो बहादुर व इमानदार हो । इस कारण से ‌‌‌वे गाव के लोगो से पूछने ‌‌‌लगे थे ।

तब कोई कहता की मेरा बेटा बहुत ही बहादुर व इमानदार है । पर असल मे उस गाव मे कोई भी पढा‌‌‌ लिखा नही था । तब कुछ लोगो ने कहा की एक आदमी है जो आपके काम आ जाएगा जो वहां उस कुटिया मे रहता है । इतना सुन कर वे लोग उस कुटिया मे चले गए थे ।

तब उन्हे दिखा की उसके पास तो अच्छे कपडे भी नही है । यह देखकर वे वहां से वापस जोने लगे थे । पर जैसे ही वे वहां से जाने लगे तब बहादुर ने उन लोगो से कहा ‌‌‌की आप अंदर आ जाओ जा क्यो रहे हो । इसी तरह से उसने कुछ अग्रेजी शब्द भी बोल दिए थे फिर भी वे वहां नही रुके ।

तब गाव के एक आदमी ने उसकी कहानी ‌‌‌उन लोगो ‌‌‌को बताई और कहा की उसके पिता ने हम सबको जीवन दान दिया है और इसके लिए उन्होने अपना घर भी बेच दिया । यह उनका ही बेटा है और बिलकुल उनके जैसा ही है। ‌‌‌पर अब इसके पास कुछ भी नही यह ठन ठन गोपाल है ।

उसके बारे मे जान कर वे फिर से बहादुर के पास गए और कहा की तुम क्या शहर जाकर काम करोगे । तब बहादुर ने कहा की मुझ ठन ठन गोपाल को आप जैसे अमीर क्यो काम देगे । तब उन लोगो ने कहा की हमे तुम्हारे बारे मे पता चल गया है । इसी कारण से तुम्हे नोकरी दे रहे है ‌‌‌।

इस तरह से बहादुर को नोकरी मिल गई जिसके कारण वह गरीबी से मुक्त हो गया था । और फिर वह पहले की तरह ही अपना जिवन आराम से चलाने लगा था। इस तरह से आप समझ गए होगे की इस कहानी का अर्थ क्या है ।

ठन ठन गोपाल होना मुहावरे पर निबंध Essay on idiom

साथियो इस दुनिया मे ‌‌‌आज पैसे वाले लोगो का ही बोल बाला है । अगर ‌‌‌किसी के पास पैसे आ जाते है तो वह लोगो मे महान बन जाता है और जिनके पास पैसे नही होते वह लोगो मे बुरा बन जाता है । इस कारण से पैसो का मोल बहुत ही ज्यादा है ।

पर यहां पर सभी तो पैसे वाले होते नही है कुछ गरीब भी होते है। या फिर यह कह सकते है की ‌‌‌हमेशा तो हर कोई पैसे वाल रहता नही है । मेरे कहने का ‌‌‌अर्थ की जिनके पास पैसे नही होते वह गरीब हो जाते और उन्हे समय पर खाना भी नही मिल पाता है ।

इस तरह से जब वे बहुत गरीब हो जाते है तो उन लोगो के लिए कहा जाता है की यह तो ठन ठन गोपाल है यानि बहुत ही गरीब है । इस तरह से आपको यह पता चल गया होगो की इस मुहावरे का प्रयोग वही होता है जहां ‌‌‌पर कोई बहुत गरीब होता है ।

ठन ठन गोपाल मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of than than gopal in Hindi

दोस्तो सच कहे तो इस मुहावरे को समझना आपके लिए कुछ कठिन हो सकता है । मगर हमने जो तरीके आपको बताए है आप उन तरीको के माध्यम से इस मुहावरे को समझ सकते है ।

जैसे की आपको पता है की गोपाल कृष्ण जी को कहते है जिनके पास किसी चिज की कोई कमी नही होती है । मगर असल में वे स्वयं को काफी गरीब मानते हैं। मतलब अपने पास जो कुछ है उन पर गुमान न कर सबसे छोटा और गरीब स्वयं को ही मानते है और यह सब उनके द्वारा बताए गई बातो के आधार पर कह सकते है ।

मगर ठन ठन शब्द गोपाल के आगे जुड़ने से यह बहुत गरीब होने को दर्शाता है ओर इस बात को आपको याद करना होगा और यही कारण है की आप इस मुहावरे यानि than than gopal muhavare ka arth – बहुत गरीब होना को समझ सकते है ।

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