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चुटकी लेना मुहावरे का अर्थ और वाक्य व कहानी

चुटकी लेना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

चुटकी लेना मुहावरे का अर्थ chutki lena muhavare ka arth kya hota hai हँसी उड़ाना या मजाक उड़ाना ।

चुटकी लेना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त चुटकी लेना  मुहावरे का अर्थ हँसी उड़ाना या मजाक उड़ाना  होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
चुटकी लेनाहँसी उड़ाना या मजाक उड़ाना, मजे लेना
चुटकी लेना मुहावरे का अर्थ और वाक्य व कहानी

चुटकी लेना  मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो इस दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जो की दुसरो का मजाक उड़ाते रहते है । और कभी कभार तो हम भी अपने साथियो का मजाक उड़ा लेते है या फिर कह सकते है की हंसी उडा लेते है ।

तो इस तरह से हंसी उड़ाने या मजाक उड़ाने की बात होती है तो इसे चुटकी लेना कहा जाता है । और इस बात का मतलब हुआ की जहां पर मजाक उड़ाने या हंसी उड़ाने की बात होती है वहा पर इसका वाक्य में प्रयोग भी हम कर सकते है ।

चुटकी लेना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  || chutki lena use of idioms in sentences in Hindi

चुटकी लेना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

1.        अक्षर सिधे साधे व्यक्ति की लोग चुटकी लेते रहते है ।

चुटकी लेना मुहावरे पर कहानी || chutki lena story on idiom in Hindi

दोस्तो एक शहर है जहां पर अनेक तरह के लोग रहते है और वहां पर एक अलग ही तरह का पहनावा चलता है । जो लोग होते है वे हमेशा साधारण कपड़ो में दिखाई देते है । वहां पर फैसन को तो नाम ही नही है  अब भला गावो में तो ऐसा होता है मगर वह शहर भी आज पहनावे के रूप में गाव की तरह बना हुआ था । अब वहां पर जो लोग रहते थे वे सच में नेक दिल थे और अपने इसी नेक दिल के कारण से सभी एक दूसरे के करीब रहते थे ।

इसी तरह से उस गाव में एक परिवार था जिसमें माता पिता और उनकी दो बेटिया रहा करती थी । पहली बेटी का नाम सरोज था और दूसरी बेटी का नाम रजनी था । सरोज और रजनी के जो पिता थे वे एक बैंक के कर्मचारी के रूप में काम करते थे ।

जिसके कारण से उनके पास अच्छी मात्रा में धन था और वही पर सरोज जो थी वह पढने में काफी होसियार थी तो उसके पिता ने उसे एलएलबी पढने के लिए दिल्ली भेज दिया । ​

वही पर रजनी जो थी वह पढने में जरा कमजोर थी और वह अध्यापक बनना चाहती थी तो वह उसी शहर में रह की अध्ययन कर रही थी। तो इस तरह से सभी का जीवन चल रहा था ।

 क्योकी सरोज जो थी वह दिल्ली में रहती थी तो वहां पर रहने के कारण से वह कुछ फैनसी कपड़े पहनने लगी थी और वह अपने शरह की तुलना में कुछ ज्यादा ही फैंसन करने लगी थी । और यह उसके पिता को भी पसंद नही था मगर दिल्ली में रहने के कारण से वह ऐसी ही बन गई ।

इस तरह से सरोज का दिल्ली में अध्ययन चल रहा था । काफी समय हो गया जब दिल्ली मे रहने के बाद में सरोज ने अध्ययन पूरा कर लिया तो उसके पिता ने उसे घर बुला लिया और वही पर छोटी बेटी जो की रजनी थी वह अभी B.Ed कर रही थी ।

मगर बडी बेटी बडी थी तो उसके विवाह की उम्र जो हो गई थी तो उसके पिता ने उसका विवाह तय कर दिया । अब सरोज जो थी उसका विवाह होने को था वही पर रजनी की अभी B.Ed चल रही थी तो वह विवहा से अभी बच गई थी ।

 एक महिने के बाद में सरोज का विवाह भी तय हो गया था तो सभी अब खुश थे और विवाह की तैयारी में लगे हुए थे । समय बितता जा रहा थाऔर एक महिना कब बित गया सिकी को पता ही नही चल पाया था ।

अब विवाह के दिन की बात है सरोज दिल्ली में रहने के कारण से विवहा के दिन अपने आप को सजाने के लिए मैंकप वुमैंन को भी बुला लिया था जो की सरोज का मेकम करे और उसे अच्छी तरह से सजा दे ।

 और इस तरह से सरोज मेअकप वगैरह करवाने लगी थी और तैयार हो रही थी । वही पर रजनी जो थी उसे यह सब पसंद नही था तो वह स्वयं ही तैयार होने लगी थी ।सभी ने विवाह के समय में एक से बढ कर एक कपड़े पहन रखे थे ।

मगर वही पर रजनी जो थी वह एक सुंदर सी साड़ी पहन कर आ गई थी । जिसे देख कर सरोज ने उसकी चुटकी लेने के लिए कहा की यह क्या पहन कर आ गई बिल्कुल जोकर लग रही हो । और यह कह कर हंसने लगी ।

 ऐसा कहने के कारण से आस पास जो सरोज की सहेली थी जो की दिल्ली में उकसे साथ रहती थी वह भी हंसने लगी थी । मगर यह सब कहने के कारण से रजनी को अच्छा नही लगा और वह बुरा मान कर कमरे से बहार चली गई  ।

बाहर जाने के बाद में सभी ने उसे देखा तो उसकी खुबसुरती की तारिफ की और सभी ने कहा की आज काफी अच्छी लग रही हो और यह सब कहने के कारण से रजनी को पता चल गया की उसकी बहन उसकी चुटकी ले रही थी और इसी कारण से वह वापस अपनी बहन के पास चली गई ।

 जैसे ही सरोज ने रजनी को देखा फिर से कहा की वहां मेरी शादी में तो आज एक जोकर भी आ गया । तब रजनी ने कहा की विवाह के लिए देरी हो रही है जल्दी से तैयार हो जाओ । और रही बात मैंरी तो मैं इसी तरह के कपडे पहनना पसंद करती हूं तुम्हारी दिल्ली की तरह फटे कपड़े नही पहनी हूं ।

ऐसा कहने पर जो सरोज की सहेली थी वह अपने आप के कपड़ो को देखती है जो की सच में वैसे ही थे जिसके कारण से उन्हे भी बुरा लगा । मगर कुछ समय के बाद में रजनी ने सभी से कहा की मैं तो सरोज की चुटकी लेने के लिए ऐसा कह रही थी आप सभी भी कफी अच्छी लग रही हो ओर इस तरह से कहने के कारण से भी खुश हो गई और रजनी और सरोज कीसहेली के बिच में दोस्ती हो गई ।

इतने में सरोज के पिता ने बहार से आवाज लगाई और कहा की जल्दी आ जाओ विवाह के लिए देरी हो रही है और यह कहने पर सरोज ने कहा बस अभी आते है । और फिर सरोज अपनी सेहेली के साथ विवाह के लिए चली गई ।

तो इस तरह से ​कुछ समय बितने पर सरोज का विवाह हो गया और उसकी सहेली जो थी अब सरोज के साथ खाना वगैरह करने लगी थी और इस तरह से पूरा काम हो चुका था और सुब होने को ही थी की सरोज के विदाई का समय आया तो इसे विदा कर दिया गया था ।

और इसके बाद में सभी अपने अपने घर चले गए । तो इस तरह से  सरोज का विवाह हो गया था और विवाह के समय में रजनी और सरोज एक दूसरे की चुटकी लेने लगी थी ।

दोस्तो कहानी में समझाने की कोशिश की गई थी की चुटकी लेना मुहावरे का अर्थ हँसी उड़ाना या मजाक उड़ाना होता है ।

अगर कुछ पूछना हो तो कमेंट कर देना ।

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