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खून जलाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य khoon jalana muhavare ka arth

खून जलाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य khoon jalana muhavare ka arth

खून जलाना मुहावरे का अर्थ khoon jalana muhavare ka arth बहुत मेहनत करना ।

खून जलाना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त खून जलाना  मुहावरे का अर्थ  बहुत मेहनत करना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
खून जलाना बहुत मेहनत करना ।
खून जलाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य khoon jalana muhavare ka arth

खून जलाना  मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो जब भी बहुत मेहनत करने की बात होती है तो किसान का नाम पहले आता है। क्योकी किसान तपती धुप में भी मेहनत करता रहता है। तो जब किसान जो होता है वह तेज सूर्य की रोशनी में बहुत ही अधिक मेहनत करता रहता है तो इससे उसके शरीर का जो खून होता है वह ऐसे लगता है जैसे की मानो जलने लग गया हो । मगर फिर भी वह किसान इसी तरह से मेहनत करता रहता है ।

तो इसी तरह से जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में किसी भी कारण से बहुत मेहनत करता है तो इस खून जलाना ​कहा जाता है।

खून जलाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग  || khoon jalana use of idioms in sentences in Hindi

खून जलाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

1.        बाबू भया अन्न पैदा करने के लिए बहुत से किसानो ने खून जलाया है तब जाकर हमारा पेट भर पाता है ।

खून जलाना मुहावरे पर कहानी ||  khoon jalana story on idiom in Hindi

दोस्तो एक बार की बात है बलवंत नाम का एक किसान हुआ करता था जो की अपने खेत में सफल को उगाता था और अच्छी मात्रा में अन्न पैदा करता था । इस तरह से उसे काम करते हुए पूरा जीवन बितता जा रहा था मगर वह अभी भी इसी तरह से काम करता जा रहा था ।

मगर किसान होने के कारण से बलवंत को कुछ ज्यादा फायदा नही मिल पाता था । क्योकी उसका जो अन्न था वह शहर में जाता था और शहर के लोग उसे बेचते थे तो उसकी किमत बिज में कुछ ज्यादा ही रह जाती थी । जिसके कारण से बलवंत ने एक बार एक योजना बनाई और उसने ठान लिया की आगे से वह अपना अन्न स्वयं ही गाव गाव में बेचने के लिए जाने वाला है ।

और जब इस बारे में बलवंत ने अपने दोस्त मनजीत को बताया तो उसे भी यह एक अच्छा फैला लगा और यह जानकर बलवंत को मनजीत ने कहा की ठिक है मैं भी तुम्हारे साथ जाने वाला हूं । यह सुन कर बलवंत को खुशी होई । क्योकी मनजीत जो था उसकेपास वाहन था और इसका फायदा बलवंत को भी​ मिल जाता है और यही कारण रहा था की बलवंत मान गया ।

अब बलवंत और मनजीत जो थे वे अपने खेत में दिन रात एक कर कर मेहनत करते जा रहे थे और इस बार अच्छी मात्रा में अन्न पैदा करने की सोच रख रखी थी । इसी तरह से काम करते हुए उन्हे बहुत समय बित गया था और अब उनकी जो फसल थी वह पक चुकी थी।

जिसके कारण से उस फसल को निकालने का समय आ गया था और यही कारण रहा था की जो बलवंत था वह अपनी फसल को सबसे पहले निकाल चुका था और यह देख कर मनजीत ने भी अपनी फसल को निकाल लिया था । दोनो को अच्छी मात्रा में अन्न की प्राप्त हुई थी । उस समय फसल को बहुत ही कम लोग निकाल पाए थे जिसका फायदा उठा कर अगले ही दिन दोनो अपनी फसल को बेचने के लिए चले जाते है ।

वह पहले गाव में जाते है तो वहां पर जाने के बाद में उनका जो अन्न था वह अच्छी किमत में बीक जाता है और यह देख कर दोनो को लगा की उन्हे तो इस तरह से अन्न बेचने के कारण से अच्छा मुनाफा हो सकता है । इस कारण से वे अपनी फसल लेकर दूर गाव में चले जाते है ।

वहां पर उनकी फसल की किमत कुछ ज्यादा थी मगर उस गाव के पास जो शहर था वहां की किमत के मुकाबले कुछ ज्यादा नही थी और यह सब देखने के कारण से ही लोगो ने उनके अन्न को अच्छी किमत में खरीदा था । इसी तरह से अन्न को बेचते हुए एक बार उन्हे एक आदमी मिला था जो की काफी धनवान था और वह अपने पैसो के कारण से अपने आपको को सबसे अच्छा मानता था ।

उस आदमी ने बलवंत और मनजीत को अपने पास बुलाया और कहा की अन्न खरीदना है क्या रेट चल रही है । और यह सुन कर दोनो ने अपने अन्न की किमत उसे बता दी । तब उस आदमी ने कहा की इतना महगा जरा अन्न लेकर आओ देखते है की आपके अन्न में क्या ऐसा है जो की आप इतना अधिक रूपये ले रहे हो । यह सुन कर मनजीत जाकर अन्न लेकर आ जाता है ।

 उस आदमी ने अन्न को देखा तो उसे अच्छा अन्न लगा मगर नाटक करते हुए कहा की इतना घटिया अन्न और किमत इतनी ज्यादा है । और इतना बोल कर उसने उस अन्न को जमीन पर फैक दिया और यह देख कर बलवंत को अच्छा नही लगा और उसने कहा की देखो साहब अन्न लेना है तो लो इस तरह से जमीन पर न फैके ।

तब मनजीत ने कहा की साहब आपको क्या पता इसी अन्न को पैदा करने कये लिए हमे खुन जलाना पड़ता है और इस तरह से जब उस आदमी ने दोनो की बात सुनी तो उसे बुरा लगा और कहा की ठिक है मेरे यहां पर अन्न रख दो । और इस तरह से अन्न की खरीददारी हो गई ।

इसके बाद मे जो आदमी था जिसने अन्न की खरीददारी की थी उसे समझ में आया की अन्न को भी महत्व देना जरूरी है  क्योकी जो किसान भाई है वे अपना खून जला कर इसे पैदा करते है ।

भले ही हम इसे ​किमत देकर खरीदते हो मगर फिर भी इसका महत्व समझना भी जरूरी है और इसके बाद में उस आदमी ने बलवंत और मनजीत से यह वादा किया की वह कभी भी फिर अन्न का अपमान नही करेगा और यह सुन कर दोनो को अच्छा लगा और फिर दोनो अपनी किमत लेकर चले गए थे ।

खून जलाना मुहावरे पर कहानी

इस तरह से फिर उन्हे अच्छा फायदा हो रहा था तो वे इसी काम को करने लगे ​थे और अपने जीवन में फिर इसी काम में लग गए और अपने जीवन में खुब रूपय कमा रहे है ।

तो इस तरह से दोस्तो कहानी से हमे पता चलता है की किसान अपना खून जला कर अन्न पैदा करते है तो इसे महत्व देना भी जरूरी है । और यह जो खून जलाना है वह एक मुहावरा है और इसका अर्थ होता है बहुत मेहनत करना ।

अगर कुछ पूछना हो तो कमेंट कर देना ।

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