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यहां समझे, सब्ज बाग दिखाना का मतलब और वाक्य व कहानी

यहां समझे, सब्ज बाग दिखाना का मतलब और वाक्य व कहानी

सब्ज बाग दिखाना मुहावरे का अर्थ sabj bag dikhana muhavare ka arth – झूठी आशा देना ।

दोस्तो आप लोगो ने देखा होगा की जब किसी का कुछ ऐसा काम होता है जो किसी दुसरे से ही हो सकता है । इस कारण से वह व्यक्ति उस आदमी के पिछे फिरता है ताकी वह ‌‌‌उसका काम कर दे । और जब उसे काम करने के लिए कहा ‌‌‌जाता है तो वह आदमी उसे कह देता है की मैं तुम्हारा काम जरूर कर दुगा और इस तरह से उसे विश्वास दिलाने लग जाता है ।

पर समय बितता जाता है और वह काम नही होता फिर भी वह आदमी उससे कह रहा है की मैं तुम्हारा काम जरूर करूगा । इस तरह से वह आदमी उसे झुंटी आशा देने लग जाता है । और इस तरह से जब कोई झूंटी ‌‌‌आशा देता है तो इसे सब्जबाग दिखाना कहा जाता है ।

यहां समझे, सब्ज बाग दिखाना का मतलब और वाक्य व कहानी

सब्ज बाग दिखाना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग

1.            आजकल लोग सब्ज बाग दिखाकर व्यपार करने लगे है जरा सावधान रहना ।

2.            आजकल हर कोई सब्ज बाग दिखाने लगा है ।

3.            प्रताब ने लोगो को विदेश भेजने का सब्ज बाग दिखाया और उनसे पैसे लेकर फरार हो गया ।

4.            नोकरी दिलाने ‌‌‌का सब्ज बाग दिखाकर लोगो से पैसे लूट कर ‌‌‌प्रताब फरार हो गया ।

5.            तुम तो हर किसी को सब्ज बाग दिखाकर लूट लेते हो और काम किसी का करते नही हो ।

6.            दिवाकर ने सब्ज बाग तो दिखा दिया दिया था पर तुम्हे लूटने का शोक चढा था जो उसे समझ नही पाए ।

7.            प्रताब कितने दिन हो गए ‌‌‌पर तुमने अभी तक मेरा काम नही किया है कही तुम मुझे सब्ज बाग तो नही दिखा रहे हो

यहां समझे, सब्ज बाग दिखाना का मतलब और वाक्य व कहानी

‌‌‌सब्ज बाग दिखाना मुहावरे पर कहानी

प्राचिन समय की बात है रामपुरा नाम का एक गाव था । उस गाव मे अनेक लोग रहा करते थे उन लोगो मे से ही एक लादुराम था । लादुराम के घर मे उसके अलावा और कोई भी नही था । लादुराम शहर मे रहता था और काम करता था । वह काम की तलाश मे अनेक शहरो मे फिर चुका था पर उसे कही पर ‌‌‌भी ‌‌‌अच्छा काम नही मिल सका था ।

पर उसे इस तरह से फिरने के कारण यह पता चला की आज के समय मे लोगो को काम चाहिए होता है और काम मिल नही पता है । साथ ही उसे यह भी पता चला की लोग अच्छे काम मे रूपय देकर भी लग सकते है ।

तब उसने योजना बनाई और अपने शहर के मित्रो को अपने साथ किया और कहा की अगर हमे जल्दी अमीर ‌‌‌बनना है तो लोगो को किसी तरह से लूटना होगा । इतना सुनते ही एक साथी बोल पडा की लोगो को हम डाकू बनकर लूटने लगेगे ।

तब लादूराम ने कहा नही हम लोगो को नोकरी लगाने की झूंटी आशा देगे जिससे लोग नोकरी के नाम पर हमे पैसे दे देगे । फिर हम उन पैसो को लकर वहां से फरार हो जाएगे । लादूरामे के सभी साथी उसके जैसा ‌‌‌ही सोचने वाले थे और उन लोगो के पास कोई काम था नही साथ ही वे सभी गरीब और उनके घर मे भी कोई नही था ।

इस कारण से वे सभी लादूराम की बात को मान गए । योजना बना कर वे सभी अपने शरह से ‌‌‌दूर एक गाव मे गए । वहां पर अनेक लोग रहा करत थे और सभी को किसी ऐसे काम की तलाश थी ‌‌‌जिसमे बहुत कमाई हो ।

तब लादूराम और उनके साथी वहां पर जाकर प्रचार करने लगे की अगर आप लोगो को नोकरी चाहिए तो आपको हम काम दिला देगे पर इसके लिए आपको पैसे देने होगे । लोगो को नोकरी चाहिए थी इस कारण से गाव के आधे से ज्यादा लोगो ने उन्हे बिना सोचे समझे पैसे दे दिए थे ।

तब लादूराम ने सोचा की ‌‌‌अगर हम कुछ दिनो तक यहां पर रह जाएगे तो बाकी के लोग भी पैसे दे देगे । इस कारण से लादूराम और उसके साथी दो दिनो तक वही पर रहे । अब दो दिनो मे जिन लोगो ने पैसे दिए थे वे सभी आकर उन लोगो से नोकरी कब लगाओगे ऐसा पूछने लगे थे ।

लोगो के पूछने पर लादूराम और उनके साथी कहते की बस पांच दिनो के बाद हम ‌‌‌आपको शहर ले जाएगे वहां पर आपको काम मिल जाएगा । इस तरह से कह कर लादूराम और उसके साथी लोगो को आशा देने लगे की वे उन्हे काम दिला देगे । और जब दो दिन बितने वाले थे तो वे सभी रात को ही उस गाव से फरार हो गए थे ।

जब शुबह ‌‌‌गाव लोग उठे तो उन लोगो ने देखा की लादूराम और उसके साथ हमारे गाव मे नही है ‌‌‌। यह देखकर लोगो को समझ मे आ गया की वह तो सब्जबाग दिखा रहा था और हम लोग उनकी बातो मे आ गए और उसे रूपय दे दिए थे । जिसे लेकर लादूराम और उसके साथी फरार हो गए थे ।

अब आधे से ज्यादा गाव को लूटने के कारण उन लोगो ने शहर मे उनके खिलाफ FIR लिखवा दी थी । जिसके कारण से पुलिस उन्हे ढूढने लगी थी । ‌‌‌पर लादूराम और उसके साथी तो उस शहर से भी चले गए थे और इसी तरह से किसी दुसरे गाव को लूटने लगे थे ।

धिरे धिरे लादूराम को इस तरह से लोगो को लूटते हुए 4 वर्ष हो गए थे और फिर एक दिन पुलिस ने लादूराम और उनके ‌‌‌साथियों को पकड लिया था ।

तब पुलिस वालो ने उसकी फोटो खिच कर आस पास के पुलिस थानो मे भेजी ‌‌‌तो उन पुलिस वालो को पता चला की लादूराम और उनके साथियों ने बहुत से गावो मे इस तरह नोकरी का सब्जबाग दिखाकर उनसे पैसे लूट लेते थे ।

जब आस पास के गावो मे भी उनके बारे मे पता चला तो लादूराम के गाव के लोगो ‌‌‌को भी उसके बारे मे पता चल गया था की लादूराम लोगो को किश तरह से नोकरी की झूंटी आशा देकर लूटता ‌‌‌था । इस तरह से आप लोगो को समझ मे आ गया होगा की इस कहानी से मुहावरे का क्या सम्बंध है ।

सब्ज बाग दिखाना मुहावरे पर निबंध

साथियो आज हर कोई लोगो को झूंटी आशा देकर लूटने मे लेगे है कोई व्यपार के नाम पर लोगो को लूटते है तो कोई नोकरी दिलाने के लिए लूट लेते है । ‌‌‌इसी तरह से कोई लोगो को किसी काम को करने के लिए सब्जबाग दिखाते है ।

इस तरह से हमे यह पता चलता है की झूंटी आशा देने को ही सब्जबाग दिखाना कहा जाता है । और जहां पर झूंटी आशा दी जाती है वही पर इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

दोस्तो यहां पर एक बात ध्यान रखने की है की ‌‌‌किसी तरह से लोगो को लूटने पर इस मुहावरे का प्रयोग नही किया जाता है बल्की जिस भी किसी कार्य मे झूंटी आशा दिखाई जाती है वही पर इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है । इस तरह से आप समझ गए होगे ।

सब्ज बाग दिखाना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of sabj bag dikhana in Hindi

दोस्तो अगर मैं आपको एक ऐसा सपना दिखाउ जिसमें कहा जाए की आपको एक दिन काफी सारा धन मिलेगा मतलब आपको खजाने का घर मिलेगा जहां पर धन ही धन होगा । तो आप यह सुन कर सिधे कहेगे क यह झूंटी आशा देना सही नही है । मतलब आप समझ जाओगे की मैं झूंठ बोल रहा हूं ।

मगर बहुत से लोग ऐसे ही करते है वे दूसरो को झूंठी आशा देते रहते है और लोग उनकी आशा को सही मानते है और मानते है की यह तो काफी अच्छा आदमी है या औरत है जो की मुझे ऐसा बोल रही हे और मेरा साथ दे रही है या रहा है ।

मगर असल में वे झूंठी आशा दे रहे है जो की सही नही होता है । मुहावरो की दुनिया में इस तरह से अगर कोई झूंठी आशा देता है तो उसे ही सब्ज बाग दिखाना कहा जाता है । इसका मतलब यह होता है की sabj bag dikhana muhavare ka arth – झूठी आशा देना है और यह पूरे लेख के माध्यम से आपने समझ लिया है ।

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