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चुल्लू भर पानी में डूब मरना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

चुल्लू भर पानी में डूब मरना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

चुल्लू भर पानी में डूब मरना मुहावरे का अर्थ chullu bhar pani mein doob marna muhavare ka arth – अत्यधिक लज्जित होना

दोस्तो आज के समय ‌‌‌किसी भी जगह क्यो न चले जाओ वहा पर बूरे लोग मिल ही जाते है । इस तरह के बुरे लोगो मे भी कुछ लोग ऐसे होते है जिनमे बुराई कुट कुट कर भरी ‌‌‌होती है । इस तरह के बुरे लोगो ‌‌‌के साथ जब कोई अच्छे लोग होते है और उन्हे पता चलता है की यह तो बहुत बुरा है । या यह कह सकते है की इस तरह के बुरे लोगो को हर कोई जली कटी सुनाता है जिसके कारण से बुरे लोग बहुत लज्जित होते है ।

चुल्लू भर पानी में डूब मरना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

इस तरह से जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक लज्जित हो जाता है तब उन लोगो के लिए कहा जाता है की ‌‌‌तुम्हे शर्म आनी चाहिए तुम्हे तो चुल्लू भर पानी मे डूब मरना चाहिए । इस तरह से जब कोई अत्यधिक लज्जित हो जाता है (यहा पर लज्जित होने का कोई भी कारण हो सकता है )  तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

चुल्लू भर पानी में डूब मरना ‌‌‌मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग ‌‌‌ Use in sentence

  • ‌‌‌जब महेश के बेटे का रीस्ता जुडने के बाद टुट गया तो महेश की चुल्लू भर पानी मे डूबने वाली बात हो गई ।
  • ‌‌‌बेटा जब गलत रास्ते पर चला गया तो लोगो ने रामलाल को दोषी ठहराया जिसके कारण रामलाल की चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात हो गई  ।
  • जब गाव के लोगो को पता चला की किसन ही चोर है जो पूरे गाव के लोगो के घरो मे चोरी करता है तो गाव के लोगो  ने ‌‌‌किसन के साथ चुल्लू भर पानी मे डूब मरने वाली बात कर दी
  • विवाह के दिन जब पता चला की दुलहन भाग गई तो दुलहन के पिता ‌‌‌के साथ चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात हो गई ।
  • हजारीप्रसाद तो अपने ही घर में डाका डालता है अरे उसे तो चुल्लू भर पानी मे डूब मरना चाहिए ।
  • किसन को तुमने पैसो के ‌‌‌लिए मार दिया तुम्हे तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए ।
चुल्लू भर पानी में डूब मरना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

‌‌‌चुल्लू भर पानी मे डूब मरना मुहावरे पर कहानी muhavare par kahani

‌‌‌एक समय की बात है किसी नगर मे हजारीप्रसाद नाम का एक साहुकार हुआ करता था । साहुकर के घर मे उसे तिन बेटे रहा करते थे । साहुकार की पत्नी की मृत्यु हो गई थी पर साहुकार ने अपने तिनो बेटो का विवाह जल्द ही कर दिया था । जिसके कारण से ‌‌‌अब साहुकार के घर मे उसके बेटो की पत्नी और रहा करती थी ।

साहुकार के पास पैसो की कोई कमी नही थी । पर फिर भी वह चाहता था की उसके तिनो बेटे अपना अपना काम करे । इस कारण से साहुकार ने अपने तिनो बेटो को काम करने को कह दिया था ।

इस कारण से वह अपने पिता के ‌‌‌साथ काम करने लगा था । पर जो दो बेटे और थे वे काम नही करते थे । उनकी सोच थी की पिताजी के पास पैसो की कोई कमी तो है नही जिसके कारण हम काम करे ।

इस तरह से सोच कर वे काम करने के लिए नही जाते थे । साहुकार का बडा बेटा कुछ भोला था । इस कारण से वह हमेश अपने पिता की बात मान लेता था । और इसके साथ ही अगर ‌‌‌उसके भाई उससे पैसे माग लेते तो वह उन्हे भी दे दिया करता था ।

इस तरह का साहुकार का बडा बेटा होने के कारण से गाव मे लोग भी उसके इस स्वभाव के कारण उसे पंसद किया करते थे । साथ ही साहुकार का भी गाव मे बहुत नाम था । जिसके कारण से जब भी साहुकार गाव के लोगो से कुछ कहता तो वे लोग साहुकार की बात मान ‌‌‌जाया करते थे ।

इस तरह से साहुकार का जीवन बहुत बीत गया था । अब साहुकार की उम्र बहुत अधिक होने लगी यानि उनकी मृत्यु नजदिक आने लगी थी । तब एक दिन की बात है तब साहुकार गाव के कुछ लोगो के साथ बैठा था ।

तब गाव के लोगो ने साहुकार से कहा की आपका बडा बेटा तो बडा अच्छा है वह तो आपका हर काम करता है। ‌‌‌पर आपके छोटे बेटे है वे सही नही है वे काम नही करते है । इस कारण से हमरा सुझाव है की अब इनको अलग कर कर बटवारा कर देना चाहिए ।

वरना आपके जाने के बाद ये आपके बडे बेटे को घर से निकाल देगे । यह सुन कर साहुकार ने कहा की ऐसा कुछ नही होगा । ‌‌‌इस तरह से साहुकार लोगो की बात नही माना । इस बात को तिन महिने ‌‌‌बित गए ।

तब एक दिन गाव के लोगो को पता चला की साहुकार की मृत्यु हो गई । यह खबर पाते ही गाव के सभी लोग उनके घर चले गए । और बादमे उनका अंतिम सस्कार कर कर अपने अपने घर गए थे ।

पिता के मरने के एक महिने बाद साहुकार का बडा बेटा काम करने के लिए जाने लगा था पर दोनो छोटे बेटे काम करने के लिए नही जाते ‌‌‌थे । इस तरह से पूरे एक वर्ष हो गया । तब एक दिन साहुकार का बडा बेटा अपने भाईयो को काम करने के लिए कहने लगा ।

जिसके कारण से उनके घर मे बहुत सोर होने लगा । जब इस तरह से दोनो छोटे भाईयो ने अपने बडे भाई को लडाई करते देखा तो वे योजना बनाने लगे की इसे किसी तरह से घर से निकाल दे और जायदाद हमारे ‌‌‌नाम कर ले तो फिर हमे कहने वाला कोई नही ‌‌‌होगा ।

इस तरह से फिर योजना के तहत एक दिन साहुकार के दोनो छोटे बेटो ने अपने बडे भाई को बहला-फुसलाकर जायदात के कागजो पर साईन करा लिए और फिर अपने भाई को धक्के मार कर घर से निकाल दिया ।

जब यह गाव के लोगो ने देखा तो कुछ लोग बोल पडे की हमने तो पहले ही साहुकार ‌‌‌को समझाया था की अपने बेटो को अलग कर दो वरना ये आपके मरने के बाद आपके बडे बेटे को घर से निकाल देगे और यही हो रहा है ।

क्योकी साहुकार ‌‌‌का ‌‌‌बडा बेटा गाव के सभी लोगो को अच्छा लगता था । जिसके कारण से गाव के लोग फिर साहुकार के दोनो छोटे बेटो को बुरा भला कह कर अत्यधिक लज्जित किया ।

यह सुन कर ‌‌‌उन दोनो से कुछ लोगो ने कहा की इसी ने तुम्हारी मदत करने के लिए इतने दिनो के लिए दुख झेल कर तुम्हे पैसे देते थे । और पिता के मरने के बाद भी तुम्हे एक वर्ष तक पाला और तुम्ही ने इसे घर से निकाल दिया अरे तुम तो भाई के नाम पर कसाई हो तुम्हे तो चुल्लू भर पानी मे डूब मरना चाहिए ।

इस तरह से कह ‌‌‌‌‌‌कर गाव के लोगो वहा से जाने लगे थे । तब उन लोगो मे से ही एक आदमी आगे आया और उसने साहुकार के बडे बेटे और उसकी पत्नी को अपने घर ले गया । वह आदमी साहुकार का बहुत नीजी था । साथ ही साहुकार उसकी हर किसी कार्य मे मदत करता था ।

इस तरह से फिर साहुकार का बडा बेटा उसी आदमी के साथ रहता और काम करता था । ‌‌‌इस तरह से फिर साहुकार के दोनो छोटे बेटो को गाव के लोग लज्जित करने लगे थे । इस तरह से आपको समझ मे आ गया होगा की इस कहानी से मुहावरे का अर्थ क्या है ।

चुल्लू भर पानी में डूब मरना मुहावरे पर निबंध || chullu bhar pani mein doob marna essay on idioms in Hindi

दोस्तो लज्जित होना आज के समय में कोई नही चाहता है मगर हमारे चाहने के अनुसार कभी होता ही नहीहै । बल्की जो लोग नही चाहते है वह ज्यादा जल्दी होता हैं । ऐसे में बहुत से लोग है जो की हमारी किसी छोटी सी गलती को भी इस तरह से दूसरो के समाने रखते हैजैसे की मानो हमने कोई बड़ी गलती कर दी हो ।

जैसे की आपको पता है की चुल्लू पर पानी थोड़ा सा होता है भला इसमें कभी डूब कर मरा तक नही जा सकता है । मगर जब कोई व्यक्ति किसी को लज्ज्ति करता है तब इसका प्रयोग होता है और यह आपने कहानी में पढा भी है ।

साथ ही उपर जो कुछ पढा है उसके आधार पर आप यह समझ गए है की chullu bhar pani mein doob marna muhavare ka arth – अत्यधिक लज्जित होना होता है । और इस बात का मतलब है की जहां पर बहुत अधिक लज्जित होने की बात होती है वही पर इसका वाक्य में प्रयोग किया जाता है ।

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