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आसन डोलना मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

आसन डोलना मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

आसन डोलना मुहावरे का अर्थ aasan dolna muhavare ka arth – मन का विचलित होना

दोस्तो आज के जमाने मे ऐसे लोगो की कोई कमी नही है जो बाहरी तरफ से दिखावा करते और अंदर से कुछ और होते है । ऐसे लोगो को जब पैसो की पोटली पडी दिख जाती है तो वे लोग दिखावे मे इमानदार होते हुए भी उन पैसो को उठा ‌‌‌ही लेते है।

इस तरह से जब उन लोगो ने पैसे देखे तो उन लोगो का मन विचलित होने लगा और वे सोच मे पड गए की पैसे ले या न ले पर आखिर मे वह व्यक्ति उन पैसो को ले ही लेता है । इसी तरह से किसी‌‌‌ भी कारण से किसी व्यक्ति का मन विचलित हो जाता है तब आसन डोलना कहा जाता है ।

आसन डोलना मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

‌‌‌आसन डोलना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • रावण की तपस्या को देख कर प्रभु शिव का आसन डोल गया और उन्हे रावण की इच्छा पूरी करने के लिए रावण के सामने आना ही पडा ।
  • जब अर्जुन कोरवो को मारने लगा तब बाकी कोरवो का आसन डोल गया ।
  • रात को तरह तरह की आवाज सुन कर राजू का आसन डोलने लगा । ‌‌‌
  • जब राजीव रात को अपने घर नही पहुंचा तो मां का आसन डोलने लगा ।
  • जब भारतीय लोग अंग्रजो के खिलाफ अवाज उठाने लगे तो उनका आसन डोल गया ।
  • तुम्हारी पिडा सुन कर मेरा तो आसन ही डोलने लगा है ।
  • ‌‌‌जब मया से दुध का गिलास निचे गिर गया तो उसका आसान डोल गया।
आसन डोलना मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

‌‌‌‌‌‌आसन डोलना मुहावरे पर कहानी muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है सुरेश नाम का एक आदमी अपने माता पिता के साथ रहा करता था । सुरेश अपने माता पिता की सेवा करता रहता था और उनसे काम नही करता था । उस समय कोई भी पढाई नही करता था । इस कारण से सुरेश ने भी पढाई नही की थी ।

उसके पास करने को कोई और काम भी नही था वह तो अपने खेत मे ही काम किया करता ‌‌‌था । जिसके कारण से ही उसका घर चल जाया करता था । वह अपना काम करने के कारण से जब चाहता तब घर पर आ जाता और फिर भी वह अपने खेत मे फसल से बहुत रूपय कमाया करता था ।

इस तरह का जीवन जिने कारण से सुरेश के पास किसी चिज की कमी नही थी । एक दिन की बात है सुरेश जीस गाव मे रहता था उस गाव मे दो आदमी आए तब ‌‌‌वे दोनो आदमी सिधे सुरेश के घर मे गए और वहां पर बैठ कर सुरेश से बात चित कर कर जब वे जाने लगे तो ‌‌‌उन्होने सुरेश के पिताजी से कहा की हम आपके बेटे की शादी हमारी बेटी के साथ करना चाहते है ।

तब सुरेश के पिता ने कहा की ठिक है कोई बात नही हम पहले आपकी लडकी को देखेगे फिर दोनो की शादी करेगे । तब उन दोनो ने ‌‌‌कहा कोई बात नही ‌‌‌आप जब चाहो हमारे घर पर आ जाना ।

इतना कह कर वे दोनो तो चले गए थे और अगले ही दिन सुरेश के माता पिता उन दोनो के घर मे चले गए । वहा जाकर उस लडकी को देखा और आस पास पूछ कर उन दोनो की शादी कर दी थी ।

सुरेश की शादी हो जाने के कारण से वह अपना जीवन अपनी पत्नी के साथ बिताने लगा था । ‌‌‌इस तरह से दो महिने ही हुए थे की एक दिन सुरेश के पास निमंत्रण आया की उसे अपने ससुराल मे किसी की शादी मे जाना है ।

उस दिन वह पहली बार ही अपने ससुराल जा रहा था  । तब उसकी पत्नी ने कहा की ‌‌‌आप जल्दी ही चले जाना क्योकी वहां जाते समय रास्ते मे एक गाव आता है और उस गाव के बारे मे कहा जाता है की वहा ‌‌‌पर डायन चुडेल रहती है ।

तब सुरेश को लगा की यह मेरे साथ मजाक कर रही है । इस कारण से वह उसकी बात को नकारने लगा और कहने लगा की भला कभी डायन चुडेल होती है । इस तरह से कहकर वह अपना काम करने के लिए चला गया था ।

जिस दिन उसे अपने ससुराल जाना था उस दिन भी सुरेश काम करने के लिए चला गया था और उसे फिर याद ‌‌‌आया की उसे अपने ससुराल जाना है इस कारण से वह सिधा ही काम से अपने ससुराल चला गया था ।

पर अब बहुत समय बित गया था इस कारण से रात होने को थी और जब रात हुई तो वह उसी गाव मे पहुंचा । अब अंधेरा इतना तेज हो गया था की उसे कोई भी गाव मे दिखाई नही दे रहा था । इस कारण से उसे अपनी पत्नी की बाते याद आ ‌‌‌गई । तभी उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई दी ।

आवाज सुनते ही उसका डर के मारे आसन डोलने लगा । फिर वह डरता हुआ आगे बढता गया और फिर उसे किसी के रोने और हंसने की आवाज सुनाई दी तो वह इतना अधिक डर गया था की वह भाग कर किसी के घर मे छुप गया ।

जब उस घर के लोगो ने देखा की उनके घर मे कोई आया है तब ‌‌‌उन लोगो ने सुरेश से उसके बारे मे पुछा तो उसने अपने बारे मे बताया और कहा की मैंने बाहर किसी के रोने और हंसने की आवाज सुनी थी । जिसके कारण से मेरा मन विचलित हो गया और मे डर मे मारे आपके घर मे आ गया ।

 तब उन लोगो ने सुरेश को कहा की इस गाव मे चुडेल रहती है । साथ ही सुरेश को कहा की तुम आज रात यही पर ‌‌‌रहना और सुबह जहां जा रहे थे वहां चले जाना । उन लोगो के ऐसा कहने के कारण से सुरेश वहां पर रह गया और जब सुबह हुई तो वह अपने ससुराल चला गया था ।

तब उसके ससुराल वाले उससे कहने लगे की हम आपकी कब से प्रतिक्षा कर रहे थे । और जब आप रात को नही आये तो हम सोच रहे थे की ‌‌‌आप उस गाव मे कही पर फस गए हो इस कारण से हमारा आसन डोलने लगा ।

‌‌‌तब सुरेश ने अपने पर बिती बात उन लोगो से कही और फिर कहा की आज के बाद मे मैं तो कभी उस गाव मे से रात को नही आउगा ।

इस तरह से कहते हुए फिर सुरेश उस शादी मे काम करने लगा और अपना योगदान देने लगा । और फिर कभी भी सुरेश उस गाव मे से रात को कही पर भी नही जाता था। इस तरह से आप लोगो को यह पता चल गया होगा ‌‌‌की आसन डोलना मुहावरे का अर्थ क्या है ।

आसन डोलना मुहावरे पर निबंध || aasan dolna essay on idioms in Hindi

भारत में मंत्री लोगो का यह हाल होता रहता है की उनका आसान न डोल जाए । मतलब वह जिस कुर्सी पर अभी बैठे है वह ​छीन न ली जाए । मगर इस मुहावरे का अर्थ न तो कुर्सी छिनने से है और न ही किसी तरह से मंत्री से है ।

दरसल मुहावरा तो असल में मन के विचलित होने के बारे में बता रहा है जो की केवल मंत्री का ही नही बल्की हम सभी का मतन विचलित हो जाता है । जैसे की आपको पता है की हमारा मन ऐसा है जो की भी भी स्थिर नही रहता है बल्की मन हमेशा से अस्थिर रहता है ओर इसे ही मन का विचलित होना कहा जाता है ।

अब अगर किसी का मन विचलित होता है तो इसका मतलब है की उसका आसन डोलता है । क्योकी मानव के शरीर का आसान उसके मन को ही माना जाता है और इससे आप मुहावरे को समझ ले ।

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