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भूखे भजन न होय गोपाला का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व ‌‌‌कहानी

भूखे भजन होय गोपाला मुहावरे का अर्थ bhukhe bhajan na hoye gopala muhavare ka arth – जब पेट भूखा हो तो कोई कर्म नही किया जाता

भूखे भजन न होय गोपाला का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व ‌‌‌कहानी

दोस्तो आज मनुष्य अपने जीवन मे जो भी कार्य कर रहा है उसका मकसद इतना ही है की वह अपना पेट भर ले । तभी आज लोग नोकरी, बिजनेश और मजदुरी जैसे कार्य कर कर  ‌‌‌पैसे कमाते है और अपना पेट भरते है । मगर जब पेट ही नही भर पाता यानि पेट खाली होने पर शरीर मे ऊर्जा नही बनती और मनुष्य कमजोर होने लगता है । जिसके कारण से कोई कर्म भी नही हो पता है । इसी कारण से जब कभी किसी व्यक्ति का पेट खाली होता है तब वह कोई कर्म नही करता तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

भूखे भजन होय गोपाला मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग bhukhe bhajan na hoy gopala muhavare ka vakya me prayog

  • तुम्हे भूख लगी है तो खाना खालो वरना काम सही तरह से नही होगा क्योकी मुझे पता है भूखे भजन न होय गोपाला ।
  • ‌‌‌सेठ बडा लालची है सारे दिन काम कराता रहता है, भूखे को खाने के लिए भी समय नही देता, उसे ‌‌‌क्या पता नही भूखे भजन न होए गोपाला ।
  • मैं तो भाई साफ साफ कह रहा हूं मुझे भूख लगी है मै खाना खाने के लिए जा रहा हूं क्योकी भूखे भजन न होय गोपाला ।
  • ‌‌‌अरे भाई मैं कब से देख रहा हूं तुम काम किए जा रहे हो पहले पेट तो भर लो क्योकी भूखे भजन न होए गोपाला ।
  • रामू जब भी किसी मजदुर से काम कराता है तो पहले उसे खाना खिलाता है फिर कहता है की काम करो क्योकी उसे पता है भूखे भजन न होए गोपाला ।
  • इस छोटे से बच्चे ने अभी तक कुछ नही ‌‌‌खाया है भला यह खेलेगा कैसे इसे कुछ खाने के लिए तो दो क्योकी भूखे भजन न होए गोपाला ।
  • एक तो यह गर्मी उपर से पेट खाली होने से आज बहुत कमजोरी आ गई है जरा कुछ खाने को दो क्योकी भूखे भजन न होए गोपाला ।
भूखे भजन न होय गोपाला का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व ‌‌‌कहानी

भूखे भजन न होए गोपाला मुहावरे पर कहानी bhukhe bhajan na hoye gopala muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक राजा रहा करता ‌‌‌था । ‌‌‌राजा बहुत ही बलशाली था । जिसके कारण से आस पास के राज्यो मे भी उसकी दहाड गुजती थी । यानि हर कोई राजा के बारे मे जानते थे । राजा वैसे तो बहुत ही सरल स्वभाव का था परन्तु अपने किसी कार्य के लिए सामने वाले को दिन रात काम करवाता था ।

यानि उस व्यक्ति के बारे मे यह जरा भी नही सोचता की यह थक गया है या इसका पेट खाली हो गया है । इस कारण से इसे खाना खाना पडेगा । इसी तरह से एक बार की बात है ‌‌‌उस राज्य मे एक व्यक्ति हुआ करता था । जो तरह तरह के हथियारों को बनाने मे माहिर था ।

उसका नाम लुहारसिंह नाम था । उसके हर हथियार इतने मजबुत हुआ करते थे की सामने जो भी कोई होता उसे एक ही वार मे जमीन पर गिरा दिया जाता । इस तरह के हथियारों को बनाने के कारण से राजा ने लुहारसिंह को अपने महल मे ‌‌‌आने के लिए अपने सेनिको से सुचना भीजवाई ।

अब लुहारसिंह इतने अच्छे हथियार बनाता था जिसके कारण से राजा ने उसे किसी और जगह काम न करने दिया और अपने ही किसी काम को करने के लिए दिया । यानि लुहारसिंह राजा के पास ही काम किया करता था ।

इस कारण से जैसे ही उसे पता चला की राजा ने उसे बुलवाया है तो वह जल्दी से महल के लिए रवाना हो गया । महल मे जाकर लुहारसिंह ने राजा से कहा की महाराज कैसे याद किया । तब राजा ने कहा की लुहारसिंह हम आपके कार्य से बहुत ही खुश है इस कारण से हमे एक बहुत ही सुन्दर और मजबूत तलवार की जरूरत है ।

साथ ही इसी ‌‌‌तरह के 10-15 छोटे हथियार भी हम तुम्हे बनाने के लिए कह रहे है । यह कह कर राजा ने लुहारसिंह को कहा की अभी से काम मे लग जाओ और जब तक काम पूरा नही हो जाता तक तक उसी मे लगे रहना ।

इतना कह कर राजा ने लुहारसिंह को जाने के लिए कह दिया था । अब लुहारसिंह महल के ओजार बनाने की जगह मे चला गया और ‌‌‌वहां जाकर काम करने लग गया । इस तरह से लुहारसिंह ने एक छण्टे तक काम किया परन्तु बाद मे उसे भूख लग गई थी । और लुहारसिंह से भूख कभी भी बदार्श नही होती थी ।

परन्तु राजा ने कहा था की पहले काम पूरा कना फिर और कोई काम करना । इस कारण से वह दुखी होकर उसी कार्य मे लगा रहा । इस तरह से उसने दो खंजर ‌‌‌बडे ही अच्छे बनाए परन्तु बादमे जो भी हथियार बनाए थे वे सब खराब बन गए ।

यानि सभी कमजोर बन गए थे । साथ ही इस कार्य मे लुहारसिंह को पुरा दिन लग गया । अब लुहारसिंह की हालत बहुत ही खराब हो रही थी । क्योकी उसने सुबह से कुछ नही खाया था । फिर भी वह उन हथियारों को लेकर राजा के पास चला गया । ‌‌‌

तब राजा उन हथियारों को देख कर उनका परिक्षण लेने ‌‌‌लगा । तभी राजा सेनिक के साथ युद्ध कला तलवार से कर रहे थे परन्तु तलवार मजबुत नही थी जिसके कारण से तलवार बिच मे ही टुट गई । इस कारण से सेनिक ने राजा को हरा दिया । और राजा को यह देख कर लुहारसिंह पर क्रोध आया की उसने इतनी कमजोर तलवार बनाई है‌‌‌।

जब राजा ने लुहारसिंह को इस तरह की कमजोर तलवार बनाने का कारण पूछा तो उसने कहा की महाराज मैने सुबह से कुछ नही खाया है । इस कारण से मुझे बहुत ‌‌‌भूख लगी है और आपको पता है की ‌‌‌भूखे भजन न होए गोपाला। इसी कारण से यह कार्य सही नही हुआ ।

राजा ने लुहारसिंह की बात सुन कर कहा की मुझे नही पता तुम्हे सुबह ‌‌‌होने से पहले ही मेरा काम सही तरह से करना होगा । और इस बार अच्छी तरह से नही हुआ तो तुम्हे मै सजा दुगा । इस तरह से सुन कर लुहारसिंह डर गया और वह काम करने के लिए चुप चाप चला गया ।

तभी राजा के मंत्री ने राजा को समझाया और कहा की महाराज पहले इसे खाना खिला दीजिए । क्योकी जब आप युद्ध करने के लिए ‌‌‌जाते हो और आपको भुख लग जाती है तो आपमे कमजोरी आ जाती है । ठिक उसी तरह से अगर यह खाना नही खाता तो यह जो भी कार्य करता है वह गलत ही होता है ।

और यह तो सुबह से खाली पेट है तब इसकी हालत तो भूखे भजन न होए गोपाला जैसी है ।‌‌‌ मंत्री के कहने के कारण से राजा ने खाना खिलाने के लिए कह दिया । तब मंत्री ने लुहारसिंह को खाना दिया तो लुहारसिंह खाने पर टूट पडा और खाना इस तरह से खाने लगा जैसे कई दिनो से भूखा हो । यह देख कर मंत्री को समझ मे आ गया की यह खाली पेट कुछ नही कर सकता ।

खाना खाने के बाद मे मंत्री ने उसे अपने काम ‌‌‌मे लगने को कह दिया था । इस कारण से लुहारसिंह अपना काम करने लगा और सुबह होने से पहले ही हथियार बना दिए और जब तक राजा हथियारों का परिक्षण करने के लिए आया तब तक तो उन हथियारों का दो तिन बार परिक्षण मंत्री ने कर लिया था ।

जब राजा ने परिक्षण किया तो उन्हे पता चला की हथियार बहुत ही‌‌‌ मजबुत है और सामने वाला एक ही वार मे मर जाता है । यह देख कर राजा बहुत ही प्रसन हुआ और लुहार सिंह को अपने पास बुलाकर पूछा की पहली बार इतने अच्छे हथियार क्यो नही बनाए ।

तब लुहारसिंह ने कहा की महाराज भूखे भजन न होए गोपाला । यह कहने पर राजा समझ गया की इसे उस समय काफी अधिक भूख लगी थी । जिससे ‌‌‌शरीर मे कमजोरी आ गई और यह हथियारों को सही तरह से न बना सका । इस तरह से फिर राजा ने हथियारों को इतना अच्छा बनाने के लिए लुहारसिंह को इनाम दिया और वहा से जाने दिया ।

इस तरह से फिर कभी भी राजा किसी व्यकित को खाली पेट काम नही करवाता था । बल्की पहले उसे खाना खिलाने लगा और फिर अपना कार्य‌‌‌ करवाता था । इस तरह से आपको समझ मे आ गया होगा की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ।

भूखे भजन न होय गोपाला मुहावरे पर निबंध || bhukhe bhajan na hoye gopala essay on idioms in Hindi

दोस्तो एक प्रशन में आपसे पूछता हूं की हम सभी जो काम पर जाते है जैसे की आपके पिताजी या फिर आप स्वयं भी तो हम काम करने के लिए क्यों जाते है । इसका सरल उत्तर यही होगा की धन कमाने के लिए जाते है ।

मगर वही पर अगर पूछे की धन क्यों चाहिए होता है तो इसका उत्तर होगा की पेट भरने के लिए और जीवन की जरूरत पूरी करने के लिए । मगर सबसे महत्वपूर्ण पेट भरना होता है ।

तो अगर आप अपना पेट भी नही भर पाते है मगर आपको बहुत सारे रूपय दिए जाते है और किसी खास काम को करवाया जाता है तो आपका कहना होगा की पेट खाली होने पर किसी प्रकार का काम नही किया जाएगा ।

कहने का मतलब है की किसी भी काम को पूरी तरह से करने से पहले अपना पेट भरा होना जरूरी है ओर इसी बात से समझ सकते है की bhukhe bhajan na hoye gopala muhavare ka arth – जब पेट भूखा हो तो कोई कर्म नही किया जाता होता है ।

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