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नीम हकीम खतरे जान मुहावरे का मतलब और वाक्य में प्रयोग

नीम हकीम खतरे जान मुहावरे का मतलब

नीम हकीम खतरे जान मुहावरे का अर्थ nim hakim khatre jaan muhavare ka arthअल्प ज्ञान का हानिकारक होना

नीम हकीम खतरे जान मुहावरे का मतलब

दोस्तो हकीम उस व्यक्ति को कहा जाता है जो ‌‌‌पुराने समय मे ‌‌‌गावो मे डॉक्टर या बेद के तोर पर काम ‌‌‌किया करता था । इस तरह के हकीम को पूरा डॉक्टर नही कह सकते थे क्योकी उसे डॉक्टरी का अधुरा ज्ञान ही था । इस तरह के हकीम जिसके डॉक्टरी का पूरा ज्ञान न होने पर उससे जो भी कोई इलाज करवाता है उसके इलाज मे मुसीबत आ सकती है ।

यानि वह इलाज हानिकारक बन सकता है । इस कारण से कहा जाता है की इलाज हमेशा ही अच्छे डॉक्टर से करवाना चाहिए । ‌‌‌इस तरह से जब कभी किसी भी कारण से अल्प ज्ञान‌‌‌ हानिकारक बन जाता है तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

नीम हकीम खतरे ए जान मुहावरे का वाक्य में प्रयोग nim hakim khatre jaan muhavare ka vakya me prayog

हकीम ने इलाज तो किया परन्तु ज्ञान अल्प होने के कारण से रामू को इलाज से कैंसर बन गया सच है नीम हकीम खतरे जान ।

जब शिवप्रकाश डॉक्टर के पास जाकर कहने लगा की मैं गाव के ‌‌‌एक हकीम से दवा लेता हूं तो डॉक्टर ने कहा नीम हकीम खतरे जान ।

तुम महावीर डॉक्टर के पास मुझे क्यो लेकर जा रहे हो उसे कुछ नही आता है वह फर्जी डिग्री लिए बैठा है अगर उसके पास चलेगे तो नीम हकीम खतरे ए जान वाली बात होगी ।

रामवतार को पढाई लिखाई आती नही है और आपने उसे ही पैसे संभालने को दे दिए है यह ‌‌‌तो वही होगा नीम हकीम खतरे जान ।

नीम हकीम खतरे ए जान मुहावरे का वाक्य में प्रयोग nim hakim khatre jaan muhavare ka vakya me prayog

मैंने तो पहले ही कहा था की किसी अच्छे आदमी को ही काम देना परन्तु आपने मेरी एक नही सुनी और वही हुआ नीम हकीम खतरे ए जान ।

जहागीर शिक्षक बन गया परन्तु आता कुछ है नही अगर उसके पास कोई पढाई करने के लिए जाऐगा तो वही होगा नीम हकीम खतरे ऐ जाना ।

नीम हकीम ‌‌‌खतरे ऐ जान मुहावरे पर कहानी nim hakim khatre jaan muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है लुणकराय नाम का एक गाव हुआ करता था । उस गाव मे सभी लोग बहुत ही अच्छे और पैसे वाले हुआ करते थे। जिससे गाव के लोगो को खाने पिने के लिए कष्टो का सामना नही करना पडता था । परन्तु पैसो के अलावा भी मनुष्य अपने जीवन मे रोगो से दूर रहे यह बहुत बडी ‌‌‌बात होती है ।

क्योकी जब कोई बिमारी के चपेट मे आ जाता है तो चाहे फिर कितने भी पैसे लगा दिए जाए कभी कभार ऐसे व्यक्ति ठिक नही हो पाते है । इसी तरह से एक बार उस गाव मे एक आदमी के साथ हुआ था । उस आदमी का नाम लादुराम था ।

लादुराम नाम के अनुसार राम जैसा था यानि वह सच्चा और पैसो पर बिल्कुल ‌‌‌गुमान न करने वाला था । लादुराम के घर मे उसकी पत्नी और एक बेटा रहा करता था । जो काफी अधिक बडा हो गया था ।

लादूराम के पास पैसो की कोई कमी नही हुआ करती थी परन्तु शहर उनके गाव से काफी अधिक दूरी पर होने के कारण से गाव के सभी लोग जब भी बिमार होते तो अपने गाव के हकीम से ही इलाज करवा लेते थे । इलाज ‌‌‌के बदले ‌‌‌में उस हकिन को काफी अधिक पैसे दे देते थे ।

इस तरह से पैसे मिलने के कारण से आखिर कोन इलाज नही करेगा । ‌‌‌जिससे हकीम भी गाव के लोगो का इलाज कर देता था । इसी तरह से एक बार क्या हुआ की लादूराम के घर मे उसकी पत्नी बिमार हो गई ।

लादूराम की पत्नी के शरीर पर छोटे छोटे लाल दाने दिखने लगे ‌‌‌इस कारण से लादूराम ने अपनी पत्नी के इलाज के लिए उसी हकीम को बुला लिया । हकीम के आ जाने के कारण से हकीम ने कहा की यह कोई बडी बात नही है यह एक छोटी सी समस्या है जो मेरी दुवाईया लेने पर ठिक हो जाएगी ।

इतना कह कर हकीम ने दवाईया लादूराम को दे दी और वहां से पैसे लेकर चला गया । इस तरह से दस ‌‌‌दिनो तक दवाईया लेने पर लादुराम की पत्नी ओर अधिक ‌‌‌बिमार होने लगी थी । तब लादूराम ने फिर से उसी हकीम को अपने घर बुलाया और इस बारे मे बताया ।

तब उस हकीम ने कहा की मैं एक ऐसी जडी बुंटी के बारे मे जानता हू की अगर उसका एक महिने तक सेवन किया गया तो आपकी पत्नी पूरी तरह से ठिक हो जाएगी । इतना सुनकर ‌‌‌लादूराम ने कहा की तो जल्दी से वह दवाई लेकर आ जाओ ।

तब हकीम ने कहा की वह शहर से ‌‌‌मगवानी पडेगी और ‌‌‌उसके काफी अधिक पैसे लगेगे । इस तरह से फिर लादूराम ने हकीम को पैसे दे दिए । जिससे हकीम ने दस दिनो के बाद वह दवाई मगवाई । और फिर उसका सेवन करने के लिए लादूराम की पत्नी को दे दिया ।

अब लादूराम ‌‌‌की पत्नी इस दवाई को लेने लगी थी । इस तरह से एक महिना और बित गया परन्तु समस्या और अधिक बढती ही जा रही थी । आखिर मे थक हार कर लादूराम अपनी पत्नी को शहर ले गया और एक अच्छे से चमडी के डॉक्टर को दिखाया ।

तब डॉक्टर ने कहा की आपको तो यह समस्या बहुत ही भयानकर हो गई है । अगर इसका समय पर ‌‌‌इलाज हो जाता तो आज ‌‌‌इतनी अधिक समस्या नही होती । तब लादूराम ने कहा की पहले गाव के हकीम को दिखाया था ।

डॉक्टर यह सुन कर चिड गया और कहने लगा की हकीम को हमसे ज्यादा थोडे पता है । उसे अधुरा ज्ञान है और जो भी उसके पास जाता है उसे खतरा भी हो सकता है और आपकी पत्नी के साथ भी यही हुआ है । ‌‌‌

क्योकी हकीम की जडी बुटिंयो के कारण से आपकी पत्नी को बहुत बडा कैंसर हो गया है इस कारण से आगे ध्यान रखना की नीम हकीम खतरे जान । तब लादूराम ने कहा की डॉक्टर फिर इस समस्या का इलाज हो जाएगा क्या ।

डॉक्टर ने कहा की समस्या बहुत बढ गई है जिसके कारण से कई वर्ष लग सकते है साथ ही पैसे भी बहुत ‌‌‌लगेगे । तब लादूराम ने बिना सोचे समझे ही अपनी पत्नी का इलाज करने के लिए डॉक्टर से कह दिया था । जिसके कारण से डॉक्टर लादूराम की पत्नी के इलाज ‌‌‌में लग गया ।

इस तरह से लादूराम की पत्नी का इलाज होने में पूरे दस वर्ष लग गए । परन्तु लादूरामी की पत्नी का पूरी तरह से इलाज हो गया था । जिससे वह अब पूरी ठिक हो गई । इसके बाद मे लादूराम को पता चल गया की हकीम से इलाज खतरा बन सकता है क्योकी उसे अल्प ज्ञान होता है ।

जिसके कारण से वह फिर शहर ‌‌‌जाकर ही अपनी हर समस्या ‌‌‌का इलाज करवाता था । साथ ही उसके जो नजदीकी लोग थे उनसे भी वह अपनी इस कथा को सुनाकर कहता की नीम हकीम खतरे ऐ जान

इस तरह से फिर धिरे धिरे गाव के लोग शहर की तरफर बढने लगे थे और अपना इलाज करवाने लगे थे । जिससे हकीम का काम ठप पडने लगा । इस तरह से आपको पता चल गया होगा की इस ‌‌‌कहानी से मुहावरे का अर्थ क्या निकलता है ।

नीम हकीम खतरे ऐ जाना मुहावरे पर निबंध nim hakim khatre jaan muhavare par nibandh

साथियो यह सभी को पता है की जिसके पास पूरा ज्ञान न हो वह खतरा बन सकता है । यानि पूरा ज्ञान न होने पर उस पर ‌‌‌चलना खतरे से कम नही है । ‌‌‌इसी तरह से हकीम से इलाज करवाना भी खतरा बन सकता है ।

क्योकी उपर कहानी मे पढा की किस तरह से ‌‌‌हकीम जैसे अल्प ज्ञान वाले से इलाज करवाने पर कैंसर जैसी भयानक बिमारी बन गई । और लादूराम की पत्नी को ठिक होने में पूरे 10 वर्ष लग गए । इसी तहर से मानव अपने जीवन मे बहुत ऐसे कार्य करता है जो अल्प ज्ञान के कारण शुरू होते है और कभी कभार ऐसे कार्य मुसीबत या समस्या ला देते है।

इस कारण से जब भी कही अल्प ज्ञान का हानिकारक ‌‌‌होने की आसा लगे वही इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है । चाहे फिर वह कैसा भी कार्य क्यो न हो । इस तरह से इस मुहावरे के बारे मे आप अच्छी तरह से जान गए होगे ।

नीम हकीम खतरे जान मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of nim hakim khatre jaan in Hindi

दोस्तो यहां पर हकीम की बात की जा रही है जिसे गाव में रहने वाला बिना डिग्री का डॉक्टर कहा जा सकता है । और इस तरह के डॉक्टर के बारे में कहा जाता हे की यह हानिकारक होता हे । क्योकी इसके पास ज्ञान तो है मगर वह अल्प ज्ञान है जिसके कारण से अगर गलत दवा दी गई तो थ्फर नुकसानदायक हो सकता है ।

और इस बात को आप भी काफी अच्छी तरह से समझ सकते है । क्योकी जहा पर डॉक्टर आज के समय में 5 से 6 वर्षों तक अध्ययन करते है और ज्ञान हासिल करते है वही पर हकिम कम ज्ञानी होता हे और उसका कम ज्ञान ही हानिकारक बन जाता है ओर इसी बात से आप यह समझ ले की  nim hakim khatre jaan muhavare ka arth – अल्प ज्ञान का हानिकारक होना होता है ।

अब अगर कही पर अल्प ज्ञान का हानिकारक होने की बात होती है तो आप वहां पर इस मुहावरे का प्रयोग कर सकते है ।

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