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जो गरजते हैं वो बरसते नहीं का मतलब और वाक्य में प्रयोग व निबंध

जो गरजते हैं वो बरसते नहीं का मतलब और वाक्य में प्रयोग व निबंध

जो गरजते हैं वो बरसते नहीं मुहावरे का अर्थ jo garajte hai ve baraste nahi muhavare ka arth  – जो व्यक्ति बढ चढ कर बाते करता है वह असल मे वैसा कार्य नही कर सकता

जो गरजते हैं वो बरसते नहीं मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त जो गरजते हैं वो बरसते नहीं मुहावरे का जो व्यक्ति बढ चढ कर बाते करता है वह असल मे वैसा कार्य नही कर सकता होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
जो गरजते हैं वो बरसते नहींजो व्यक्ति बढ चढ कर बाते करता है वह असल मे वैसा कार्य नही कर सकता
जो गरजते हैं वो बरसते नहीं का मतलब और वाक्य में प्रयोग व निबंध

जो गरजते हैं वो बरसते नहीं मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो ‌‌‌कहा जाता है की जब कोई अपने बारे मे बढ चढ कर बाते करता है तो लगता है की वह इसी तरह का है । परन्तु वह असल मे ऐसा होता नही है । इस कारण से जब भी कही कोई व्यक्ति बढ चढ कर बाते करता है तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है । क्योकी बादल के खुब गरजने पर भी आजकल वर्षा नही होती ।

जो गरजते है वे बरसते नहीं मुहावरे ‌‌‌का वाक्य में प्रयोग jo garajte hai ve barsate nahin muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌तुम्हारे इस तरह से बाते करने से कुछ नही होगा क्योकी मैं जानता हूं जो गरजते है वे बरसते नही ।

कुसल हर समय कलेक्टर बनने की बात करता है परन्तु उसे आता कुछ है नही सच है जो गरजते है वे ‌‌‌ बरसते नही ।

राहुल की बात सुन कर ऐसा लगता है की मानो वह कोई कलेक्टर हो परन्तु वह दसवी फैल है सच ‌‌‌ही है जो गरजते है वे बरसते नही ।

जो गरजते है वे बरसते नहीं मुहावरे ‌‌‌का वाक्य में प्रयोग jo garajte hai ve barsate nahin muhavare ka vakya me prayog

महेशराव रोजाना कहता था की वह ‌‌‌पटवारी मे नम्बर वन पर आएगा और आखिर मे पेपर तक पास नही कर सकता यही है जो गरजते है वे ‌‌‌ बरसते नही  ।

हरीदेव ऐसे तो अपने ज्ञानी होने की बहुत ‌‌‌बढाई करता रहता है ‌‌‌परन्तु मैंने उसे एक काम दिया था वह तक नही कर सका तब मुझे पता चल गया की जो गरजते है ‌‌‌वे ‌‌‌ बरसते नही ।

जो गरजते है वे बरसते नहीं मुहावरे ‌‌‌का वाक्य में प्रयोग jo garajte hai ve barsate nahin muhavare ka vakya me prayog

जो गरजते है वे ‌‌‌ बरसते नही मुहावरे पर कहानी jo garajte hai ve baraste nahi muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे परमवीर नाम का एक आदमी रहा करता था । परमवीर के घर मे उसके माता पिता के अलावा और कोई नही था । परमवीर ‌‌‌के पिता के पास धन दोलत की कोई कमी नही थी । जिसके कारण से परमवीर के पिता ने उसे बहुत उच्ची पढाई करवाई थी।

साथ ही तरह तरह के बिजनेस करने की तकनिक भी ‌‌‌सिखने के लिए उसे विधालय भेजा था । परन्तु परमवीर इस तरह के कार्यो मे बिल्कुल ध्यान नही देता था और समय का दुर उपयोग करता रहता था । ‌‌‌इस तरह से जब परमवीर बडा हो गया तो वह कुस्ती खिने लगा था ।

परन्तु समय के साथ वह कुस्ती दस दिन ही सिखने के लिए गया और फिर अपने घर मे रहने लगा था । जब गाव के लोग पूछते की तुम तो कुस्ती सिखने के लिए जा रहे थे क्या हुआ । तब परमवीर अपनी बढाई करते हुए कहता की मै बहुत ही अच्छी कुस्ती ‌‌‌लडता हूं । मुझे कोई भी नही हरा सकता है ।

जब यह सुन कर लोग कहते की तुम तो झुठ बोल रहे हो तो वह कहता की गाव मे अगर कोई मेरे साथ कुस्ती लडना चाहता है तो वह लड सकता है । इस तरह से कहने पर कोई भी आगे नही आता था । क्योकी सभी यही सोचते थे की क्या पता इसे कुस्ती आती हो और मेरे इसके साथ लडने के कारण ‌‌‌से यह मुझे हरा देगा ।

जिससे परमवीर हर समय अपनी बढाई करता और कुस्ती लडने के लिए गाव के लोगो को चेलेंज करता रहता था । मगर एक बार गाव का एक लडका शहर से अपने गाव मे आया था । जिसे देखने पर बहुत ही दुपला पतला दिख रहा था । उसके आते ही परमवीर उसके साथ छेडछाड करने लगा था ।

यह सब देख कर वह लडका चुप ‌‌‌चाप अपने घर चला गया । अगले दिन फिर परमवीर उस लडके के साथ छेडछाड करने लगा था । यह देख कर फिर वह लडका चुप चाप रह गया । अब इस बात को कुछ ही समय बिता था की उस लडकें ने देखा की परमवीर गाव के लोगो के सामने अपनी बढ चढ कर बाते कर रहा था साथ ही अपने पहलवान होने का भी दावा कर रहा था ।

यह देख कर वह लडका ‌‌‌बोल पडा की इसे और पहलवानी आती है यह तो कोरी बाते करना जानता है । यह सुन कर कुछ लोगो ने परमवीर को बताया । तब परमवीर ने उस लडके के साथ झगडा किया और उसके साथ कुस्ती करने को तैयार हो गया था ।

क्योकी परमवीर को वह लडका बहुत ही दुबला पतला दिख रहा था जिससे उसे लगा की मैं इसे तो पल भर मे हरा दुगा । ‌‌‌परन्तु जब परमवीर उस लडके को कुस्ती के लिए बार बार परेशान करने लगा तो अंत मे उस लडके ने परमवीर के साथ कुस्ती लडी और उसे हरा कर यह गाव के सभी लोगो को बता दिया की जो गरजते है वे बरसते नही

इस दिन के बाद मे जब भी परमवीर अपने पहलवान होने की बात करता और अपने बारे मे बढ चढ कर बात करता तो लोग ‌‌‌भी कह देते की जो गरजते है वो बरसते नही । जिसके कारण से फिर परमवीर लोगो के सामने बढ चढ कर बात नही करता था । इस तरह से आपको समझ मे आ गया होगा की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ।

जो गरजते है वे बरसते नही मुहावरे पर निबंध jo garajte hai ve baraste nahi muhavare par nibandh

साथियो प्राचिन समय ‌‌‌से सुनने को मिल रहा है की जब भी वर्षा या बरसात का मोसम होता ‌‌‌है तब बादल बहुत अधिक छा जाते है और वर्षा करने लगते है। कभी कभी तो ऐसा होता है की मानो कुछ ही समय मे बादल बन कर वर्षा करने लगते है ।

मगर जब घने बादल छाने पर और जोर जोर से गरजने पर भी वर्षा नही होती तो इसे गरजने वाले ‌‌‌ बरसते नही कहा जाने लगा । इस तरह से इस मुहावरे की उत्पत्ति हो गई । परन्तु मानव ‌‌‌जीवन मे भी कुछ ऐसे लोग देखे जाने लगे जो बादल के गरजने की तरह बढ चढ कर बाते तो करते थे परन्तु परिणाम बिल्कुल नही दिखाते थे ।

 जिसके कारण से इस तरह के लोगो के लिए इस मुहावरे का प्रयोग किया जाने लगा । क्योकी वे भी गरजने वाले बादल के समान ही हो गए । इस तरह के लोगो का समय के साथ विकाश हुआ और ‌‌‌आज के समय मे ऐसे लोग बहुत अधिक देखे जाने लगे है ।

जिससे इन लोगो के द्वारा जब भी बढ चढ कर बाते की जाती है और वे अपनी बात के अनुसार परिणाम नही देते है तब इसे गरजने वाले बरसते नही है कहा जाने लगा है । इस तरह से इस मुहावरे का अर्थ आप ‌‌‌अच्छी तरह से समझ गए होगे । साथ ही ‌‌‌आपको इस मुहावरे पर एक बहुत ही ‌‌‌कहानी भी देखने को मिल गई ।

जो गरजते हैं वो बरसते नहीं मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of jo garajte hai ve baraste nahi in Hindi

दोस्तो हमेशा से हमारी इस धरती पर कई महान लोगो ने जन्म लिया है और जन्म लेते रहेगे । इस धरती पर जन्म लेने वाले लोगो में से बहुत से ज्ञानी और महान लोग है जिनके द्वारा अपने जीवन में एक ही बात कही जाती है की हमेशा अपनी वाणी का कुछ मोल बना कर रखना चाहिए ।

मतलब हमे कभी भी ऐसे ही नही बोलना चाहिए और​ किसी को बेवजह शिक्षा नही देनी चाहिए मतलब ज्ञान नही देना चाहिए । जैसे की डॉक्टर है तो कभी भी वह बिना फिस के ज्ञान नही देता है यानि मरीजो को नही देखता है ।

तो इन बात से मतलब है की जो व्यक्ति अपने अंदर किसी तरह के गुण को रखता है तो वह अपने इस गुण को बेवजह दूसरो के सामने फ्रि में नही बाटना चा​हेगा ।

अगर कोई ऐसा व्यक्ति है जो की फ्रि में बहुत कुछ बताता है तो इसका मतलब है की उसके अंदर गुण नही है और गुण न होने का मतलब है की वह जैसा कह रहा है वह वैसा कर ही नही सकता है और इसी से समझ जाए की jo garajte hai ve baraste nahi muhavare ka arth  – जो व्यक्ति बढ चढ कर बाते करता है वह असल मे वैसा कार्य नही कर सकता होता है ।

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