चोर चोर मौसेरे भाई मुहावरे का अर्थ chor chor mausere bhai muhavare ka arth – समान स्वभाव वाले लोगो मे जल्दी जोस्ती हो जाती है ।
चोर चोर मौसेरे भाई मुहावरे का अर्थ क्या होता है?
दोस्त चोर चोर मौसेरे भाई मुहावरे का समान स्वभाव वाले लोगो मे जल्दी जोस्ती हो जाती है होता है । यानि दोस्त,
| मुहावरा | अर्थ |
| चोर चोर मौसेरे भाई | समान स्वभाव वाले लोगो मे जल्दी जोस्ती हो जाती है । |

चोर चोर मौसेरे भाई मुहावरे को कैसे समझे
दोस्तो कहते है की जिन लोगो में कुछ रिश्ता होता है वे ही एक जैसा सोचते है और एक जैसा काम करते है । जिसके कारण से कह सकते है की दो चोर एक जैसे हो गए और दोनो का चोरी करने का तरीका भी एक जैसा हो गया ।
जिससे उन दोनो मे रिश्ता निकाला जा सकता है । मगर वे दोनो एक दुसरे से काफी दूर होते है । जिससे उन्हे भाई नही कह कसते मगर मोसी बहुत दुर रहती है जिसके कारण से वे कभी कभार ही मिल सकते है । जिसके बाद भी मोसी के बेटो का स्वभाव मिल जाता है ।
इसी तरह से उन चोरा का स्वभाव मिल जाता है तो उन्हे चोर चोर मौसेरे भाई कहा जाने लगा । क्योकी ऐसे लोग जल्दी ही एक दुसरे से दोस्ती भी कर लेते है । जिसके कारण से जब भी कभी एक जैसे स्वभाव वाले लोग जल्दी मित्रता कर लेते है तब इस मुहावरे का प्रयोग होने लगा ।
चोर चोर मौसेरे भाई मुहावरे का वाक्य में प्रयोग chor chor mausere bhai muhavare ka vakya me prayog
जब दो चोर एक ही स्थान पर चोरी कर कर एक साथ निकले तो लोग सोचने लगे की ये तो चोर चोर मौसेरे भाई है ।
विजय दिल्ली का है और संजय राजस्थान का जिसके कारण से दोनो को एक दुसरे से मिलने का कभी मोका नही मिला मगर एक बार मिलने के बाद हमेशा साथ काम करने लगे सच है चोर चोर मौसेरे भाई ।
रवीप्रकाश और रवीकांत दोनो अलग अलग गाव के होने के बाद भी सभी कार्य साथ साथ करते है सच है चोर चोर मौसेरे भाई ।

रामू जो न जानने पर भी महेश ने उसे दोस्त बना लिया और कहा चोर चोर मौसेरे भाई ।
लखवीर और राजवीर जब अचानक दोस्त बन गए तो सभी समझ गए की चोर चोर मौसेरे भाई ।
सेठ तो पहले से ही लोगो को ठगता था और अब महावीर भी उसके साथ मिल गया है यही है चोर चोर मौसेरे भाई ।

चोर चोर मौसेरे भाई मुहावरे पर कहानी chor chor mausere bhai muhavare par kahani
एक समय की बात है एक बहुत ही शहर हुआ करता था । जिसे देखने पर ऐसा लगता की मानो यहां पर हर कोई धनवान है । इसके अलावा उस शहर मे किसी प्रकार का आंतक नही था । सभी लोग अपना अपना कार्य बडी ही आराम से कर करते थे ।
अगर रात को किसी का दरवाजा भी खुला रह जाता तो कोई भी उनके घर नही जाता था । साथ ही वहा पर चोरी का तो नामो निशान तक नही था । यानि वहा चोरी करने वाला कोई भी नही था । जिससे सभी चेन की निंद सोया करते थे ।
मगर कहते है ना कि सुख के बाद दुख आता ही है तो वहां पर भी ऐसा ही हुआ । यानि उस शहर मे चोरी करने के लिए एक चोर आ गया । जो शहर की हर गलियो को अच्छी तरह से जानता था । और चोरी करने के बादमे इस तरह से गायब होता मानो की उसे किसी ने देखा तक नही ।
क्योकी लोग पहले की तरह ही आराम से बिना बेचेन हुए सो जाया करते थे । चाहे बादमे उनके घर की खिडकी और दरवाजा खुला भी क्यो न रह जाये । मगर जब चोर को इस तरह का अवसर प्रदान हुआ तो वह जैसे ही खिडकी खुली देखता तो उसमे से घर मे घुसता और चोरी कर लेता था ।
धिरे धिरे चोरी करने की खबर ज्यादा आने लगी थी । जीसके कारण से हर कोई अपने पैसे चोरी होने से डरने लगे थे । जिसके कारण से हर कोई सावधानी रख कर अपने घर के दवाजे खिडकिया अच्छी तरह से बंद करते थे । मगर कहते है ना चोर के आगे ताला यानि लोक नही लगाया जाता ।
जिससे चोर ताला तोड कर चोरी करने लगा । अब शहर के लोग काफी परेशान हो गए थे । जिससे उन्होने इस बारे मे पुलिस को सुचना दी । तब जाकर पुलिस भी ऐक्शन मे आ गई । जिसके कारण से रात भर पुलिस शहर की गलियो मे चक्कर काटने लगी । मगर चोर माहिर था जिससे वह पुलिस की नजरो से तुरन्त गुल्ल हो जाता था ।
मगर एक दिन चोर पुलिस की नजरो से बच नही सका और पकडा गया । अब वह चोर पुलिस के पास जैल में बद था । जिसके कारण से शहर के लोग वापस पहले की तरह चेन से सोने लगे थे । इस बात को एक ही महिना बिता था की फिर से शहर मे चोरी होने लगी ।
जिसके कारण से फिर से पुलिस के पास इस बारे मे शिकायत पहुंची तो पुलिस ने कहा की चोर यही है । मगर तभी पुलिस को लगा की कोई और चोरी करने लगा है । जिससे पुलिस फिर से उस चोर को पकडने के लिए लग गई ।
अब एक महिने तक उस दुसरे चोर ने खुब चोरी की मगर वह भी पकडा गया । जिससे दोनो चोर अब जेल मे एस साथ बंद थे । जब दोनो चोर मिले तो उन चोरो मे दोस्ती हो गई । मगर तभी पुलिस को पता चला की यह दोनो चोर एक दुसरे की मोसी के बेटे है ।
यह जान कर पुलिस ने उन दोनो से कहा चोर चोर मौसेरे भाई । क्योकी इस बारे मे उन चोरो को भी नही पता था जिसके कारण से वे चोर और अधिक खुश हो गए । धिरे धिरे इस तरह से समय बित रहा था की एक दिन दोनो मोका पाते ही जेल से फरारा हो गए ।
अब दोनो चोर एक साथ चोरी करने लगे थे । जिसके कारण से शहर के लोगो का जीवन संकट मे पड गया था । साथ ही पुलिस भी उन चोरो को नही पकड पा रही थी। जब लोगो को पता चला की दोनो चोर जेल मे मिलने के बाद मे चोरी करने लगे है । तब पुलिस ने लोगो को बताया जैल मे जाते ही उन दोनो मे दोस्ती हो गई और वे चोर चोर मौसेरे भाई निकले ।
पुलिस की यह बात सुन कर लोग चोक गए और कहने लगे की इस तरह से दोनो चोरो मे बन गया । इस तरह से एक दिन वे दोनो चोर पकडे गए और इस बार उन्हे अच्छी जेल मे रखा गया और उन्हे लम्बे समय तक सजा हो गई । मगर इसके बाद मे जब भी किसी ऐसे लोगो मे मित्रता होने लगी जिनका स्वभाव एक जैसा होता तो उनके लिए चोर चोर मौसेरे भाई ही कहा जाने लगा । इस तरह से इस कहानी का अर्थ आप समझ गए होगे ।
चोर चोर मौसेरे भाई मुहावरे पर निबंध chor chor mausere bhai muhavare par nibandh
दोस्तो सभी को अपना स्वयं का स्वभाव को अच्छा लगता है । जिसके कारण से जब कभी अपने ही जैसा कोई व्यक्ति यानी जिसका आचरण रहन सहन बोल चाल सभी अपने जैसी होती है तो वह स्वयं को बडा ही अच्छा लगता है । जिसके कारण से दोनो एक दुसरे को अच्छा मान कर दोस्ती कर लेते है ।
यह इस तरह से भी समझ सकते है की चोर को चोरी पंसद होती है । जिसके कारण से जब भी दो चोर चोरी करते हुंए मिल जाते है तो उन्हे एक दुसरे का चोरी करना अच्छा लगता है । जिसके कारण से दोनो दोस्ती कर लेते है ।
इस तरह से वे दोनो चोर समान स्वभाव वाले हुए और जिसके कारण से दोनो ने एक दुसरे से जल्दी ही दोस्ती कर ली । इस तरह से जब कभी होता है तो इसे चोर चोर मौसेरे भाई कहा जाता है । इस तरह से इस मुहावरे के बारे मे आपको बहुत कुछ पता चल गया होगा ।
चोर चोर मौसेरे भाई मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of chor chor mausere bhai in Hindi
दोस्तो अगर आप अभी विद्यालय में पढते है तो आपको पता है की आपके कुछ ही ऐसे मित्र है जो की हमेशा आपके दिल के करीब रहते है । बाकी जो कोई आपके सहपाठी है वह असल में नाम के ही दोस्त होते है बल्की कुछ ही सच्चे दोस्त है और आगे भी उनमें से कुछ ही आपके मित्र रहने वाले है ।
और यह वही होगे जो की आपके सामन स्वभाव के है । यानि जिस तरह का स्वभाव आपका स्वयं का है ठिक ऐसा ही स्वभाव अगर किसी दूसरे का है तो वही आपका मित्र रहेगा और बाकी सभी आपसे दूर होते चले जाएगे ।
जिस तरह से एक चोर को दूसरा चोर ही पसंद आता है ठिक यही वैसे है क्योकी आपका जैसा ही आपको पसंद आने वाला है और इसी बात के कारण से तो कहा जाता है की इस मुहावरे का सही अर्थ समान स्वभाव वाले लोगो मे जल्दी जोस्ती हो जाती है होता है । और शायद यह आप अभी तक समझ चुके है।