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SSC GD मे आया मुँह लगाना मुहावरा, जानिए अर्थ और वाक्य

मुँह लगाना का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

मुँह लगाना मुहावरे का अर्थ muh lagana muhavare ka arth – बहुत अधिक स्वतंत्रता देना

मुँह लगाना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त मुँह लगाना मुहावरे का अर्थ  बहुत अधिक स्वतंत्रता देना  होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
मुँह लगानाबहुत अधिक स्वतंत्रता देना
मुँह लगाना का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

मुँह लगाना मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो आप लोगो को पता है जब हम किसी ऐसे व्यक्ति को इतनी अधिक स्वतंत्रता दे देते है की वह ‌‌‌हमे कुछ भी बोल सके तो वह व्यक्ति ‌‌‌हमे कुछ बोल सकता है या फिर वह अपने आप को हमसे भी बडा समझने लग जाए ‌‌‌चाहे फिर वह हमारा नोकर भी क्यो न हो तो ऐसे लोग जब हमसे ऐसी वैसी बात कहने लग जाते है या हमसे अपने आप को बढकर मानने लग जाते है तो इसे मुंह लगाना कहा जाता है । ‌‌‌यानि उसे यह सब कहने की स्वतंत्रता देना ।

मुंह लगाना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • नोकरानी को इतना अधिक मुंह लगाना भी ठिक नही है वरना वह अपने आप को इस घर की मालकीन समझने लग ‌‌‌जाएगी ।
मुंह लगाना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence
मुंह लगाना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence
  • यह तुम्हारे मुंह लगाने का ही फल है की ‌‌‌आज उसने इतनी बडी बात तुमसे कह दी वरना उसकी क्या ओकात की वह हमारे बारे मे ऐसा कह सके ।
मुंह लगाना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence
  • महेश को इतना अधिक मुंह लगा लिया की अब वह अपने पिता की भी बात नही सुनता है ।
  • पत्नी को इतनी अधिक मुंह लगा लेने के कारण अब वह मेरी भी बात नही मान रही है ।
  • ‌‌‌आज तो तुम ऐसे लोगो को मुंह लगा रहे हो पर जब ये लोग तुम्हारे साथ भी कुछ गलत करेगे तब तुम्हे पता चलेगा ।
  • महेश एक गुंडा है इसे मुह लगाना ठिक नही होगा ।
  • तुमने पहले तो ऐसे गुंडो को मुंह लगा लिया और आज जब इन्होने तुम्हे मारा तब जाकर तुम्हे अपनी गलती पर पश्चाताप हो रहा है ।

‌‌‌मुंह लगाना मुहावरे पर कहानी Idiom story

एक समय की बात है किसी नगर मे ललीत नाम का एक लडका रहता था । उसके घर मे उसके माता पिता के अलावा उसकी दादी भी रहती थी । उसके पिताजी गाव के अच्छे लोगो मे से एक माने जाते थे । ललीत के पिता बहुत ही गरीब थे । वे शहर मे एक रेहड़ी चलाते थे जिसमे सब्जिया बेचकर अपना घर ‌‌‌चलाते थे ।

जब ललीत छोटा था तब उसके पिता ने उसे पढने के लिए शहर मे सरकारी स्कुल मे डाला था । क्योकी गरीब थे इस कारण से उसे अच्छी शिक्षा देने के लिए प्राइवेट स्कुल मे नही डाल सके थे । ललीत पढाई मे बहुत ही कमजोर था और कभी कभी उसके पिता के पास उसकी शिकायत भी आ जाया करती थी की आपका बेटा पढने ‌‌‌कमजोर है ।

पर उसके पिता को पता था की हमारे परिवार मे कोई भी पढा लिखा नही है इस कारण से वह अपने बेटे को ज्यादा कुछ नही कहते थे । इस कारण से वह आराम से कभी कभार पढता था । और किसी तरह से वह पढ लिखकर बडा हो गया था ।

जब ललीत बडा हो गया तब उसके पिता ने उससे कहा की बेटा मैं तो सारी उमर शब्जी ‌‌‌बेचता रहा हूं । मैं तो यही चाहता हूं की तुम इस तरह ‌‌‌के काम न करो बल्की कोई अच्छी सी job देख कर उसमे काम करने लग जाओ ।

अपने पिता की बात सुनकर ललीत काम करने के लिए इधर उधर जाने लगा था पर उसे अच्छा काम नही मिला था । इस बिच मे उसे पता चल गया की जब तक लोगो को मक्खन नही लगाया जाता तक तक काम नही ‌‌‌बनता है इस कारण से एक दिन वह कही जा रहा था तो उसे पता चला की जो मेरे पास आदमी खडा है वह एक job करता है ।

तब ललीत ने उस आदमी ‌‌‌से बढ चढ कर बाते करने लगा था । जिसके कारण से उस आदमी को लगा की यह तो बहुत ही अच्छा लडका है इसे अपनी कंपनी मे काम दिला देना चाहिए । ऐसा सोचकर उसने ललील को काम ‌‌‌दिला दिया था ।

काम मिल जाने के कारण वह काम बहुत ही अच्छी तरह से करने लगा था और धिरे धिरे वह अपने बॉस की बढाईयां करने लगा था । जिसके कारण से उसके बॉस ने उसे अपना Assistant बना लिया था ।

इस तरह से वह अपनी पोस्ट को छोडकर बडी पोस्ट पर चला गया था। अब ललीत उसकी बढाई तो करता ही था इस कारण से ‌‌‌उसे किसी काम की सलाह लेने लगे थे । धिरे धिरे ललीत अपने बॉस के इतना ‌‌‌नजदीक हो गया था की बॉस उससे हर बात पूछ कर करने लगा था और जब कोई उन दोनो को बाते करते देख लेता तो ऐसा लगात की ये दोनो तो मित्र है ।

यह सब देखकर उसके मित्र ने उसे कहा की दोस्त इस तरह से छोटे लोगो को मुंह लगाना ठिक नही है और फिर इसे आता भी तो कुछ नही है । तब ललीत के बॉस ने कहा की नही यार ऐसी बात नही है यह बहुत ही अच्छा लडका है यह मुझसे कभी भी बदतमीजी नही करेगा ।

तब उसके दोस्त ने उसे समझाने का बहुत प्रयास किया पर जब वह नही समझ रहा था तब उसके दोस्त को पता चल गया की ‌‌‌इसे समझाना मुर्खता है । यह सोचकर वह वहां से चला ‌‌‌गया । उसके बाद मे ललीत ‌‌‌को उस आदमी के पास काम करते हुए एक वर्ष हो गया था ।

अब जो भी कोई ललीत और उसके बॉस को देख लेता तो ऐसा लगता की ललीत बॉस है और बॉस नोकर है । यानि ललीत अब अपने बॉस को कुछ भी कह देता था । इस तरह से कभी भी कुछ भी कहने के कारण धिरे धिरे ललीत के बॉस को लगने लगा था की मैंने इसे इतनी ‌‌‌अधिक छुट दे दी है की यह कहने से पहले कुछ सोचता भी नही है ।

इसी तरह से एक दिन की बात है ललीत और उसका बॉस एक ‌‌‌मीटिंग मे गए हुए थे । वहां पर जब बाकी लोगो ने ललीत के बॉस से जिस बारे मे मिटिंग हो रही थी उस बारे मे पूछा तो वह खडा होकर बोलने लगा था । तभी ललीत खडा हो गया और अपने बॉस से बोला की तु चुप ‌‌‌निचे बैठ जा तुझे आता क्या है मैं इन लोगो को बताता हूं ।

यह सुनकर वे सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे थे । साथ ही ऐसा सुन कर ललीत के बॉस को अपनी बेइज्जती महुसस होने लगी और तभी उसका बॉस खडा हुआ और बोला की बॉस तु है की मैं और तु होता कोन है मुझे यह कहने वाल आज से ही तुम्हारी नोकरी चली गई है ।

इतना ‌‌‌सुनते ही वह वहां से चला गया था । तब उस बॉस के मित्र ने कहा की मैंने तो तुम्हे पहले ही कहा था की नोकरो को ‌‌‌इतना मुंह लगाना ‌‌‌ठीक नही है जिसके कारण से वे अपने आप को बॉस मानने लग जाए । अब जाकर बॉस को समझ मे आ गई थी की यह जो कह रहा है वह सही कह रहा है ।

फिर वह कभी भी अपने नोकरो को इतनी अधिक छुट ‌‌‌नही देता था की हर कोई उसे कुछ भी कह दे । इस तरह से आप लोगो को तो समझ मे आ गया होगा की मुंह लगाना मुहावरे का अर्थ क्या है ।

मुँह लगाना मुहावरे पर निबंध || muh lagana essay on idioms in Hindi

दोस्तो  muh lagana एक ऐसा मुहावरा है जिसके बारे मे आपने इतना अधिक पढा है क शायद आपको यह पता चल गया होगा की इसका अर्थ बहुत अधिक स्वतंत्रता देना होता है ।

क्योकी आपने एक कहानी पढी है जिसमें हमने muh lagana muhavare ka arth – बहुत अधिक स्वतंत्रता देना होता है और यह आपको अच्छी तरह से समझाया गया है । क्योकी कहानी में जो किरदार होता है उसे काफी अधिक स्वतंत्रता दी जाती है और इसी स्थान पर मुह लगाने का प्रयोग किया जाता है ।

और इस बात के आधार पर आपके लिए समझना आसान हो जाता है की इस मुहावरे का अर्थ क्या होता है । दोस्तो अगर आपको अब कुछ पूछना है तो आप कमेंट में पूछ सकते है ।

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