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पांचो उंगली घी में होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

पांचों उंगली घी में होना मुहावरे का अर्थ

पांचों उंगली घी में होना मुहावरे का अर्थ pancho ungli ghee mein hona muhavare ka arth – चारों ओर से लाभ प्राप्त होना

पांचो उंगली घी में होना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त पांचो उंगली घी में होना मुहावरे का अर्थ चारों ओर से लाभ प्राप्त होना होना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
पांचो उंगली घी में होनाचारों ओर से लाभ प्राप्त होना होना

पांचो उंगली घी में होना मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो घी एक ऐसा प्रदार्थ है जिसका उपयोग खाने में किया जाता है। जो की गाय के दूध के कारण से पैदा होता है । घी में बहुत से पोषक तत्व होते है जिसके कारण से घी बहुत अधिक ‌‌‌खाया जाता है । मगर इसे एक जगह इकट्ठा रखने के लिए किसी डिब्बे का उपयोग होता है ‌‌‌जिसमें से घी को निकालने के लिए उंगली का उपयोग होता है ।

जिसके कारण से जब घी को हाथ की एक उंगली से निकाला जाता है तो डिब्बे से निकलने वाले घी की ‌‌‌मात्रा कम होती है । मगर एक उंगली की जगह हाथ की पांचो उंगलीयो से घी को डिब्बे ‌‌‌से बाहर निकाला जाता है तो घी की अधिक मात्रा बाहर आ जाता है ।

जिसके कारण से खाने वाले को अधिक फायदा होता है । इसे पांचो उंगली घी में होना कहा जाता है। और इसी तरह से जब मनुष्य को किसी काम में चारो ओर से लाभ प्राप्त होता है तो उसे बहुत फायदा होता है । जिसके कारण से इसे भी पांचो उंगली घी में ‌‌‌होना कहा जाता है । क्योकी दोनो बातो में अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है । जीसे मनुष्य जीवन में चारो ओर से लाभ प्राप्त होना भी कहा जाता है और यही इस मुहावरे का अर्थ होता है ।

पांचो उंगली घी में होना मुहावरे के अन्य रूप

दोस्तो क्या होता है की मनुष्य किसी मुहावरे का प्रयोग करते समय मुहावरे को ‌‌‌कुछ अलग ही रूप में जानने लग जाता है । जिसके कारण से ऐसा लगता है की एक अन्य मुहावरा है मगर असल में वह एक ही मुहावरा होता है और ऐसे ही हमारा यह मुहावरा अन्य रूप में बदल गया है जो है –

मुहावरा अर्थ
पाँचों उँगलियाँ घी में होनाचारों ओर से लाभ प्राप्त होना होना
5 उंगलियां घी में होना चारों ओर से लाभ प्राप्त होना होना ।
हाथ की पांचों उंगली घी में होनाचारों ओर से लाभ प्राप्त होना होना ।
  1. पाँचों उँगलियाँ घी में होना मुहावरे का अर्थ – चारों ओर से लाभ प्राप्त होना होना ।
  2. 5 उंगलियां घी में होना मुहावरे का अर्थ – चारों ओर से लाभ प्राप्त होना होना ।
  3. ‌‌‌हाथ की पांचों उंगली घी में होना मुहावरे का अर्थ – चारों ओर से लाभ प्राप्त होना होना ।

पांचो उंगली घी में होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग // pancho ungli ghee mein hona idioms in sentences in hindi

  • जब से किशोर विदेश की कंपनी में CEO बना है तब से उसकी पांचो उंगली घी में है ।
पांचो उंगली घी में होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग
  • ‌‌‌चांदनी का विवाह एक IAS ऑफिसर से हो जाने के कारण से चांदनी की पांचो उगली घी में है ।

पांचो उंगली घी में होना मुहावरे पर प्रसिद्ध कहानी // pancho ungli ghee mein hona idioms of story in HIndi

दोस्तो प्राचीन समय में एक ज्ञानी साधू हुआ करता था । ‌‌‌जो अपने ज्ञान के आधार पर किसी भी व्यक्ति को हराने की ताक्त रखता था । मगर साधू कभी भी किसी सही व्यक्ति को अपने ज्ञान के आधार पर निचा नही दिखाता था । बल्की साधू उसी व्यक्ति को निचा दिखाता जिसमें किसी तरह का घंमड होता था । ‌‌‌

इस तरह से साधू अनके स्थानो पर भ्रमण करता और जैसे ही उसे इस तरह के लोग नजर आते तो साधू उन लोगो को समझाने का प्रयास करता । मगर नही मानने पर उन्हे हरा दिया करता और लोगो की भलाई करने के लिए उन्हे मनाता था ।

…………….. इसी तरह की बात है साधू भ्रमण करते हुए एक ऐसे राज्य में चला गया था जहां पर एक नोजवान राजा रहा ‌‌‌करता था जिसमें ज्ञान नाम मात्र नही था। बल्की वह जो भी करता अपने मंत्री से पूछ कर करता था ।

क्योकी उस राजा का पिता एक युद्ध में मारा गया था और राजा का बेटा ही राजा बनता है जिसके कारण से उसी को राजा बनाया गया था । वह राजा कभी भी लोगो की भलाई के बारे में नही सोचता था क्योकी मंत्री ऐसा कहता नही ‌‌‌था और राजा ऐसा करता नही था ।

जब साधू इस तरह के राजा के राज्य में गया तो उसने देखा की लोग अपने दूखो के कारण से असूओ को बहार निकालते रहते है । कोई भी अपने दूखो को दूसरो को बताने की कोशिश नही करता था । मगर साधू को इस बारे में पता नही था जिसके कारण से उसने एक बार एक औरत को रोते हुए देखा तो उसने ‌‌‌पूछ लिया बहन क्या बाता है तुम क्यो रो रही हो ।

यह सुन कर उस औरत ने साधू को उल्टा जबाब दिया और कहा की तुम कोनसे भगवान हो जो की मेरे कष्टो को दूर कर दोगे । यह सुन कर साधू ने कहा की तुम अपने कष्टो के बारे में बताओ मेरे से जो होगा मैं वह करूगा ।

तब उस औरत ने कहा की इस राज्य का राजा ही ‌‌‌हम लोगो के कष्टो को नही पुछ रहा है और हमारी मदद नही कर रहा है तो तुम तो एक साधू जिसके पास खाने को नही मिलता है तुम क्या हमारी मदद करोगे ।

इतना कह कर वह औरत अपने घर में चली गई । कुछ दूरी पर जाने के बाद में साधू ने एक वृद्ध व्यक्ति को काम करते हुए देखा तो साधू को अच्छा नही लगा । तब उसने कहा ‌‌‌की हे मनुष्य तुम इतने वृद्ध होने के बाद भी काम क्यो कर रहे हो तुम्हारे बेटे बेटी नही है क्या ।

तब उस वृद्ध व्यक्ति ने भी साधू को कडवी बात कही और कहा की तुम हो कोन जो मुझसे ऐसा पूछ रहे हो जो राजा महल में रहता है वह हम लोगो के बारे में इतनी फिकर नही कर रहा है तो तुम कोन हो । इस तरह से कह कर ‌‌‌वह वृद्ध व्यक्ति भी अपने काम में लग गया ।

तब साधू बाबा को समझ आया की जरूर यहां का राजा निठला होगा जो की किसी की फिकर नही कर रहा है और अपनी जीम्मेदारियो को सही तरह से निभा नही रहा है । क्योकी अपनी प्रजा के हर कष्टो के बारे में एक राजा को ज्ञान होना चाहिए और उसे ही यह सब दूर करना चाहिए ‌‌‌।

इस बारे में सवाल लेकर साधू बाबा राजा के महल में चला  गया और वहां जाने पर उसने देखा की एक धनवान सेठ है जो की राजा को कह रहा है महाराज मेरे घर में जो भी आभूषण थे वह सब चोरी हो गया है ।

पांचो उंगली घी में होना मुहावरे का अर्थ क्या होता है

जिसके कारण से मेरे पास कुछ नही रहा है और यह सब देख कर मेरी पत्नी भी मुझे से नाराज रहती है और हमारे साथ मेरा ‌‌‌दोस्त रहता था जिसकी मैंने दूखो में खुब मदद की थी मगर वह भी हमे छोड कर चला गया है ।

आप मेरी इस समस्या का समाधान करे और चोर को पकडे व मेरे धन को वापस लेकर आए । ‌‌‌यह राजा ने भली भांति सुना, ‌‌‌मगर राजा को तो चोर का पता नही चला, मगर साधू को समझ में आ गया की वह चोर सेठ का ही दोस्त है । क्योकी सेठ राजा से न्याय की बार बार ‌‌‌मांग कर रहा था और राजा को यह न्याय करना भी जरूरी था ।  

मगर तभी राजा ने कहा की देखो भाई मैं आपकी मदद जरूर करूगा आप कुछ समय के लिए शांत रहे । मैं पहले और लोगो की समस्या सुन लेता हूं । फिर साधू बाबा की बारी आई तो उसने राजा से कहा की महाराज आपने अपनी प्रजा से कब बात की थी । तब राजा ने कहा की ‌‌‌इसका मतलब क्या है ।

तब साधू बाबा ने कहा की नही महाराज मैं ऐसे ही पूछ रहा हूं । तब राजा ने कहा की दो वर्षो पहले मेंरे पिता ने लोगो की हर समस्या का समाधान किया था और उसी समय मैंने लोगो के साथ बाते की थी । तब साधू को समझ में आ गया की लोग जो कष्ट भुगत रहे है वह इसी राजा के कारण से है ।

तब साधू ‌‌‌बाबा ने कहा की महाराज आपको अपनी प्रजा से बात करनी चाहिए और उनके कष्टो का निवारण करना चाहिए । यह सुन कर राजा ने कहा की तुम एक साधू हो इस कारण से मैं तुम्हे कुछ नही कह रहा हूं मगर इसका मतलब यह नही की तुम मुझे आज्ञा देने लगो ।

तब साधू बाबा को समझ में आ गया की राजा सिधी तरह से मेरी बात नही मानने ‌‌‌वाला है । जिसके कारण से साधू बाबा कुछ निराश हुए और वही पर बैठ गए । कुछ समय के बाद में फिर से सेठ खडा हुआ और अपनी समस्या का समाधान करने को राजा से कहा और कहा की अगर चोर की तलाश नही की तो प्रजा भी तुम्हारे खिलाफ कर दूगा ।

क्योकी सेठ ऐसा कर सकता था दरसल सेठ ने लोगो की बहुत मदद की थी जिसके ‌‌‌कारण से लोग सेठ की बात आसानी से मान जाते थे । यह राजा को भी मालूम है जिसके कारण से राजा ने तुरन्त अपने सेनिको को चोर की तलाशी में लगा दिए ।

इस तरह से राजा की न्याय की बैठक खत्म हुई और सभी अपने अपने घर चले गए । मग साधू सेठ के पिछे पिछे उसके घर में चला गया और फिर सेठ से कहा की सेठजी मैं ‌‌‌आपके चोर की तलाश कर सकता हूं । मगर इसके बदले मे मुझे कुछ चाहिए । तब सेठ ने कहा की जो मागोगे वह मिलेगा ।

तब साधू ने कहा की मैं इस नगर में लोगो को केवल खुश देखना चाहता हूं । और वह सब लोगो का दूख केवल राजा ही दूर कर सकता है । क्योकी राजा का कर्तव्य है जो उसे करना चाहिए मगर राजा ऐसा कर नही रहा ‌‌‌है ।

यह सुन कर सेठ ने भी कहा की हां यह सच है राजा ‌‌‌ने दो वर्षों से नगर के लोगो को अपनी सकल तक नही दिखाई है । तब साधू ने कहा की आपकी मदद मैं इसी सर्त पर करूगा की मैं जो कहु वह आप कर सको मगर इसमें लोगो का फायदा होगा । तब सेठ ने साधू की बात मान ली ।

तब साधू ने सेठ से पूछा की तुम्हे अपने दोस्त से ‌‌‌मिलना चाहिए और पूछना चाहिए की वह तुमसे दूर किस कारण से हुआ था । आखिर तुमने उसकी दूखो में मदद की थी तो आज उसे भी तुम्हारे दूखो में मदद करनी चाहिए । इ

स तरह से साधू ने सेठ को अपनी बात में ले लिया और सेठ को अपने मित्र से मिलाने के लिए लेजाने लगा । मगर सेठ के यह मालूम नही था की उसका मित्र ‌‌‌कहा है । इस कारण सेठ ने इसमें राजा के ही सेनिको की मदद ‌‌‌ली मगर इस बारे में राजा को मालूम नही था ।

‌‌‌तब सेनिको ने सेठ को बताया की आपका मित्र इस राज्य से दूसरे राज्य में चला गया है । तब साधू सेठ को उसके मित्र से मिलाने के लिए दूसरे राज्य लेकर चला गया । जब सेठ अपने मित्र के घर के पास पहुंचा ‌‌‌तो सेठ को यह देख कर यकिन नही हो रहा था की यह उसके ही मित्र का घर है ।

क्योकी घर एक धनवान व्यक्ति का लग रहा था । तभी साधू ने कहा की सेठ जी आप यह देख कर चौंक क्यो रहे हो हो सकता है की आपका मित्र इस घर में काम कर रहा हो । इस तरह से साधू ने सेठ का ध्यान कुछ अलग कर दिया ।

जब सेठ और साधू उसके ‌‌‌घर में गए तो उन्होने देखा की मित्र बहुत ही धनवान लोगो की तरह बैठा है और कुछ नोकरो से काम कर रहा है । यह सब देख कर सेठ को लगा की जरूर मेरे दोस्त ने ही धन चुराया है और जब सेठ ने अपने मित्र को पकडा और उससे सचाई पूछी तो असल में सेठ का मित्र ही चोर था यह सेठ को पता चल गया ।

इस तरह से सेठ फिर ‌‌‌अपना धन अपने राज्य लेकर आ गया । तब राजा ने सेठ से कहा की तुम्हे तुम्हारा धन मिल गया तुम्हारे तो पांचो उंगली घी में है । तब सेठ ने कहा की नही महाराज आपने इसमें हमारी मदद नही की बल्की उस साधू ने की थी और फिर सेठ के कहने पर राज्य के लोग अपनी अपनी समस्या लेकर महल में जाने लगे ।

जिसके कारण ‌‌‌से मजबूरन राजा को भी लोगो का काम करवाना पडा । तब यह सब देख कर सेठ ने साधू से कहा की महाराज आपकी मदद से हमारे राज्य के लोगो की पांचो उंगली घी में हो गई है । सभी को राजा की तरफ से लाभ प्राप्त हो रहा है । सभी को काम मिल गया है । इस तरह से फिर साधू वहां से चला गया ।

और फिर राजा इसी तरह से लोगो की ‌‌‌बात मानता और लोगो की मदद करता रहता।  जिसके कारण से किसी को धन मिलता तो किसी को रोजगार । मगर सबके अच्छे दिन आ गए थे ।

इस तरह की पांचो उंगली घी में होना ‌‌‌मुहावरे की कहानी होती है । ‌‌‌जिसमें इस मुहावरे के अर्थ को समझाया गया है ।

क्या आपकी भी पांचो उंगली घी में है बताना न भूले ।

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