पेट पर लात मारना मुहावरे का अर्थ pet par laat marna muhavare ka arth- रोजी रोटी छीनना ।
दोस्तो जिस तरह से हर किसी को अपना पेट भरने के लिए कुछ न कुछ करना ही पडता है। जिसके कारण ही उसका पेट भर पाता है । अगर कोई किसी व्यक्ति को उसका पेट भरने से रोक देता है या यह कह सकते है की जो वह काम करता है वह उससे छीन लेता है यानि काम से निकाल देता है । तो इस तरह से उसका पेट भरने का साधन छीन लिया जाता है । जिसके कारण अब वह अपना पेट नही भर सकता है । तो इस तरह से रोजी रोटी छीनने को ही पेट पर लात मारना कहा जाता है ।

पेट पर लात मारना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence
- महेश ने श्याम के पेट पर लात मार कर उसे नोकरी से निकाल दिया ।
- अगर ज्यादा पच पच करोगे तो मै तुम्हारे पेट पर लात मारने से पीछे नही हटुगा ।
- तुम तो चाहते ही हो की उस बेचारे की पेट पर लाट मार दो पर जब तक मै हूं तब तक ऐसा नही होगा ।
- तुमने मेरे पेट पर लात मारी है तुम कभी भी खुश नही रह सकते हो ।
- साहब गरीब के पेट पर लात मार कर कोन खुश रह सका है जो आप राहेगे ।
- सरकार मुझ गरीब के पेट पर लात मत मारो मे बेटे भुखे मर जाएगे ।
- मुझे एक यही तो काम आता है और आप इसमे भी मेरे पेट पर लात मार दोगे तो मै कहां जाउगा ।

पेट पर लात मारना मुहावरे पर कहानी Idiom story
प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक सेठ रहा करता था । उसके घर मे उसके दो बेटे थे । इसके अलावा सेठ के घर मे कोई भी नही रहता था । सेठ बहुत ही कंजूस था वह किसी को भी पैसे देना नही चाहत था । उसके अपने बेटे भी अगर उससे कुछ माग लेते तो वह उन्हे भी देता नही था ।
सेठ ने अपने बेटे को पढने के लिए भी भेजा था और वे दोनो पढने के लिए भी जाते थे । पर सेठ के पास इतने पैसे होने के कारण भी वह अपने बेटो को स्कुल पैदल ही भेजता था । इस बारे मे गाव के लोगो को पता था की सेठ बहुत ही कंजूस है
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इस कारण से जब भी कोई उससे पैसे लेने के लिए आता तो वह उसे पैसे देता था पर कम देता था । ओर कहता की ब्याज बहुत ज्यादा लगेगा पैसे लेने हो तो लो वरना मत लो । जिस किसी को पैसो की जरुरत होती वह सेठ से ज्यादा रुपयो पर भी पैसे ले लेता था क्योकी उनके पास और कोई चारा नही था ।
जब वे लोग सेठ के पैसे नही चुका पते तो सेठ उन लोगो का घर खेत अपने कब्जे मे ले लेता था। एक बार की बात है सेठ का बेटा बिमार हो गया था। इस कारण से उनकी देखभाल करने वाला कोई भी नही था । तब सेठ ने सोचा की अगर इसे कुछ हो गया तो आगे मेरा काम कोन देखेगा ।
तब उसने एक नोकर को अपने घर मे रख लिया था । और कहा की तुम्हे दो समय का खाना मिलेगा और पैसे भी मिलेगे । नोकरी किस को नही चाहीए इस कारण से वह आदमी सेठ के पास काम करने के लिए रह गया था ।
उस आदमी का नाम मोहन था। धिरे धिरे समय बित गया और सेठ का बेटा ठीक हो गया था । उसे ठीक होने मे एक वर्ष लग गया था । मोहन के घर मे और कोई तो था नही इस कारण से वह सेठ के पास ही काम करता रहा था । पर सेठ ने अभी तक उसे एक फुटी कोडी तक नही दी थी ।
फिर भी मोहन उसके पास काम करता रहा था क्योकी उसे दो समय का खाना तो मिल जाता था । तब एक दिन मोहन सेठ से पैसे मागने के लिए गया तो सेठ ने उसे कुछ रुपय दे दिए थे । जिससे मोहन ने उन पैसो को काम मे ले लिया था।
अब मोहन सेठ से पैसे मागता रहता था और सेठ उसकी किमत का 25 प्रतिशत ही उसे देता था । जिससे मोहन का काम निकल जाता था । इसी तरह से हर बार सेठ से पैसे मागते रहने के कारण सेठ को लगा की इसे काम से निकालना होगा क्योकी यह मैरे पैसे ले लेता है ।
फिर सेठ को लगा की अगर यह काम से निकल जाएगा तो मेरे घर का काम कोन करेगा । ऐसा सोचकर सेठ ने उसे अपने घर मे ही रहने दिया और काम कराता रहा था । धिरे धिरे सेठ के बेटे बडे हो गए थे । तब सेठ को लगा की अब मुझे मोहन को काम से निकाल देना चाहिए ।
क्योकी अब तो मेरे बेटे बढे हो गए है इस कारण से वे सब काम कर लेगे । तब सेठ को लगा की मोहन को इसी तरह से निकाल दुगा तो वह मुझसे पैसे मागेगा । ऐसा सोचकर सेठ ने कुछ योजना बनाई जिसके तहत उसे निकाल दिया जाए । तब एक दिन सेठ ने मोहन के सामने कुछ रुपय रखे थे । उस समय उनके बेटो ने भी देखा था की पिताजी ने रुपय रखे है ।
जब रात हो गई तो सेठ ने उन रुपयो को उठा कर अपने पास रख लिए थे । जब शुबह हुई तो सेठ उन रुपयो को ढूढने लगा था । और उसेन नाटक किया की मोहन ने ही उन रुपयो को चुराए है । चोरी का इल्जाम लगाने पर मोहन ने कहा की सेठ जी मैंने आपके पैसे नही चुराए है ।
सेठ को पता था की इसने चोरी नही की है क्योकी सेठ ने ही उन रुपयो को वापस ले लिया था । सेठ उसे निकालना चाहता था इस कारण से उस पर चोरी का इल्जाम लगाकर उसे घर से निकालने गला था । तब मोहन ने कहा की सेठ जी मैंने चोरी नही की है आप मुझ गरीब को काम से निकालकर मेरे पेट पर लात मत मारो ।
पर सेठ ने उसकी एक भी नही सुनी और उसे काम से निकाल दिया था । लोगो को पता था की मोहन बहुत ही इमानदार है इस कारण से वे भी आपस मे बात करने लगे की सेठ कंजूस होने के कारण मोहन पर चोरी का इल्जाम लगा कर उसके पेट पर लात मार दी है ।
इस तरह से मोहन को को काम से निकाल दिया गया था । इस तरह से आप समझ गए होगे की इस कहानी से मुहावरे का अर्थ क्या है ।
पेट पर लात मारना मुहावरे का || pet par laat marna essay on idioms in Hindi
दोस्तो पेट पर लात मारने का मतलब यह नही है की आप किसी के पास जाए और उसके पेट पर लात मार दे । दरलस पेट को हमेशा भरने के लिए ही मनुष्य काम करता रहता है । जैसे की आपके पिताजी है तो वह दिन रात जो काम करते है वह अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए ही काम करते है । और इस काम से ही उनका पेट भर पाता है । तो इसका मतलब हुआ की यह काम आपके पिताजी की रोजी रोटी हो गई ।
और इसी तरह से कोई अन्य व्यक्ति काम करता है तो वह काम भी उसकी रोजी रोटी होती है जैसे की कहानी में आपने मोहन के बारे में पढा जो की सेठ के पास काम कर कर अपनी रोजी रोटी कमाता था ।
मगर सेठ ने मोहन को काम से निकाल कर उसकी रोजी रोटी छीनने का काम कर लिया और यह सब मोहन के पेट पर लात मारने के समान हो गया क्योकी इससे मोहन अपना पेट भर नही पाएगा और यह पेट पर लात मारना हुआ और यही कारण है की कहानी में यहीं पर मुहावरे का प्रयोग हुआ है और इससे समझ सकते है की रोजी रोटी छिनना ही अर्थ होता है ।