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बालू की भीत का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

बालू की भीत का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

बालू की भीत मुहावरे का अर्थ balu ki bheet muhavare ka arth – शीघ्र नष्ट होने वाली चीज

दोस्तो जिस तरह से जब कोई बालू की दिवार बनाता है तो वह कुछ ही समय बात गिर जाती है जिससे समझ मे आता है की बालू की दिवार मजबूत नही होती है वह जल्दी ही नष्ट हो जाती है । उसी तरह से जब कोई ऐसी चीज होती ‌‌‌जो जल्दी ही खत्म या नष्ट हो जाती है तो उसे बालू की भीत कहा जाता है क्योकी वह भी उसके समान जल्दी नष्ट होती है ।

बालू की भीत का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

बालू की भीत मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • तुम्हारे पास पैसे रहना तो बालू की भीत है ।
  • ‌‌‌तुम्हारा साथ तो बालू की भीत है न जाने कब साथ छोड दो ।
  • रामलाल ने अभी अभी तो खेत लिया था और अभी अभी वह बिक गया इसे कहते है बालू की भीत ।
  • ‌‌‌आप उस पर विश्वास करकर अपना जीवन चला रहे हो पर उसका साथ तो बालू की भीत है ।
  • शराबी के पास कितना भी धन क्यो न हो वह नष्ट हो ही जाता है इसे तो बालू की भीत ही तो कहेगे ।
  • महेश ने दारू क्या पिनी ‌‌‌शुरु कर दी उसका घर तो बालू की भीत बनता जा रहा है ।
  • ‌‌‌पैसे तो बालू की भीत होते है पर आप जैसे लोग हमेशा हमारे साथ रहोगे ।
  • अगर यह इसी तरह से जुआ खेलता रहा तो उसकी ‌‌‌संपत्ति बालू की भीत बनते देर नही ‌‌‌लगेगी ।
बालू की भीत का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग

‌‌‌बालू की भीत मुहावरे पर कहानी Idiom story

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक साहुकार रहता था । उसके घर मे उसकी पत्नी और एक बेटा ही था । साहुकार व्यपार करने के लिए दूर दूर जाता था और यहां की वस्तु वहां पर बेचकर आता था । जिसके कारण से सहुकार को बहुत लाभ होता था । जिससे समय के साथ वह धनवान बनता गया ‌‌‌और एक समय ऐसा आया की उसके ‌‌‌पास करोडो की ‌‌‌सम्पत्ति हो गई थी ।

अब भी साहुकार व्यपार करने के लिए जाता था क्योकी वह चाहता था की मैं कुछ न कुछ काम तो करता ही रहु । क्योकी घर मे आराम करने से मेरा ही नुकसान है धन कम होगा ‌‌‌सो होगा जो बिमार पडुगा वह अलग । इसी सोच के साथ रोजान साहुकार काम करने के लिए जाता था।

‌‌‌उस समय उस गाव के आस पास कोई भी विधालय नही था इस कारण से साहुकार ने अपने बेटे को नही पढा सका था । पर साहुकार को जब भी समय मिलता उसे थोडा बहुत बता देता था ताकी वह आसानी से हिसाब किताब तो कर सके ।

धिरे धिरे साहुकार का बेटा बडा हो गया था पर वह अभी भी इतना बडा नही हुआ की अपने पिता का काम देखने ‌‌‌लग जाए । एक दिन की बात है साहूकार व्यपार करने के लिए गया हुआ था तो जिस देश मे वह व्यपार करने के लिए गया था वहां एक राजा राज करता था ।

किसी कारण से साहुकार से राजा के राज्य मे उसके नियम का उल्लंघन हो गया था । जिसके कारण राजा ने उसे ‌‌‌जेल मे आजीवन कारावास की सजा सुना दी । हालाकी उसने जानबूझ ‌‌‌कर राजा के राज्य के नियम का उल्लंघन नही किया था ।

पर राजा इस बात को नही मानता था की किसने क्या सोचकर यह किया है । आजीवन कारावास की सजा देने के कारण वह अपने घर नही जा सकता था । जिसके कारण से उसकी पत्नी और बेटा बहुत ही दुखी होने लगे थे ।

इस तरह से साहुकार का इंतजार करते हुए साहुकार की पत्नी और ‌‌‌उसके बेटे को एक वर्ष हो गया था । जिसके कारण साहुकार की पत्नी बिमार पड गई थी । उसके पास पैसे होने के बाद भी वह ठिक नही हो ‌‌‌सकी ‌‌‌और कुछ दिनो के बाद उसकी मृत्यु हो गई ।

अपनी मां के मर जाने के कारण उसका बेटा बहुत ही दुखी था । तब उसके बेटे ने अपनी मां के शरीर को अग्नि दी । धिरे धिरे समय के ‌‌‌साथ साहुकार का बेटा बडा हो गया था ।

साहुकार के बेटे ‌‌‌के पास धन की कोई कमी नही थी इस कारण से वह आराम से अपना जीवन गुजारने लगा था । वह घर पर ‌‌‌बैठा रहता था इस कारण से एक दिन वह कही पर चला गया जहां पर ‌‌‌जुआ खेला जाता था ।

तब वह भी उन लोगो के साथ ‌‌‌जुआ खेलने लगा था जो वहां पर खेलते थे । उसे ‌‌‌‌‌‌जुआ खेलते हुए कुछ ही दिन बिते थे की एक दिन उसे एक आदमी ने देख लिया जो उसके पिता का अच्छा मित्र था । तब उसने उससे कहा की बेटा जुआ खेलने वाले लोगो की सम्पत्ति बालू की भींत होती है ।

तब साहुकार के बेटे ने कहा की मेरे पास बहुत धन है मेरे पास कभी भी धन की कमी नही होगी आप अपना काम करो । ‌‌‌उसके साथ ऐसा बोलने के कारण वह आदमी बुरा मान गया और वहां से चुप चाप चला गया । जुआ खेलते हुए उसे एक ही महिना हुआ था की उसकी सम्पत्ति आधी हो गई थी ।

अब वह चाहता तो था की वह जुआ खेला छोड दे पर अब उससे छुट नही पा रहा था । वह एक बार छोडने की ‌‌‌सोचता तो तभी वह सोचता की मै तो खेलूगा मेरे पास अभी बहुत सम्पत्ति है । इस तरह से वह सोचता और खेलने के लिए चला जाता था । जिससे कुछ ही दिनो मे उसके घर खेत यानि उसकी सारी सम्पत्ति नष्ट हो गई थी । अब वह रास्ते पर आ गया था ।

तब उसे पता चला की मेरे पिताजी का मित्र सही कह रहा था की जुआ ‌‌‌खेलने वाले लोगो ‌‌‌की सम्पत्ति बालू की भीत होती है पर अब हो क्या सकता था । साथ ही गाव के लोगो को भी पता चल गया था की जुआ खेलने वाले लोगो के पास कभी भी कोई धन खटाता नही है वह पल भर मे नष्ट हो जाता है । इस तरह से आप इस कहानी से यह समझ गए होगे की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ।

‌‌‌बालू की भीत मुहावरे पर निबंध Essay on idiom

साथियो आप लोगो को यह तो पता ही होगा की पहले के जमाने मे मकान रेत के बनाए जाते थे । जिन्हे चुन्ने का मकान कहा जाता है । जब वह मकान एक बार बन जाता है तो वह कई वर्षो तक रहता है यानि वह जल्दी से नष्ट नही होता है । अगर उसकी माकान को चुन्ने का न बनाकर बालू रेत का ‌‌‌बनाया जाता है तो वह कभी भी नष्ट हो जाता है यानि वह कुछ समय बाद मे ही टुट पडता है ।

इससे यह पता चलता है की बालू की दिवार या मकान बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाता है । साथियो अगर कोई व्यक्ति का साथ इसी तरह का हो जो कभी भी टूट सकता है या फिर यह कह सकते है की ऐसी चीज जो जल्दी ही नष्ट हो जाती ‌‌‌है तो उसे बालू की भीत कहा जाता है ।

इस तरह से पता चलता है की बालू की भीत का अर्थ शीघ्र नष्ट होने वाली चीज होता है । यह आपको अब तक समझ मे आ गया होगा ।

बालू की भीत मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of balu ki bheet in Hindi

दोस्तो भीत के बारे में आपको पता होना चाहिए की भीत दिवार को कहा जाता है । वही पर बालू के बारे में आपको पता है की यह मिट्टी होती है । और अगर आप इस मिट्टी की दिवार बनाते है तो जैसा की हमने बताया की यह दिवाल शिघ्र नष्ट हो जाएगी ।

और आप केवल इसी बात के आधार पर समझ सकते है की balu ki bheet muhavare ka arth – शीघ्र नष्ट होने वाली चीज होती है ।

अगर आप इसे समझ नही पा रहे है तो आपको सबसे पहले एक बच्चा बन जाता है और फिर अपने घर में जो बालू मिट्टी है उसका एक घर बनाना है जिसके लिए आपको दिवार बनानी है ।जैसे की बचपन में बच्चे घर बनाते है वैसे ही घर बनाना है । इसके बाद में आपको उसे जरा सा हिलाना हे ओर आप देखेगे की यह शिघ्र नष्ट हो जाती है ओर यही आपको समझा सकता है की balu ki bheet का अर्थ क्या है ।

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