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बखिया उधेड़ना मुहावरे का मतलब, कहानी व वाक्य मे प्रयोग

बखिया उधेड़ना मुहावरे का मतलब, कहानी व वाक्य मे प्रयोग

बखिया उधेड़ना मुहावरे का अर्थ bakhiya udhedna muhavare ka arth- ‌‌‌गुप्त भेद या राज खोलना ।

दोस्तो आप लोगो को पता ही होगा की इस जमाने मे किसी न किसी के बारे मे कुछ ऐसी बाते होती है जो एक राज होती है यानि उसके बारे मे वह बाते भेद होती है । ‌‌‌जिसका भेद होता है वह अपना भेद खूल जाने के कारण डरता भी है । और ‌‌‌जब ‌‌‌वह भेद किसी कारण से लोगो के सामने आ जाता है तो इसे बखिया उधेडना कहा जाता है ।

बखिया उधेड़ना मुहावरे का मतलब, कहानी व वाक्य मे प्रयोग

बखिया उधेड़ना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • ‌‌‌जब तुम्हारी बखेडियां उधडेगी तब जाकर तुम्हे मेरा महत्व पता चलेगा ।
  • अगर तुमने मुझे मारा तो मै तुम्हारी बखिया उधेडने से पिछे नही हटुगा ।
  • विभिषण ने रावण की बखिया उधेड दी थी तब जाकर राम उन्हे मार सका था ।
  • महेश ने अपने दोस्त के पिता के सामने उसकी बखिया उधेड दी थी जिसके कारण उसके दोस्त का ‌‌‌मार पडी ।
  • प्रसांत ने जब सेठ की बखिया उधेडी तो गाव के लोगो ने सेठ को जुते चंपल से मारा ।
  • जब महावीर की बखिया गाव के लोगो के सामने उधडी तो वह शर्म से पानी पानी हो गया ।
  • दोनो भाईयों मे झगडा होने के कारण एक दुसरे ने एक दुसरे की बखिया उधेड दी ।
  • ‌‌‌राघव की मां के सामने उसकी बखिया उधेडी तब उसे बेलन से मार पडी ।
बखिया उधेड़ना मुहावरे का मतलब, कहानी व वाक्य मे प्रयोग

बखिया उधेड़ना मुहावरे पर कहानी Idiom story

‌‌‌एक बार की बात है किसी नगर मे एक सेठ रहा करता था । सेठ के पास बहुत धन था उसके पास इतना धन था की उसकी सात पुस्ते आराम से बैठ कर खा सकती है । सेठ ने गाव मे एक दुकान कर रखी थी और गाव के पूरे लोग सेठ की दुकान से ही समान लेकर जाते थे । गाव के लोगो को फिर भी यकिन ‌‌‌नही होता था की सेठ दुकान चलाने के कारण ही इतना धनवान बन गया था ।

सेठ ने दुकान के साथ साथ लोगो को ब्याज पर पैसे देने का काम भी खोल रखा था । इस तरह से सेठ लोगो के सामने यह काम करता था । इस कारण से लोगो को तो यही लगता की सेठ यह काम कर कर ही इतना धनवान बन गया है । उस गाव के नजदीक एक जंगल था ।

‌‌‌लोगो का मानना था की इस जंगल मे बहुत से जानवर रहते है खासकर वहां पर शेर रहता था है । उस जंगल मे जो भी कोई चला जाता है वह मारा जाता है । क्योकी वह फिर कभी भी अपने गाव मे वापस नही आता है । इस तरह से गाव के लोगो मे डर फैल रखा था की जंगल मे पता नही कौन कौन से जानवर रहते है ।

जब लोग इस बारे मे ‌‌‌सेठ से पूछते तो सेठ उन लोगो से कहता की आप लोग उस जंगल की तरफ जाते ही क्यो हो । आप लोग अपने गाव मे आराम से रहा करो । आप लोगो को जो भी चिज चाहिए होती है वह मै शहर से लाकर दे देता हूं । फिर भी आप लोग डटते नही हो और उस जंगल मे चले जाते हो ।

उस गाव मे बलवंत सिंह नाम का एक आदमी रहता था । जिसकी नशो मे बहुत ही बल था यानि वह बहुत बलवान था । बलवान होने के साथ साथ वह पढा लिखा और बहुत ही समझदार था । एक दिन की बात है बलवंत सिंह को पैसो की जरुरत पड गई थी इस कारण से वह सेठ के पास गया ।

जब वह सेठ के पास पहुंचा तो सेठ दुकान मे ‌‌‌नही था तब वह सेठ के घर मे चला गया था । वहां पर उसने आवाज सुनी की सेठ किसी से बात कर रहा है की जो भी जंगल की तरफ आता हो उसे वही पर पकड लो और काम कराओ । साथ ही सेठ को यह कहते हुए भी सुना की जो भी कोई भागने की कोशिश करे उसे वही पर मार दो ।

इस तरह की बाते सुन कर बलवंतसिंह को दाल मे कुछ काला लगा । ‌‌‌जब सेठ अपने घर से बाहर आने लगा तो बलवंत वहां से तुरन्त उसकी दुकान पर चला गया था । जब सेठ अपनी दुकान पर पहुंचा तो बलवंत ने उससे पैसे ले लिए थे। पैसे एक महिने के लिए थे पर बलवंत ने जानबूझकर उन पैसो को सेठ को नही दिए थे ।

जिसके कारण से सेठ ने उसे अपनी दुकान मे नोकर रख लिया था । साथ ही उससे घर मे ‌‌‌नोकर का काम करने को कह दिया था । बलवंत चाहता ही यही था वह सोचने लगा था की सेठ की बखिया उधेडनी होगी । इस कारण से ही वह उसके घर मे जाने के लिए सेठ को पैसे नही दिए थे ।

सेठ के पास रहने के कारण सेठ के बारे मे उसने बहुत कुछ जान लिया था और एक दिन वह सेठ के पिछे पिछे उसी जंगल मे चला गया था । जंगल ‌‌‌मे जाने के कारण बलवंत को पता चला की जो भी लोग जंगल मे गए थे उनमे से आधे से भी ज्यादा लोग यहां पर काम कर रहे है ।

वे लोग जानवरो का शिकार करते है और उनके अनमोल अंग जैसे खाल, हिरन का सिंग जैसे अंगो को निकालने के काम लगे है । तभी उसने देखा की एक आदमी वहां से भागने लगा था तो सेठ के ‌‌‌आदमियों ने उसे मार दिया था । यह देखकर बलवंत कुछ डर गया था । तब वह तुरन्त वहां से निकल गया ।

वहां से चले जाने के कारण बलवंत ने अपने अच्छे दोस्तो और गाव के बलवान लोगो को समझाया की उस जंगल मे बहुत कुछ चल रहा है । पर उन लोगो ने बलवंत की बात नही सुनी ।

तब बलवंत ने उन लोगो से कहा की मैंने आप ‌‌‌लोगो को कभी भी झुठी खबर नही दी है इस कारण से आप भी मेरा विश्वास करो । ऐसा कहने पर गाव के 10-12 लोगो ने बलवंत की बात पर विश्वास किया और जंगल मे जाने को राजी हो गए थे । उस समय वे लोग डर तो रहे थे पर किसी तरह से अपने आप का संभाला और उसके साथ रवाना हो गए थे ।

तब बलवंत उन लोगो के आगे आगे चल रहा ‌‌‌था और बाकी सभी पिछे पिछे चल रहे थे । जब सभी जंगल मे पहुंच गए तो उन लोगो ने भी वही देखा जो बलवंत ने समय देखा था । उस समय सेठ भी उन लोगो के पास था । तब उन लोगो ने बलवंत से कहा की भाई ये तो हमारे गाव के लोग है और सेठ इन लोगो के साथ कितनी दरिद्रता बरत रहा है ।

तब बलवंत ने कहा की गाव के लोगो के ‌‌‌सामने सेठ की बखिया उधेडनी होगी । तब जाकर लोगो को इसका काला सच पता चलेगा । बलवंत की बात सुनकर उन लोगो ने सेठ के लोगो पर हमला बोल दिया और वहां से अपने लोगो को आजाद कर कर सेठ को बंदी बना कर गाव मे ले आए थे ।

जब गाव मे ‌‌‌लोगो ने सेठ को बंदी बनाया देखा तो गाव के लोगो का होस उड गया था । तब बलवंत और उनके साथ जो ‌‌‌लोग थे उन्होने सेठ के बारे मे लोगो को बताया । तब लोगो को यकिन नही हुआ की सेठ जंगल मे जो भी जाता है उसे मार देता है । तभी बलवंत ने उन लोगो को अपने पास बुलाया जो जंगल गए थे और सेठ ने उन्हे पकड लिया था ।

जब उन लोगो को गाव के लोगो ने देखा तो वे और हैरान हो गए थे । तब उन लोगो ने सेठ के बारे मे लोगो ‌‌‌को उसका राज बताया था । सेठ के बारे मे उसकी गुप्त बात या उसके राज को जान कर लोगो ने उसे पत्थर से मार था । तभी वहां पर पुलिस आ गए थी । और पुलिस ने उसे जानवरो को मारने के जुर्म मे पकड लिया था ।

तब पुलिस और लोगो ने बलवंत और उसके साथियो से कहा की आप लोगो ने सेठ की बखिया उधेड कर हमारी ‌‌‌बहुत बडी मदद की है । इस तरह से बलवंत और उन लोगो को फिर गाव के साथ साथ शहर मे भी बहुत समान मिला । इस तरह से आप समझ गए होगे की इस कहानी से मुहावरे का क्या मतलब निकलता है ।

बखिया उधेड़ना मुहावरे पर निबंध || bakhiya udhedna essay on idioms in Hindi

साथियों जैसा की आपने अभी अभी उपर एक कहानी को पढा था जिसमें एक ज्ञानी सेठ होता है जो की अपने ज्ञान का उपयोग कर कर कुछ ऐसा काम करने लग जाता है जो की असल में सही नही होता है । मतलब वह जंगल ओर जंगल के जानवरो को नुकसान पहुंचाने लग जाता है ।

मगर तभी कहानी में बलवंत के बारे में बताया जाता है जिसने सेठ का पीछा किया और सेठ को पकड़ कर उसका राज लोगो के सामने रख दिया जिसके कारण से पुलिस भी वहां पर आ जाती है और सेठ को पकड़ लेती है । क्योकी जंगल के जानवरो को नुकसान पहुंचाना असल में जुर्म है और यही देख कर बलवंत ने सेठ को पकड़ा दिया और तभी लोगो के द्वारा कहा जाता है की बलवंत और उसके साथियों ने सेठ की bakhiya udhed दी । क्योकी बलवंत और उसके साथियो ने तो सेठ का गुप्त भेदा खोला था तो इसका मतलब यह होता है की कहानी में बताया जा रहा है की bakhiya udhedna muhavare ka arth- ‌‌‌गुप्त भेद या राज खोलना होता है और आप इसे समझ सकते है ।

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