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आँखे फटी रह जाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य में प्रयोग व निबंध

आँखे फटी रह जाना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है

आँखे फटी रह जाना मुहावरे का अर्थ aankh fati rah jana muhavare ka arth – आश्चर्यचकित रह जाना

आँखे फटी रह जाना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त आँखे फटी रह जाना  मुहावरे का आश्चर्यचकित रह जाना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
आँखे फटी रह जाना  – आश्चर्यचकित रह जाना ।
आँखे फटी रह जाना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है

आँखे फटी रह जाना  मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो मनुष्य की आंख बहुत ही सुन्दर होती है साथ ही वह समय के अनुसार दुख व खुशी को भी जाहिर ‌‌‌करती है । इसके अलावा शरीर की हर हलचल को आखो के जरीय पहचाना जा सकता है। इसी तरह से जब ‌‌‌किसी व्यक्ति की आंख कुछ समय के लिए पूरी खुली रह जाती है तो यह आंख फटी हुई कहा जाता है ।

इस तरह से आंख तब ही फटी रहती है जब कोई ऐसी बात सुन लेता है जिसकी उसे आसा न हो यानि सरल भाषा मे जब व्यक्ति आश्चर्यचकित हो जाता है या आश्चर्यचकित रह जाता है तब इसे आंख फटी रह जाना कहा जाता ‌‌‌है ।

आंख फटी रह जाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग aankh fati rah jana muhavare ka vakya me prayog

अनामीका की बात सुन कर सुरेश की आंख फटी रह गई ।

जब मैंने मुस्कान के मुह से सुना की गाव मे कोरोना ने एक व्यक्ति की जान ले ली तो मेरी आंख फटी रह गई ।

रवीप्रकाश जैसे नीठले ‌‌‌लडके को जब मैंने पढते देखा तो मेरी आंख फटी रह ‌‌‌गई ।

आंख फटी रह जाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग aankh fati rah jana muhavare ka vakya me prayog

कोरोना ‌‌‌मे सभी कारोबार बंद थे मगर दो रूपय वाले मास्क ने बाजी मार ली यह देख कर सभी कारोबारी की आंख फटी रह गई ।

किशोर ने पांचवी कक्षा बडी ही मुश्किल से पास की थी और आज उसकी नोकरी लगने की बात सुन कर रामू की आंख फटी रह गई ।

जब पिता को पता चला की उसका बेटा शहर के कुछ मुजरीमो ‌‌‌को पकडा कर पुलिस की साहयता की है तो पिता की आंख फटी रह गई ।

आंख फटी रह जाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग aankh fati rah jana muhavare ka vakya me prayog

मैं एक दिन ऐसा काम करूगा की आपकी आंख फटी रह ‌‌‌जाएगी ।

डाकूओ से रामू को अकेले ही लडते देख कर गाव के लोगो की आंख फटी रह गई ।

सुसिला के मुंह से ज्ञान की बात सुन कर मेरी तो आंख फटी रह गई ।

आंख फटी रह जाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग aankh fati rah jana muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌जब लोगो को पता चला की रामलाल के घर मे खजाना निकला है तो लोगो की आंख फटी रह गई ।

इतना रूपया कभी भी नही देखा साहब मेरी तो आंख फटी रह गई ।

निलम के पति के पास इतना रूपया था की देखते ही आंख फटी रह गई ।

लोटरी निकलने की खबर पा कर मैरी आंख फटी रह गई  ।

आंख फटी रह जाना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग aankh fati rah jana muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌आंख फटी रह जाना मुहावरे पर कहानी aankh fati rah jana muhavare par kahani

एक बार की बात है किसी नगर मे गिरधारीलाल नाम का एक आदमी रहा करता था । गिरधारीलाल  बहुत ही नेक दिल और अपना एक छोटा सा कारोबार करने वाला गरीब व्यक्ति । यानि गिरधारीलाल के पास खेत था उसमे वह सब्जिया उगाता था साथ ही उन सब्जियो को गाव मे बेचने के लिए चला ‌‌‌ जाता ‌‌‌था ।

इस तरह से गिरधारीलाल का घर चल जाया करता था । अब गिरधारीलाल की घर की बात करते है उसके घर मे उसकी पत्नी व एक बेटी रहा करती थी । इसके अलावा उसके घर में और कोई नही था । जिसके कारण से गिरधारीलाल ने बपनी बेटी को पढाई करने के लिए विधालय भेज दिया ।

तब गिरधारीलाल की बेटी ने दसवी कक्षा तक ‌‌‌ही पढाई की थी । परन्तु दसवी कक्षा पास करने मे भी उसे तिन वर्ष लग गए । यह देख कर गिरधारीलाल को लगने लगा की बेटी तो नोकरी लग कर मेरा नाम रोसन नही करेगी । क्योकी जो कोई इतनी बार किसी कक्षा मे फैल हो जाता है वह कमजोर होता है ।

जिसके बाद मे गिरधारीलाल ने अपनी बेटी को आगे नही पढाया । ‌‌‌अब आगे पढाई न करने पर गिरधारीलाल की बेटी अपने घर मे आराम से रहती और इधर उधर पडोसीयो के घर कुछ समय के लिए चली जाया करती थी। 

यह देख कर गिरधारीलाल ने अपनी बेटी से कहा की बेटी इस तरह से किसी के घर मे नही जाते । मगर वह नही सुन रही थी जिसके कारण से गिरधारीलाल ने उसे रोजाना सुनाना शुरू कर दिया ‌‌‌।

अब गिरधारीलाल की भडास निकलने लगी थी क्योकी उसने अपनी बेटी से बहुत आस की थी और वह पढाई करने का नाम तक नही ले रही थी । इस तरह से रोजाना सुनने के कारण भी वह पढाई नही करना चाहता था । मगर एक दिन गिरधारीलाल की पत्नी बिमार पड गई ।

उस दिन गिरधारीलाल अपने गाव मे नही था जिससे उसकी बेटी ‌‌‌उसे अस्पताल लेकर चली गई । क्योकी अस्पताल जाने पर पैसे लगने लगे तो बेटी को समझ मे आया की उसके पास पैसे नही है । साथ ही उसे समझ मे आया की उसकी कोई बात तक नही सुन रहा है और इधर उसकी मां बिमार पडी है ।

यह सब देख कर गिरधारीलाल की बेटी बहुत उदास महसुस कर रही थी । मगर कुछ समय के बाद मे एक नर्स ने उसकी ‌‌‌मां को ‌‌‌देखा और उसका इलाज कर दिया । मगर इलाज के लिए उस नर्स ने पैसे मागे तो गिरधारीलाल की बेटी ने कहा की मेरे पास पैसे नही है ।

यह सुन कर नर्स उसे सुनाने लगी और कहा की पैसे नही है तो यहां किस कारण से आती हो । इस तरह से बहुत बुरा भला कहा । क्योकी वह एक सरकारी अस्पताल था तो गिरधारीलाल की बेटी को ‌‌‌यह देख कर बहुत बुरा लगा ।

तब उसने ठान लिया की वह पुलिस मे नोकरी लगेगी ‌‌‌और इस तरह के लोगो के खिलाफ कार्यवाही करेगी । यह सोच कर अगले दिन से सुबह चार बजे उठ कर गिरधारीलाल की बेटी दौड़ने के लिए चली गई । और जब गिरधारीलाल उठा तो उसने अपनी पत्नी से कहा की जरा बेटी को जगा दो । तब उसकी पत्नी ने उसे बताया की वह कब का उठ चुकी है ।

 यह सुन कर ‌‌‌गिरधारीलाल को यकिन नही हुआ । तब वह उसके कमरे मे जाकर देखने लगा । मगर उसे वहां पर उसकी बेटी नही मिली । तब गिरधारीलाल ने अपनी पत्नी से पूछा तो पत्नी ने कहा की बेटी दौड़ने के लिए गई है ।

यह सुन कर फिर से गिरधारी को यकिन नही हुआ । मगर अगले दिन गिरधारी ने स्वयं ही बेटी को दौड़ते देखा और रात ‌‌‌को बहुत समय तक पढाई करते देखा । यह देख कर गिरधारीलाल आश्चर्यचकित रह गया ।

तब उसने इस बारे मे अपनी पत्नी से कहा की यह कभी भी पढाई करना नही चाहती थी और आज पढ रही है आखिर बात क्या है । तब उसकी पत्नी ने कहा की मुझे भी उसने कुछ नही बताया ।

इसी तरह से फिर गिरधारीलाल की बेटी पुलिस की तैयारी करती ‌‌‌रही । और जैसे ही उसे एक वर्ष हुआ और पुलिस का पेपर देने के लिए गई तो उसी समय नोकरी के लिए ‌‌‌चुन ली गई  थी । यह खबर जब गिरधारीलाल के पास पुहची तो उसकी आंख फटी रह गई ।

तभी कुछ समय के बाद मे इस बारे मे गाव के लोगो को पता चलता गया । जब इस बारे मे गिरधारीलाल की बेटी के सहपाठियो ने सुना तो ‌‌‌उनकी आंख भी फटी रह गई । क्योकी अभी तक उनमे से कोई भी नोकरी नही लगा था ।

तब उन सभी को उनके मां बाप कहने लगी को जो लडकी दसवी मे तिन बार फैल आ गई वह नोकरी लग गई मगर तुमसे नही लगी जा रही । इस तरह से जब गिरधारीलाल की बेटी नोकरी करने लगी तो सबसे पहले वह उसी अस्पताल मे गई और वहां की व्यवस्था ‌‌‌देखने लगी ।

तब उस नर्स ने उसे पहचाल लिया । मगर नर्स अब कुछ नही बोल रही थी क्योकी अब वह बोलती तो वह कष्ट मे पड जाती । इस तरह से फिर गिरधारीलाल की बेटी अच्छी जोब करने लगी ।

जिसके कारण से गिरधारीलाल का जीवन सुधरता चला गया । इस तरह से आपको इस कहानी से समझ मे आ गया होगा की इस मुहावरे का ‌‌‌अर्थ क्या है ।

आंख फटी रह जाना मुहावरे पर निबंध aankh fati rah jana muhavare par nibandh

साथियो जिस तरह से उपर कहानी मे बताया गया की गिरधारीलाल अपनी बेटी को पढते देख कर आश्चर्यचकित रह गया और उसकी नोकरी की खबर पाने पर भी वह आश्चर्यचकित रह गया था ।

साथ ही उसके सहपाठियो के साथ भी ऐसा ही हुआ था । इसी तरह से लोगो के जीवन मे ‌‌‌कभी न कभी ऐसा होता ही है । ऐसा इस कारण से होता है क्योकी जिस बात की लोग आसा नही करते है और वही बात हो जाती है तो सभी चोक जाते है और इस तरह से चोकते समय उनकी आंख कुछ समय के लिए खुली ही रहती है ।

जब इसी तरह से बार बार होने लगा तो लोग इसे आंख फटने के नाम से जानने लगे । और इसी तरह से निरन्तर ऐसा ‌‌‌होता रहा तो आश्चर्यचकित होने ‌‌‌को आंख फटी ‌‌‌रह जाना कहा जाने लगा ।

क्योकी उपर कहानी मे बताए अनुसार ही चोक जाने या दंग रह जाने पर ही इस मुहावरे का प्रयोग होते हुए आंख फटी रह जाना कहा जाता है तो इस मुहावरे का अर्थ ‌‌‌आश्चर्यचकित हो जाना होता है । ‌‌‌इस तरह से इस मुहावरे का अर्थ आश्चर्यचकित होना होता है ।

आँखे फटी रह जाना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of aankh fati rah jana in Hindi

दोस्तो आपने देखा होगा की जब हमारे साथ कुछ ऐसा होता है जिसके होने की हमे आशा नही होती है तो ऐसे में हम आश्चर्यचकित रह जाते है । कहने का मतलब है की जब भी मानव आश्चर्यचकित रह जाता है तो उस समय ऐसा बहुत बार होता है की मानव के सामने जो कुछ होता है वह उसे एक टक देखते ही रह जाता है । मतलब बिना पलक झपकाए ही वह सब कुछ देखते रह जाता है ।

और इस समय ऐसा लगता है की मानो आंखे एक स्थान पर रूक गई है । क्योकी यह सब आश्चर्यचकित रह जाने के समय ही होता है तो इस बात का मतलब हुआ की aankh fati rah jana muhavare ka arth – आश्चर्यचकित रह जाना होता है । और जहां पर भी आश्चर्यचकित रह जाने की बात होती है वही पर इस मुहावरे का सिधे रूप में प्रयोग किया जाता है जो की आप समझ चुके है ।

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