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अंगूर खट्टे होना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

अंगूर खट्टे होना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

अंगूर खट्टे होना मुहावरे का अर्थ angoor khatte hona muhavare ka arth – जब कोई वस्तु मिले तो उस वस्तु को ही खराब बताना

दोस्तो आज के समय मे नोकरी की तैयारी करने वाले लोगो की सख्या मे कोई कमी नही है । और इस तरह के बिच मे जब किसी व्यक्ति को नोकरी नही मिलती तो वह बाहने बना कर उस ‌‌‌नोकरी को ही गलत ‌‌‌बताने लग जाता है और कहता है की मैं वह नोकरी करना ही नही चाहता वरना कब मैं उस नोकरी मे लग जाता । इस तरह से जब उस व्यक्ति को वह नोकरी नही मिले तो वह उस नोकरी को ही खराब कहने लग जाता है । ‌‌‌इस तरह से किसी भी कार्य मे करने को ही अंगूर खट्टे होना कहा जाता है ।

अंगूर खट्टे होना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

‌‌‌अंगूर खट्टे होना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • जब तिन बार भी दसवी पास नही हुई तो राजेश कहने लगा की जीवन मे दसवी कक्षा पास करना ही सब कुछ नही होता तब उसके दोस्त उससे कहने लगे तुम तो अंगूर खट्टे होने वाली बात कर रहे हो ।
  • तुमसे एक वक्त का खाना लाया नही जाता और अंगूर खट्टे होने की बात कर रहे हो ।
  • ‌‌‌जब महेश का नोकरी मे नम्बर नही आया तो महेश कहने लगा की जीवन मे नोकरी ही सब कुछ नही होती । इसे कहते है अंगूर खट्टे होना ।
  • ‌‌‌इतनी बार प्रयास करने के बाद तुम कह रहे हो की इस काम मे कोई फायदा नही है यह तो अंगूर खट्टे होने वाली बात हो गई ।
  • जब नोकरी नही मिली तो तुमने अंगूर खट्टे होने वाली बात कर दी ।
  • तुमसे कोई काम होता नही और अंगूर खट्टे होने वाली बात करते रहते हो ।
अंगूर खट्टे होना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

‌‌‌अंगूर खट्टे होना मुहावरे पर कहानी muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक माली रहा करता था । उसके पास बहुत जमीन थी जिस पर उसने तरह तरह के पेढ लगा रखे थे । इस तरह से वह एक बाग बन गया था । उस माली ने अपने बाग मे अनेक तरह के पेड लगा रखे थे जैसे आम, अंगूर, निबू और भी बहुत पेड थे ।

उन सभी पेडो की ‌‌‌खुशबू के कारण से आस पास का वातावरण महकता रहता था । उस माली के गाव के नजदीक एक जंगल हुआ करता था । उस अंगल मे एक लोमडी रहा करती थी । जो प्रतिदिन अपना पेट भरने के लिए गाव की तरफ आ जाया करती थी । लोमडी को आते देखकर गाव के लोग भी उसे रोटी और अनेक फल दे देते थे ।

जिन्हे खा कर वह लोमडी वापस अपने ‌‌‌स्थान पर चली जाया करती थी । यानि वह जंगल मे चली जाया करती थी। माली भी बहुत दयालू था वह भी कभी कभार लोमडी को खाने के लिए अंगूर जैसे फल दे दिया करता था । जिन्हे वह लोमडी खा लिया करती थी ।

इस तरह से माली और लोमडी के बिच मे प्रेम बन गया था । और जब भी वह लोमडी माली के बाग मे आती तो उसका नुकसान ‌‌‌नही किया करती थी । इसी तरह से एक दिन की बात है गर्मी का महिना था ।

उस दिन सभी अपने अपने घरो मे बैठे आराम कर रहे थे । उस दिन लोमडी जंगल से बहुत समय बित जाने के बाद गाव की तरफ आई । जंगल गाव से कुछ दुरी पर था इस कारण से जब तक लोमडी गाव के निकट पहुची तब तक लोमडी को बहुत अधिक प्यास और भुख ‌‌‌लग गई थी ।

धिरे धिरे लोमडी गाव के ‌‌‌घरो के चारो और फिरने लगी थी पर उसे कोई भी अपने घर से बाहर फिरते हुए नही दिख रहा था । इस तरह से फिरते हुए वह लोमडी उस माली के बाग के पास जा पहुंची ।

तब उसने बाग मे भी बहुत देर तक ‌‌‌देखा पर गर्मी तेज होने के कारण से लोमडी को वह माली दिखाई नही दे रहा था । ‌‌‌कुछ समय तक लोमडी इधर उधर देख रही थी पर उस समय उसे बहुत अधिक भुख और प्यास लग रही थी ।

इस कारण से वह अपने आप को नही रोक पाई और माली के बाग ‌‌‌के अंदर पहुंच गई थी। बाग मे जाने के बाद उसे सबसे पहले अंगूर का पेड दिखाई दिया । तब लोमडी को लगा की अंगूर खाने से उसकी भुख भी मिट जाएगी और उसकी प्यास ‌‌‌भी मिट जाएगी ।

ऐसा सोच कर लोमडी अंगूर तोडने के लिए अंगूर की तरफ एक छलाग लगाई पर अंगूर नही टुटे बल्की लोमडी ही निचे पड गई थी । तब फिर लोमडी ने हिम्मत की और फिर ऐसा किया । इस तरह से चार बार कोशिश करने के बाद वह माली आ गया और उसने देखा की लोमडी अंगूर तोडने की कोशिश कर रही है । ‌‌‌

तब माली ने सोचा की देखते है की यह कितनी बार कोशिश करती है और अंगूर तोड लेती है की नही । ऐसा सोच कर माली ‌‌‌दूर खडा होकर लोमडी को देखने लगा था । तब लोमडी फिर से कोशिश करने लगी थी ।

इस तरह से दस पन्द्रह बार कोशिश करने के बाद जब अंगूर नही टुटे तो लोमडी निरास होकर वहां से जाने लगी । तब माली ने ‌‌‌लोमडी को आवाज लगाई और कहा की रूको जरा । तब माली की आवाज सुन कर लोमडी रूक गई ।

माली उसके पास जाकर पूछने लगा की क्या हुआ अंगूर नही तोड रही हो । तब लोमडी ने अपनी कमजोरी छुपाने की कोशिश की और माली से कहने लगी की मैं अंगूर नही खाउगी क्योकी अंगूर खट्टे है ।

इस तरह से लोमडी की बाते सुन कर माली हंसने ‌‌‌लगा और फिर लोमडी से कहा की तुम अपनी कमजोरी छुपाने के लिए ही ऐसा कह रही हो । तब लोमडी ने फिर कहा की नही अंगूर खट्टे है इसी कारण से मैं इन्हे नही तोड रही हुं वरना कब का इन्हे तोड कर खा लेती ।

तब माली ने कहा की मैं भी तुम्हारी कोशिश को देख रहा था और जब तुमसे अंगूर नही टुटे तो तुम बाहने बनाकर ‌‌‌अंगूर को ही खट्टे बता रही हो । इतना कह कर माली ने उस लोमडी को अंगूर तोड कर दे दिया । तब कुछ समय सोचने के बाद लोमडी ने अंगूर ले लिए और वही पर अपना पेट भरने लगी ।

जब लोमडी का पेट भर गया तो वह माली को धन्यवाद कह कर वहां से चली गई । इस तरह से फिर माली इस बात को फेलाने लगा ‌‌‌ ।  जिसके कारण से जब कोई अपनी कमजोरी छुपा कर सामने वाले को ही गलत बताने लग जाता तब अंगूर खट्टे होना मुहावरे का प्रयोग किया जाने लगा । इस तरह से इस मुहावरे का अर्थ जब कोई वस्तु न मिले तो उस वस्तु को ही खराब बताना होता है ।

अंगूर खट्टे होना मुहावरे पर निबंध || essay on idioms in Hindi

दोस्तो अंगूर के बारे में हम सभी जातने है क्योकी हमने भी कभी न कभी खाए है । वैसे अंगूर की बैल पर जब अंगूर लगते है तो उसे तोड़ कर बाजार में बेच दिया जाता है और उसे खरीद कर हम खाने लग जाते है ।

इस तरह से अंगूर को खाना काफी मजेदार होता है और बहुत बार मैंने भी अंगूर को खाया है । अगर आपने भी अंगूर को खाया है तो देखा होगा की यह काफी मिठे होते है और अपने इसी गूण के कारण से अंगूर काफी अधिक खरीदे जाते है ओर लोग इसे खाना भी काफ पसंद करते है ।

मगर कुछ लोग ऐसे होते है जब उन्हे वह वस्तु नही मिलती है तो उसी वस्तु को खराब बताने लग जाते है । जैसे की अंगूर न मिलने पर यह कह दिया जाए की नही अंगूर तो खट्ठे है इस कारण से मै इसे नही खाउगा । तो इसका मतलब हुआ की जब कोई वस्तु न मिले तो उस वस्तु को ही खराब बताना और असल में यही इस मुहावरे का अर्थ होता है ओर यह आप समझ सकते है ।

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