कलेजे का टुकड़ा मुहावारे का अर्थ kaleje ka tukda muhavare ka arth – अत्यधिक प्यारा होना ।
दोस्तो मां एक ऐसी स्त्री होती है जिसके लिए उसके हर बटे प्रिय होते है । वह अपने सभी बेटो को समान प्यार करती है । फिर कभी किसी मां के ऐसा बेटा हो जो गोरा न होकर अत्यधिक काला होता है तब भी वह बेटा उस मां के लिए तो सुंदर ही होगा और वह उसे बहुत प्यारा होता है । इस तरह से जब कोई किसी को अत्यधिक प्यारा होता है तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

कलेजे का टुकड़ा मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence
- सुसिला दिखने मे तो डायन जैसी है पर वह अपने मां के लिए कलेजे का टुकडा है ।
- तुम इसे कुछ नही कह सकते यह मेरे कलेजे का टुकडा है ।
- भला अपने कलेजे के टुकडे को मैं कैसे दूर जाने दे सकती हूं ।
- तुमने मेरे कलेजे के टुकडे को मार कर अच्छा नही किया मैं तुम्हे सजा दिलाकर रहुगी ।
- जब संजना को मार पडने लगी तो उसकी मां ने कहा की आप इसे क्यो मार रहे है यह तो मेरे कलेजे का टुकडा है ।
- अपने कलेजे के टुकडे को बचाने के लिए हर कोई मुसीबत झेलने को तैयार है ।
- सुरज तुम्हारा बेटा नही है फिर भी तुम इसे कलेजे के टुकडे की तरह अपने पास रखती हो ।

कलेजे का टुकडा मुहावरे पर कहानी muhavare par kahani
प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक सेठ रहा करता था । सेठ के पास पैसो की कोई कमी नही थी वह जीतने चाहता उतने पैसे कमा सकता था । हालाकी यह एक दिन मे तो मुमकिन नही हो पाता था पर समय के साथ पैसे कमाए जा सके है ।
सेठ के घर मे उसकी पत्नी और एक बेटी व ऐक बेटा रहा करते थे । सेठ की पत्नी बहुत ही अच्छी थी वह किसी से कोई मलतब नही रखती थी । बल्की अपना काम करती और आराम किया करती थी ।
- सरल भाषा में समझे, नाक पर मक्खी न बैठने देना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
- दूध के दांत न टूटना मुहावरे का मतलब व वाक्य मे प्रयोग
- ठन ठन गोपाल का अर्थ, वाक्य मे प्रयोग और कहानी
- तिलमिला उठना मुहावरे का मतलब व वाक्य मे प्रयोग व निबंध
- आसमान टूट पडना मुहावरे का मतलब, वाक्य व कहानी
सेठ की पत्नी अपने बेटो को हमेशा ही सिने से लगा कर रखती थी । धिरे धिरे सेठ का बेटा व बेटी पांच छ वर्ष के हो गए थे । तब एक दिन की बात है अचानक सेठ की पत्नी के सिने मे दर्द होने लगा था ।
तब तो उसने अपने पति को इस बारे मे नही कहा और जब रात होने लगी तो फिर वह दर्द होने लगा था । पर इस बार दर्द इतना तेज था की सेठ की पत्नी रोने लगी थी । पत्नी को रोते देख कार सेठ तुरन्त उसके पास आया और पूछा की वह किस कारण से रो रही है ।
तब उसने अपने पति को सारी बात बताई । जब सेठ को चल गया की इसके सिने मे दर्द हो रहा है । तब सेठ तुरन्त ही शहर के लिए रवाना होने के लिए साधन ले आया और फिर अपनी पत्नी को अपने साथ लेकर शहर चला गया था ।
साथ ही इस बारे मे उसने अपनी पत्नी के भाई को बता दिया था । जिसके कारण से सेठ की पत्नी और पत्नी का भाई तिनो हॉस्पिटल मे जा पहुंचे । जब डॉक्टर ने जाच पडताल की तो पता चला की सेठ की पत्नी को दो हार्ट अटैक आ गए है ।
अगर एक और आ गया तो इसकी मृत्यु हो जाएगी । इस कारण से सेठ ने इसका इलाज पूछा तो डॉक्टर ने बता दिया की वह फल फ्रुट खाए और किसी बात की टेंसन न ले । इतना कह कर डॉक्टर ने कहा की आप चाहो तो यहां पर इसे रख सकते हो या घर ले जा सकते हो ।
तब सेठ ने अपनी पत्नी को हॉस्पिटल मे ही रखने का फैसला लिया था । इस फेसले से सेठ के साले को भी सही लग रहा था । धिरे धिरे दस दिन ही बिते थे की सेठ की पत्नी को फिर से हार्ट अटैक आया जिसके कारण से उसकी मृत्यु हो गई थी ।
जब सेठ की पत्नी मर गई तो वह बहुत ही दुखी हो गया था और इस खबर के बारे मे सेठ के साले ने अपने घर वालो को बता दिया था । जिसके कारण से जैसे ही सेठ अपनी पत्नी को घर लेकर गया तब पत्नी के घर वाले भी वहां पर आ गए और जोर जोर से विलाप करने लगे थे ।
यह सब देखकर सेठ के बेटा बेटी भी रोने लगे थे । तब सेठ की साली उन दोनो के पास गई और उन्हे कलेजे के टुकडे की तरह अपने सिने से लगा लिया और उन्हे चुप कराने लगी । धिरे धिरे समय बितता गया तो सेठ ने अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार कर दिया था ।
फिर वे एक महिने तक तो बहुत ही अधिक रहे पर तिन महिने बित जाने के बाद सेठ के साले ने उससे कहा की आप मेरी बहन से शादी कर ले । वह बहन सेठ की साली थी । तब सेठ नही माना तो सेठ के साले ने उसे बहुत समझाया तब सेठ ने कहा की मैं पहले आपकी बहन से बात करना चाहता हूं ।
जब सेठ ने उससे बात की तो उसने कहा की इन बच्चो के लिए हमे शादी करनी ही होगी । ऐसा कहते हुए समय के साथ उन दानो ने शादी कर ली थी । सेठ ने दुसरी शादी कर कर अपनी पत्नी को अपने घर ले आया था ।
इस कारण से उन बच्चो की मोसी ही उनकी मां की तरह देखभाल करने लगी थी । शादी हुए एक ही महिना हुआ था की एक दिन सेठ किसी बात के लिए उन दोनो को डाट रहा था । तब सेठ की पत्नी ने कहा की आप क्यो इन्हे डाट रहे हो ।
ऐसा कहते हुए सेठ की पत्नी ने कहा की ये मेरे कलेजे के टुकडे है आप इन्हे कुछ भी नही कह सकेते हो । इस तरह से फिर जब भी सेठ उन दोनो को डाटता तो वे दोनो अपनी मोसी के पास चले जाते और मोसी उन्हे बचा लेती थी।
यह सब देखकर सेठ को भी बहुत अच्छा लगता था की यह मेरे बेटे को अपना बेटा समझने लगी है । धिरे धिरे समय बित गया और अब सेठ के घर मे एक और बेटा हो गया था । इस कारण से सेठ को लग रहा था की अब मेरे बेटे व बेटी को यह इतना प्यार नही देगी ।
पर सेठ गलत था अब भी जब सेठ उन दोनो को डाटता तो सेठ की पत्नी उन्हे बचा लेती थी । यह सब सेठ भी देखता और गाव के लोग भी देख लेते तो कहते की सेठ की दुसरी पत्नी तो बहुत ही अच्छी है वह सेठ के बेटो को अपने कलेजे का टुकडा मानती है।
साथ ही कहते की वह अपने बेटे का इतना ध्यान नही रखती है जितना उन दोनो का रखती है । इस तरह से फिर सेठ की पत्नी उन बच्चो की देखभाल बडी अच्छी तरह से करती थी और अपना वे जीवन गुजाने लगे थे । इस तरह से आप समझ गए होगे की इस कहानी से मुहावरे का अर्थ क्या है ।
कलेजे का टुकड़ा मुहावारे पर निबंध || kaleje ka tukda essay on idioms in Hindi
दोस्तो कहा जाता है की आज के इस दुनिया में सभी मतलबी लोग होते है । मगर आपको बता दे की कुछ ऐसे भी होते है जो की हमेशा अपने पास रहने वाले को काफी प्यार करते है मगर उसका अहसास कम होने देते है ।
जैसे की आपको पता है होगा की माता पिता जो होते है वे इस लिस्ट में सबसे उपर होते है । क्योकी माता पिता अपनी संतान से इतना प्रेम करते है की कोई कर तक नही सकता है और यह बात सच भी होती है।
अगर आपको यह अहसास करना है तो आप काफी दिनो तक अपने माता पिता से दूर रहो और अचानक से उनके पास आ जाओ । अब आपको जो देखने को मिलेगा वह काफी होगा की आपको यह समझा देगा की माता पिता सच में अपनी संतान से काफी प्रेम करते है । और इस तरह से बहुत अधिक प्यार करना ही असल में इस मुहावरे का अर्थ है। क्योकी आपने इस बारे में पढा है की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ओर कहानी कैसी है तो आप इसे समझ सकते है ।