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कसौटी पर कसना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

कसौटी पर कसना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

कसौटी पर कसना मुहावरे का अर्थ kasauti par kasna muhavare ka kya arth – अच्छी तरह से परखना

दोस्तो जब भी कोई व्यक्ति किसी वस्तु को खरीद कर ‌‌‌लाता है तो वह उस वस्तु को अच्छी तरह से जाच पडताल करता है की यह वस्तु अच्छी है की गठिया । साथ ही इस बारे मे वह किसी से पूछ भी लेता है । ‌‌‌जब उसे पता चल जाता है की यह वस्तु बहुत ही अच्छी है तब जाकर वह उसे खरीद कर अपने घर लाता है । इस तरह से जब कोई व्यक्ति किसी भी कारण से किसी को भी अच्छी तरह से परखता है तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

कसौटी पर कसना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

‌‌‌कसौटी पर कसना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • राजेश जैसे ही रात को अपने घर पर आया उसके माता पिता ने उसे कसौटी पर कस लिया ।
  • गिरधारी राम को उसके चाचे ने कसौटी पर कस कर गोद ले लिया ।
  • महेश तो है ही ऐसा वह हर किसी को कसौटी पर कसने लग जाता है ।
  • प्रताब को अपने बेटे पर भी विश्वास नही है ‌‌‌तभी तो वह अपने बेटे को कसौटी पर कसता रहता है ।
  • तुमने ही मरे पैसे चुराए थे मुझे पता था इसी कारण से तो मैंने तुम्हे कसौटी पर कसा ।
  • अगर आप को मुझ पर विश्वास नही है तो मुझे कसौटी पर कस कर देख लो ।
  • ‌‌‌महेश जब भी कोई वस्तु शहर से लाता है तो पहले उसे कसौटी पर कस कर देखता है ।
कसौटी पर कसना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी

कसौटी पर कसना मुहवरे पर कहानी muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है राजवीर नाम का एक आदमी अपने भाई बहन के साथ रहा करता था । साथ ही उसके माता पिता भी उनके साथ रहते थे । जब वे सभी बडे हो गए तो राजवीर के माता पिता ने उन तिनो का विवाह कर दिया था ।

विवाह हो जाने के कारण से राजवीर की बहन अपने ससुराल मे रहने ‌‌‌लगी थी और उन दोनो भाईयो की पत्नी उनके पास रहने लगी थी । इस तरह से राजवीर के घर मे खुशी का माहोल बन गया था ।

धिरे धिरे समय बितता गया और अब राजवीर के भाई के एक बेटी हो गई थी और दोनो भाई अब अलग अलग रहने लगे थे । इस बात को कुछ ही दिन बिते थे की राजवीर की माता की मृत्यु हो गई थी ।

इस कारण से ‌‌‌राजवीर के घर मे से खुशी तो गाईब ही हो गई थी। किसी तरह से वे दिन काट कर राजवीर और उसके भाई ने अपना जीवन वापस शुरू किया था । पर अब उनके पिताजी बिमार हो गए थे ।

तब राजवीर और उसके भाई आपस मे बात करने लगे की ‌‌‌पहले तो मां चली गई और अब बापू जी बिमार हो गए है । लगता है की इस वर्ष हमे दुखो को झलना ही ‌‌‌तब राजवीर ने कहा की नही भाई सब ठिक हो जाएगा ।

इस तरह से फिर दोनो भाई एक साथ होकर अपने पिताजी की सेवा करने लगे थे । तब डॉक्टरो ने उन्हे कह दिया था की आपके पिताजी अब बच नही सकते है । साथ ही डॉक्टर ने कहा की ज्यादा से ज्यादा यह ‌‌‌एक वर्ष ‌‌‌काड देगे ।

डॉक्टर के ऐसा कहने के कारण से राजवीर ने ‌‌‌अपने पिता की खुब सेवा की थी । पर आखिर सेवा से हो क्या सकता था उनका मरना तो तय था । इस कारण से जैसे ही यह वर्ष बिता तो राजवीर के पिता की मृत्यु हो गई थी ।

इस कारण से एक महिने तक फिर वे दोनो भाई उदास होकर घर पर ही बैठे रहे थे । पर जब उनके पिता को मरे हुए ‌‌‌दो महिना हो गए तब जाकर उन दोनो के अच्छे दिन फिर से शुरू हो गए ।

तब राजवीर को ऐसा काम मिल गया की वह एक वर्ष मे ही बहुत धनवान हो गया था और अब उसने अपने घर को भी नया कर लिया था । अब कोई उसके घर को देख कर ऐसा ही सोचता था की घर हो तो राजवीर जैसा ।

पर राजवीर को एक ही समस्या था उसके घर मे अभी ‌‌‌तक किसी भी बालक का जन्म नही हुआ था । और उसके भाई के घर मे दो लडके थे और दो ही लडकिया था । धिरे धिरे राजवीर को इस तरह से काम करते हुए उम्र बित गई थी इस कारण से राजवीर के पास अब धन की कोई कमी नही थी ।

अब राजवीर के भाई के लडके भी बडे हो गए थे । इस कारण से एक दिन राजवीर के भाई ने कहा की तुम मेरे ‌‌‌एक बेटे को गोद ले लो ताकी आगे बुढापे मे कोई दिक्कत नही हो । तब राजवीर ने कहा की तुम्हारी बात तो सही है इस तरह से कहते हुए राजवीर ने कहा की मैं तुम्हारे कोनसे बेटे को गोद लूगा यह तय कर कर बताउगा ।

जब इस बारे मे राजवीर के भाई ने अपने बेटो से बात की तो उसके बडे बेटे को लालच आ गया और वह सोचने लगा ‌‌‌की मै ही उसके पास रहुगा । तभी राजवीर का छोटा बेटा बोला की पिताजी मैं तो आपकी ही सेवा करूगा मैं उनके पास नही रहुगा ।

तब राजवीर के भाई ने कहा की ठिक है पर जब वे तुम्हे गोद लेगे तो तुम्हे उनके पास ही रहना होगा । तब वह नही माना तो अंत मे राजवीर के भाई ने भी कह दिया की ठिक है हम दोनो उनके साथ रहेगे ‌‌‌।

अब अगले ही दिन से राजवीर के पास उसके भाई का बडा बेटा आने लगा था और उसकी सेवा करने लगा था । इस तरह से उसे आते हुए दस पन्द्रह दिन हो गए थे तब राजवीर ने सोचा की इसे अच्छी तरह से परखना होगा की यह मेरे पैसे के लिए मेरे पास आता है की मेरी सेवा भी करेगा । ऐसा सोच कर राजवीर उसे कभी कुछ कहता तो ‌‌‌कभी कुछ कहता ।

पर राजवीर के भाई के बडे बेटे को पता था की यह मुझे कसौटी पर कस रहा है । इस कारण से वह चुप चाप उसकी बात सुनता रहा । इस तरह से राजवीर को उसे हर ‌‌‌दिन सुनाते हुए एक महिना हो गया तब राजवीर को पता चल गया की यह मेरी देखभाला बडी ही आसानी से कर लेगा ।

तब एक दिन राजवीर ने गाव के कुछ लोगो को ‌‌‌अपने पास बुलाया और साथ अपने भाई को भी बुला लिया और उन सभी को का की मैं इसे गोद लेने जा रहा हूं इस कारण से आप सभी को बता दू की मेरे मरने के बाद जो भी मेरा है वह सब इसका होगा ।

तब गाव के लोगो ने उसे कहा की इसे पहले कसौटी पर कस कर देख लो फिर यह मत कह देना की यह अच्छा नही है । यह मेरी बात नही मानता ‌‌‌है । तब राजवीर ने कहा की मैंने इसे परख कर देख लिया है यह मेरी सेवा कर लेगा ।

तब गाव के लोगो ने भी उसे गोद लेने के लिए कह दिया और फिर राजवीर के भाई ‌‌‌का बडा लडका ही राजवीर की सेवा करने लगा था । इस तरह से जब तक राजवीर की मृत्यु नही हुई तब ‌‌‌तक राजवीर और उसकी पत्नी को वह अपने माता पिता समझ कर ‌‌‌ ‌‌‌उनकी देखभाल करता रहा । और उन दोनो के मर जाने के बाद राजवीर का सारा पैसा उसका हो गया था ।

इस कारण से वह बादमे मोज से अपना जीवन गुजारने लगा था । इस तरह से आप समझ गए होगे की इस कहानी से मुहावारे का अर्थ क्या है ।

कसौटी पर कसना मुहावरे पर निबंध || kasauti par kasna essay on idioms in Hindi

साथियों अगर आप अपने दादा दादी के पास आज बैठते है तो वे आपको एक बात कहेगे की बेटा जब भी तुम्हे कोई वस्तु अच्छी लगे और तुम चाहेा की एक अच्छी वस्तु खरीदनी है तो उसे खरीदने से पहले अच्छी तरह से परख लेना क्योकी बाद में अगर वह वस्तु घटिया निकली तो कुछ हो नही सकता है ।

और इसी कारण से आज भी जब हम सभी कुछ बाजर से लेकर आते है तो लेने से पहले उस वस्तु को अच्छी तरह से परखते है और फिर उसे खरीदते है।

और इस तरह से जब कुछ अच्छी तरह से परखा जाता है तो इसे कसौटी पर कसना कहा जाता है और शायद आप इस बात को समझ सकते है क्योकी आपने जो कुछ उपर पढा है जैसे की मुहावरे का अर्थ और कहानी तो आप उनसे इस मुहावरे को अच्छी तरह से समझ चुके है जिसके कारण से कसौ​टी पर कसना क्या हैयह भी जान गए है ।

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