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टका सा जवाब देना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

टका सा जवाब देना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

टका सा जवाब देना मुहावरे का अर्थ taka sa jawab dena muhavare ka arth – इनकार करना

दोस्तो जब कोई व्यक्ति किसी काम को किसी अन्य व्यक्ति से कराने की सोच कर उस व्यक्ति से मदद मागता है और वह व्यक्ति तुरन्त ही उसे कह देता है की मैं यह काम नही करूगा । इस तरह से जब कोई किसी ‌‌‌भी कारण से मना कर देता है तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

टका सा जवाब देना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

टका सा जवाब देना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence

  • ‌‌‌शादी के माहौल मे मैंने उसे एक काम करने को कहा था पर उसने तो मुझे टका सा जबाब दे दिया ।
  • बेटे की शादी कराने के लिए सरोज ने अपने भाई से बात की तो उसने तुरन्त टका सा जबाब दे दिया ।
  • महेश अपने भाई के पास पैसे मागने के लिए गया था पर उसने तो टका सा जबाब देकर खाली हाथ भेज दिया ।
  • ‌‌‌जब घर के लोग ही नोकरी लगाने के लिए टका सा जबाब देने लगे तो मेरे बेटे को नोकरी लगाएगा कोन ।
  • तुमने इस काम मे मुझे टका सा जबाब देकर अच्छा नही किया ।
  • पिताजी ने तुम्हे एक काम करने को कहा पर तुमने उन्हे टका सा जबाब दे दिया ।
  • ‌‌‌वह तो अपने घर वालो को ही टका सा जबाब दे देता है तो आप हो कोन ।
  • सुरेश ने अपने भाई को टका सा जबाब दे दिया और कहा की अपना काम स्वयं करो ।
  • जब माता ने राहुल को खेत का काम कराने को कहा तो उसने तुरन्त टका सा जबाब दे दिया और खलने चला गया ।
टका सा जवाब देना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग

‌‌‌टका सा जबाब देना मुहावरे पर कहानी muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है नन्दकिशोर नाम का एक आदमी अपनी पत्नी के साथ रहा करता था । उसके घर मे उसके दो बेटे और एक बेटी थी । नन्दकिशोर के पास पैसो की कोई कमी नही थी । ‌‌‌वह एक सरकारी ‌‌‌कर्मचारी के रूप मे ‌‌‌जहांज चलाया ‌‌‌करता था ।

 उनका काम सरकार का जो भी समान होता उसे नदी के ‌‌‌पार ले जाना और लाना था । इस तरह से काम कर कर ही वह अपने परिवार का पेट पालता था । नन्दकिशोर बहुत ही शांत स्वभाव वाला आदमी था और किसी से भी पैसे उधार नही लेता था ।

साथ ही व कानून का पूरा ध्यान रख कर ही किसी काम मे आगे बढता था । नन्दकिशोर के चार मित्र थे उन चार मित्रो मे से एक उसी के साथ ‌‌‌काम करता था और बाकी तिन उसके गाव के लोग थे उनमे से एक नोकरी लगा हुआ था और बाकी दोनो ने अपनी दुकान खोल रखी थी ।

इस तरह से नन्द किशोर के चारो मित्र भी अच्छी कमाई करते थे । फिर भी वे चारो मित्र नन्द किशोर से पैसे मागते ही रहते थे । साथ ही नन्दकिशोर उन्हे पैसे दे भी दिया करता था । इस तरह ‌‌‌उन सभी का जीवन बडी सानदार तरीके से चल रहा था ।

नन्दकिशोर की पत्नी उससे कहती की आप अपने मित्रो को इतना रूपया मत दिया करो वे भी तो काम तरते है उनके पास भी पैसे होने चाहिए । तब नन्दकिशोर अपनी पत्नी से कहता की कल हम जब हमारे बेटी बेटो की शादी करगे तो उनसे रूपया उधार ले लगे ।

धिरे धिरे समय ‌‌‌और नन्दकिशोर के ‌‌‌बुरे दिन ‌‌‌शुरू हो गए थे । क्योकी एक दिन जब वह ‌‌‌जहांज चला कर नदी के उस पार जा रहा था तो उसके अधिकारीयो ने उसे रूकने को कहा पर उसे सुनाई नही दिया जिसके कारण से वह नही रूक सका था ।

उस समय उसकी ‌‌‌जहांज मे तिन लोग थे जिनमे से एक वह स्वयं और एक उसका दोस्त बाकी बचा एक कोई अन्य व्यक्ति ‌‌‌जिसे उसके दोस्त ने रिस्वत लेकर नदी के उस पार छोड दिया था ।

 तब नन्दकिशोर का अधिकारी उन दोनो के पास आया और ‌‌‌जहांज की जाच पडताल की तो उन्हे पता चला की इस ‌‌‌जहांज मे तो गेरकानूनी समान नदी के उस पार पहुंचाया गया है ।

यह सब जान कर नन्दकिशोर के अधिकारीयो ने उन दोनो को ही नोकरी से निकाल दिया था । ‌‌‌तब नन्द किशोर ने बहुत कहा की मुझे कुछ भी नही मालूम था की वह व्यक्ति क्या ले जा रहा है साथ ही उसे मैंने इस ‌‌‌जहांज मे बेठने को नही कहा बल्की इसने कहा था ।

इस तरह से कह कर वह अपने दोस्त के बारे मे बता रहा था । तब उसके अधिकारीयो ने कहा की इस ‌‌‌जहांज को सम्भालने का काम तुम्हारा है और यह तुम्हारे से ‌‌‌पद मे छोटा है इस कारण से तुम्हे ही ध्यान रखना चाहिए था ।

इतना बता कर उन अधिकारीयो ने नन्दकिशोर और उसके दोस्त को नोकरी से निकाल दिया था । इस बात को एक वर्ष बित गया था और अब नन्दकिशोर घर पर ही बैठा था इस कारण से उसके पास जो भी धन था वह सब खर्च हो गया ।

साथ ही इतने ‌‌‌समय मे उसके घर के बेटे बेटी की शादी करने की उम्र हो गई थी । जिसके कारण से नन्दकिशोर अपने बेटे बेटी की शादी करने को तैयार हो गया था । पर शादी मे पैसे खर्च बहुत होते है ।

इस कारण से नन्दकिशोर पैसे लेने के लिए अपने दूसरे मित्र के पास गाया जो उसके गाव का था और नोकरी लगा था । जैसे ही ‌‌‌नन्दकिशोर ने उससे पैसे की बात की तो उसने टका सा जबाब दे दिया ।

जिसके कारण से निराश होकर नन्द किशोर उसके घर से आ गया था । इसी तरह से वह अपने बाकी मित्रो के पास भी गया था पर उन्होने भी उसे टका सा जबाब दे दिया । जिसके कारण से अब नन्द किशोर को पैसे लेने के लिए अपने मकान को गिरवी रखना ‌‌‌पड गया था ।

मकान गिरवी रख कर नन्द किशोर ने बहुत रूपय ले लिए और अपने बेटे और बेटी की शादी ‌‌‌बहुत ही सानदार तरीके से की । शादी हो जाने के कारण नन्दकिशोर और उसके दोनो बेटे दिनरात एक कर कर काम करने लगे थे ।

जिसके कारण से 4 वर्ष के जाते समय अपना घर वापस अपना बना सके थे । क्योकी ‌‌‌पैसे उधार बहुत अधिक लिए थे और उसका ब्याज भी बहुत अधिक होने लगा था जिसके कारण से उन्हे उन पैसो को वापस देने मे चार वर्ष लग गए ।

जब वह घर वापस उनका बन गया तब जाकर नन्दकिशोर ने चेन की सांस ली और फिर जो भी कामाई करते तो वह उनके घर मे ही रहने लगी थी । इस कारण से समय के साथ नन्द ‌‌‌पहले की तुलना मे बहुत अधिक धनवान बन गया ।

इसके बाद नन्दकिशोर अपना जीवन आराम से गुजारने लगा था । इस तरह से आप समझ गए होगे की इसम मुहावरे का अर्थ क्या है ।

टका सा जवाब देना मुहावरे पर निबंध || essay on idioms in Hindi

दोस्तो जीवन ऐसी चिड़िया का घर है जो की किसी पींजरे में बंद है इस कारण से जब तक पिंजरा बंद रहेगा तब तक यह जीवन इसी तरह से फंसा रहेगा ।

हमारे जीवन में ऐसे बहुत से लोग है जो की हमारे अपने होते है मगर जब हम उनसे मदद मागते है तो वे कई बार इनकार कर देते है । जैसे की मान ले की आपके जीवन में किसी तरह से पेसो की जरूरत पड़ जाती है या फिर किसी अन्य तरह से मदद की जरूरत है तो आप सबसे पहले अपने मित्र के पास जाते है और मदद मागते है । मगर आपको देखते ही मित्र आपसे पूछता है की आज कैसे आना हुआ मगर जैसे की आप उससे मदद मागते है तो वह तुरन्त मदद करने से मना कर देता है ।

मतलब वह आपको तुरन्त इनकार देता है तो इस तरह जो जो इनकार करता है उसे ही टका सा जबाब देना कहा जाता है और इस बात को शायद आप समझ सकते है । क्योकी आपने इस मुहावरे के बारे में इतना कुछ पढ लिया है की मुहावरे के बारे में समझ गएहोगे ।

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