मारा मारा फिरना मुहावरे का अर्थ maara maara phirna muhavare ka arth – ठोकरें खाते फिरना ।
दोस्तो आज के समय मे हर कोई अपना पेट भरने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही चाहता है जिसके कारण उसके पास पैसे आते रहे और उन पैसो से वह भोजन लोकर अपना पेट भर लेता है । इस कारण से पैसे कमाने के लिए हर कोई अलग अलग कार्य करता है ।
जिस तरह से आजकल ज्यादातर पैसे कमाने के लिए नोकरी करना चाहते है । और नोकरी पाने के लिए वे इधर उधर भटकते रहते है । या फिर यह कह सकते है की नोकरी के लिए वे ठोकरे खाते है । साथ ही ऐसा भी हो सकता है की नोकरी लग भी गया हो और अचानक नोकरी छुट जाने के कारण वह ठोकरे खाता फिर रहा हो । इस तरह से किसी भी कारण से ठोकरे खाने को ही मारा मारा फिरना कहा जाता है ।

मारा मारा फिरना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence
- आजकल हर कोई नोकरी की तलाश मे मारा मारा फिर रहा है ।
- नोकरी से निकल जाने के बाद महेश अब मारा मारा फिर रहा है ।
- पिता ने घर से निकाल दिया तो रामबाबू अब मरा मारा फिर रहा है ।
- रामप्रताब तो पहले ही मारा मारा फिर रहा था पर अब उसे नोकरी मिल गई तो उसका भाग्य खुल गया ।
- अगर बेटा नोकरी मिल जाएगी तो कम से कम मारा मारा तो नही फिरोगे ।
- मजदूरी करने के लिए हर दुसरे दिन मारा मारा फिरना पडता है ।
- अच्छा भला धनवान आदमी लोगो को कर्जा देकर अब मारा मारा फिर रहा है ।

मारा मारा फिरना मुहावरे पर कहानी Idiom story
प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे महेश नाम का एक लडका रहता था । उसके घर मे उसकी मौसी और मौसा था यानि वह अपनी मौसी के पास ही रहा करता था । हालाकी उसके माता पिता थे पर वह उनके साथ नही रहता था । जब महेश छोटा था तभी से वह अपनी मौसी के पास रहने लगा था ।
इस कारण से उन्होने ही उसे पढाया लिखाया था । वह पढाई मे बहुत ही होशियार था । उसे वह सब बातो के बारे मे पता होता था जिसके बारे मे गाव के लोगो ने सुना भी नही था । साथ ही वह पढा लिखा था इस कारण से उसे यह पता था की मैं कोनसा काम करू ताकी मै आराम से अपना पेट भर सकूं ।
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इस कारण से उसने एक दिन खुब सोचा और फिर उसने फैसला लिया की वह एक कम्पनी खोलेगा पर उसने अभी तक यह फैसला नही किया की वह किसी चिज की कम्पनी खोलगा । जब इस बारे मे उसने अपने मौसा मौसी से पूछा तो उन्होने कहा की बेटा आज के समय मे लोगो के पास पहनने को कपडे नही है और तुम कम्पनी कैसे खोल लोगे ।
उनके ऐसा कहने पर उसे लगा की जब लोगो को कपडे नही मिल रहे है तो वे काम कैसे करेगे । तभी उसने अपने मौसा जी से पूछा की लोगो के पास कपडे कैसे नही है । तब उसके मौसाजी ने कहा की बेटा आज के समय मे जो भी लोग मजदूरी करते है उनको पैसे तो मिलते ही है ।
पर वे पैसे घर खर्च मे ही पूरे हो जाते है जिसके कारण से लोग अन्य समान नही खरीद पाते है । साथ ही कपडो की किमत बहुत अधिक होने के कारण से हर कोई उन्हे नही खरीद पाता है ।
महेश ने अपने मौसा जी से ऐसी बात सुनकर कहा की फिर मौसाजी मै तो कपडे बनाने की कंपनी खोलूगा जिसमे बहुत ही सस्ते कपडे मिलेगे ताकी हर कोई उन्हे खरीद सके । ऐसा सुन कर महेश को मौसाजी ने भी कहा की तुम्हारी सोच तो सही है पर काम शुरू करने के लिए पैसे कहा से आएगे ।
तब महेश ने कहा की आप पैसो की फिकर मत किजिए वो मे किसी से लेकर आ जाउगा । इतना कह कर वह वहां से चला गया और फिर उस गाव के सेठ के पास गया और कहा की मुझे काम शुरू करने के लिए पैसे चाहिए । यह सुन कर सेठ ने कहा की पैसे तो मिल जाएगे पर इसके लिए तुम्हारी कोई जिमेदारी लेने वाला चाहिए या फिर कुछ गिरवी रखने को चाहिए ।
सेठ की बात सुन कर महेश ने कहा की आप फिर ऐसा करे की आप मुझे ही गरवी रख ले अगर मैंने आपके पैसे नही चुकाए तो आप मुझे नोकर बना लेना और मुझसे फ्री मे काम करवा लेना । सेठ को महेश की बात अच्छी लगी इस कारण से सेठ ने उसे पैसे दे दिए थे ।
पैसे लेकर महेश शहर गया और वहां पर उसने एक दुकान खरीद ली थी जो काफी अधिक बडी थी । एक दो दिनो मे उसने उस दुकान मे बाकी समान भी रखीद कर रख लिया था । अब उसके पास पैसो की कमी आ गई थी इस कारण से वह अपने दोस्त के पास गया था जिसके पिता बहुत ही अमिर थे ।
अमिर होने के कारण महेश को उसका दोस्त पैसे देने को तैयार हो गया था पर वह चाहता था की वह भी उस कंपनी मे बराबरी का भागीदा रहे । जब इस बारे मे उसने महेश से बात की तो वह मान गया और दोनो ने एक साथ होकर कंपनी शुरू कर ली थी ।
धिरे धिरे समय बितता गया और कंपनी बहुत ही मसूर होने लगी थी । पर उसमे जो भी कमाई होती थी वह महेश का दोस्त उससे हडपता रहता था । जिसके कारण हुआ यह की उन दोनो ने जो कंपनी शुरू की थी वह डुब गई ।
जब इस बारे मे उस सेठ को पता चला तो उस सेठ ने महेश से पैसे मागे तब महेश ने सेठ से कहा की मेरे पास पैसे नही है । यह सुन कर सेठ ने उसकी कंपनी अपने नाम करवा ली और कहा की जब तक पैसे नही मिल जाते तब तक यह मेरी है ।
इस तरह से महेश की कंपनी जब काफी अधिक डुब गई तो महेश ने सेठ से कहा की आप इस कंपनी मे जो भी समान है वह ले ले जिसके कारण से आपके पैसे उतर जाएगे । इस तरह से महेश ने अपनी कंपनी बेच दी थी ।
क्योकी महेश ने वह काम अकेले ही शुरू किया था और बादमे उसने अपने दोस्त को साथ मिलाया था इस कारण से उसका दोस्त उसे कुछ भी नही बोला था । कंपनी बिक जाने के कारण से महेश अब कोई और काम ढूढने लगा था ।
जब गाव के लोगो को यह पता चला की महेश ने जो काम शुरू किया था वह डूब गया और वह अब नोकरी की तलास मे इधर उधर ठोकरे खा रहा है तो गाव के लोग बात करने लगे की महेश ने अपने दोस्त को अपने काम मे भागिदार बनाया जिसके कारण से महेश की कंपनी डूब गई और अब महेश मारा मारा फिर रहा है ।
इसी तरह से जब उसे नोकरी नही मिली तो वह गाव की गलियो मे भी इधर उधर घुमने लगा था और कभी कभी शहर मे काम ढूढने के लिए जाता था । तब महेश की मौसी ने उससे कहा की बेटा इस तरह से कब तक मारा मारा फिरते रहोगे अपना जो खेत है उसमे फसल उगाओ और अपना पेट भरो ।
अपनी मौसी की बात मान कर वह फिर वह काम करने लगा था और उससे अपना पेट भर लेता था साथ ही अपने मौसा मौसी की भी मदद कर दिया करता था । इस तरह से महेश अपना जीवन फिर से गुजारने लगा था । इस तरह से आप यह समझ गए होगे की मारा मारा फिरना मुहावरे का अर्थ आखिर होता क्या है ।
मारा मारा फिरना मुहावरे पर निबंध || maara maara phirna essay on idioms in Hindi
दोस्तो मारा मारा फिरने का मतलब यह नही होता है की जोंबी बन कर फिरने लग जाए । अगर आपने पूरे लेख को पढा है तो आप इस बात को समझ सकते है की इसका अर्थ क्या है ।
आपको बता दे की जो कहानी हमने बताई जिसमें महेश था और उसने एक काम शुरु किया और दोस्तो का साथ लिया जिसके कारण से उसका जो काम था वह डूब जाता है । और फिर उसे काम की तलास और करनी पड़ती है ।
मगर काम न मिलने के कारण से वह दर दर की ठोकरे खाते फिरने लग जाता है ।
और इसी समय मारा मारा फिरने का प्रयोग हुआ है ।
तो इस बात का मतलब यह होता है की मारा मारा फिरना मुहावरे का जो अर्थ है वह ठोकरे खाते फिरना होता है और यह सब कहानी भी समझा रही है ।