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एक लाठी से हाँकना का मतलब और वाक्य में प्रयोग व मुहावरे पर कहानी

एक लाठी से हाँकना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है

एक लाठी से हाँकना मुहावरे का अर्थ ek lathi se hakna muhavare ka arth – सभी को एक जैसा समझ कर ‌‌‌व्यवहार करना ।

एक लाठी से हाँकना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त एक लाठी से हाँकना  मुहावरे का सभी को एक जैसा समझ कर ‌‌‌व्यवहार करना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
एक लाठी से हाँकना   सभी को एक जैसा समझ कर ‌‌‌व्यवहार करना ।
एक लाठी से हाँकना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है

एक लाठी से हाँकना  मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो वर्तमान मै जैसे जैसे समय बितता जा रहा है लोग पैसे वाले को बहुत ही अच्छा और गरीब को बुरा मानने लगे है । जिसके कारण से जिसके पास धन होता है ‌‌‌उसके सभी कार्य आसानी से हो जाते है । क्योकी सभी ‌‌‌उचाई निचाई की भावना ‌‌‌अपनाएं रखे है और उनके साथ अगल अलग ‌‌‌व्यवहार दर्शाते है ।

मगर जब कोई व्यक्ति किसी को भी बडा या छोटा या फिर किसी कारण से अलग न मान कर ‌‌‌हर किसी के साथ एक जैसा व्याहर दर्शाता है तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है ।

‌‌‌एक लाठी से हांकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ek lathi se hakna muhavare ka vakya me prayog

महेश जी आप तो बडे ही अच्छे है गरीबी अमीरी का जरा भी ख्याल नही करते और सभी की एक जैसी ही मदत करते हो सच है आप तो एक लाठी से हांक रहे हो ।

सुरेश तुम अध्यापक होकर नही जानते की राहुल अपने सर का बेटा है उसे अच्छे नम्बर देने है तुम तो सभी को एक लाठी से हांकना जानते हो ।

सेठ ऐसे तो कहता रहता है की वह सभी को एक लाठी से हांकता है परन्तु जब पैसो की बात आती है तो अमीरी गरीबी दिखने लग जाती है ।

‌‌‌एक लाठी से हांकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ek lathi se hakna muhavare ka vakya me prayog

किशोर बडा ही लालची है पैसो के ‌‌‌मामले मे वह एक लाठी से हांकने वाला नही है ।

बेटे और बाप का तो ख्याल करना ही चाहिए ऐसे ही सभी को एक लाठी से ‌‌‌हांक रहे हो‌‌‌गे तो कैसे चलेगा ।

थानेदार ने सभी मुजरीमो को एक लाठी से हांक कर जैल में बंद कर रखा है ।

‌‌‌एक लाठी से हांकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ek lathi se hakna muhavare ka vakya me prayog

मां अपने सभी बच्चो को एक लाठी से हांक कर ही कोई वस्तु देती है ।

महेश और सुरेश को लडाई करते देख कर अध्यापक ने दोनो को एक लाठी से हांक दिया ।

‌‌‌एक लाठी से हांकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ek lathi se hakna muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌एक लाठी से हांकना मुहावरे पर कहानी ek lathi se hakna muhavare par kahani

प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक ‌‌‌बुड्डा आदमी रहा करता था । जिसका नाम गंगादास था । गंगादास बडा ही नेक आदमी था वह कभी भी किसी का बुरा नही सोचता था । गंगादास इस तरह का होने के बाद भी बहुत ही गरीब था । और गाव के लोगो की ‌‌‌बकरियों को चरा कर ही अपना जीवन गुजारता ‌‌‌था ।

मगर वृद्ध हो जाने के बाद गंगादास के बेटे ने उनकी खुब सेवा की और एक बहुत ही आराम का जीवन ‌‌‌गुजारने का ‌‌‌अवसर प्रदान किया । जिसे देख कर बाहर से आने वाले लोग गंगादास के पास जाते और कहा करते की आप अपने जीवन के कुछ अनमोल क्षणो को याद कर कर आने वाली पिढी को कोई संदेश देना चाहते है की नही ।

इस तरह का संदेश लेने के लिए ‌‌‌गंगादास के बेटे ने ‌‌‌एक बार शहर से कुछ लोगो को काफी अधिक रूपय देकर बुलाया था । साथ उनमे से एक गंगादास के बेटे का मित्र था । जिसके कारण से वे लोग गंगादास के बारे मे जानने के लिए आ गए थे । जब गाव के लोगो को इस बारे मे पता चला तो गाव के लोग भी गंगादास का इंटरव्यू देखने के लिए आ गए थे ।

उस समय गंगादास ‌‌‌की जितनी उम्र का कोई भी व्यक्ति नही था । क्योकी गंगादास पूरे 100 वर्ष का हो गया था । सभी गाव के लोग उसके आगे छोटे ही थे । जिसके कारण से गाव के लोग गंगादास के बारे मे जानने के लिए आ गए । इंटरव्यु लेने वालो के ‌‌‌पुछने पर गंगादास ने कहा की मैं आपको एक दिन की बात बताना चाहता हूं ।  

मेरे पासा बकरिया पुरे गाव की होती थी जिसके कारण से उनकी सख्या काफी अधिक हो जाती थी । मैं ‌‌‌रोजाना कबरियो को एक जैसा समझ कर उन्हे चराने के लिए जंगल लेकर जाता था । उस समय मेरे मन मे कोई भी भेदभाव नही था क्योकी सभी बकरियो को चराने के लिए मुझे एक जैसे ही पैसे मिलते थे और बकरिया भी एक समान ही ‌‌‌थी ।

उनमे कोई भी अमीर गरीब या बुरी भली नही थी । जिसके कारण से मै सभी के साथ एक जैसा ही व्यवाहर करता और उन्हे एक ही लाठी से हांकता था । इसी तरह से एक दिन मैं बकरियों के हांकता हुआ जंगल की तरफ जा रहा था की रास्ते मे शहर से कुछ लोग आए जो गाव के हर सदस्य की मदत करने के लिए उनके उपयोग मे आने ‌‌‌वाला कुछ समान बाटने के लिए आए थे ।

उस समय उन आदमियो के बारे मे मैं नही जानता था । जिसके कारण से मैं बकरियां हांकता हुआ उनके पास से होकर जंगल चला गया । और जब वापस गाव मे आया तो मुझे पता चला की गाव के लोगो को कुछ लोग ऐसी वस्तुए बाटने के लिए आए थे जो काफी उपयोग मे आती है ।

‌‌‌साथी ही यह भी पता चला की गाव के आधे से ‌‌‌आधे लोगो को ही वह वस्तु प्राप्त हुई थी और बाकियो को कल बाटने के लिए आएगे । क्योकी उस दिन सभी मोके का फायदा उठा कर वस्तु लेने को तैयार थे तो मैं भी उस दिन अपने घर पर रह गया और बकरियो को लेकर नही गया ।

 अब जैसे ही अगले दिन वे शहरी लोग गाव मे वापस आए तो ‌‌‌गाव के लोग पहले से ही एक जंगह इकट्ठे थे । जिसके कारण से उन लोगो ने गाव के लोगो को वस्तुए बाटना शुरू कर दिया । मगर इस बार जो वस्तुए थी वे पहले बाटी गई उनकी तुलना मे काफी कमजोर थी ।

क्योकी पहले अमीर लोगो को वस्तुए प्राप्त हुई थी और अब गरीबो को प्राप्त हो रही थी । गंगाराम ‌‌‌ने कहा की जब मेरी बारी आई तो मैं भी उनके पास वह वस्तु लेने के लिए चला गया । तब मैंने देखा की हमे खाना बनाने के लिए कए कडाई दी जा रही है जो पहले की तुलना मे मजबुत नही है ।

यह देख कर मैंने उन शहरी लोगो से कहा की साहब आप अगर सभी को कुछ देना ही चाहते हो तो अमीर गरीब की भावना छोड दो । इस तरह से सुन ‌‌‌कर उन लोगो ने कहा की क्या मतलब है ।

तब फिर गंगाराम ने का की मैं जब भी गाव के लोगो की बकरिया चराने के लिए जाता हुं तो उन सभी को एक लाठी से ही हांकता हूं । क्योकी सभी मेरे लिए समान है कोई भी मेरे लिए गरीब अमीर या बुरी भली नही है । इसी तरह से आपके लिए हम लोग अलग नही है ।

इस तरह से सुन कर उन ‌‌‌शहरी लोगो को याद आ गया की यह तो वही बकरी वाला है । इस तरह से फिर उन शहरी लोगो को समझ मे आ गया की हमने पहले अच्छी वस्तु गाव के लोगो को बाट दी जो अमीरो के पास चली गई और अब हम गरीबो को हल्की वस्तु दे रहे है ।

तब उन लोगो ने कहा की हमे माफ कर दिजीए आज जो भी हमने यहां कुछ बाटा है वह ‌‌‌दो दिन के बाद मे अपने साथ लेकर आना और पहले की जैसे ही वस्तु पर मजबुत लेकर चले जाना ।

इस तरह से कहते हुए उन शहरी लोगो ने गंगाराम से कहा की हम भी आज से सभी को एक लाठी से हांकेगे । इस तरह से फिर उन लोगो ने दो दिनो के बाद ऐसा ही किया । इस तरह से कहते हुए गंगाराम ने कहा की उन लोगो की तरह चाहे ‌‌‌कोई भी कार्य क्यो न हो गरीबी अमीरी या बुरा भाला जैसी भावनाओ को त्याग कर सभी को एक जैसा ही समझना चाहिए ।

इस तरह से यह इंटरव्यू खत्म हो गया और जब अगले दिन टीवी पर दिखा तो गाव के लोग ऐसा ही करने लगे और सभी को एक लाठी से हांकने लगे । इस तरह से इस कहानी से आपको समझ मे आ गया होगा की इस मुहावरे का ‌‌‌अर्थ क्या है ।

एक लाठी से हाँकना मुहावरे पर निबंध || ek lathi se hakna essay on idioms in Hindi

दोस्तो अगर आपने कभी गाय को चराया है या फिर बकरी को चराया है तो आपको पता होगा की उन्हे चाराते समय हम उनके साथ एक जैसा व्यवाहर करते है और खेत में उन्हे एक ही लाठी से हांकते है ।

अगर आपने गाय या फिर बकरी को कभी नही चराया है तो किसी ग्वाले से पूछ ले और वह आपको बताएगा की वह बकरी या गाय आदी पशुओ को चराने के लिए एक ही लाठी का उपयोग करता है।

और लाठी दिखा कर उन्हे डराता है ओर आगे तेज गति से बढने को कहता है जिसे हांकना कहा जाता है ।

तो क्योकी सभी को एक ही लाठी से हांका जाता है यहां पर किसी के साथ अलग तरह का व्यवाहर नही किया जाता है तो जहां पर भी मानव के साथ एक जैसा समण् कर व्यवाहर किया जाता है तो वहां पर एक लाठी से हांकना का प्रयोग किया जा सकता है क्योकी ek lathi se hakna muhavare ka arth – सभी को एक जैसा समझ कर ‌‌‌व्यवहार करना ही होता है।

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