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रत्ती भर मुहावरे का मतलब और वाक्य व कहानी

रत्ती भर मुहावरे का मतलब और वाक्य व कहानी

रत्ती भर मुहावरे का अर्थ ratti bhar muhavare ka arth – थोडा सा

रत्ती भर मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त रत्ती भर मुहावरे का थोडा सा होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
रत्ती भर– थोडा सा ।
रत्ती भर मुहावरे का मतलब और वाक्य व कहानी

रत्ती भर मुहावरे को कैसे समझे

दोस्ती पहाडो में पाए जाने वाला एक प्रकार का ‌‌‌‌‌‌पौधा जिसमे फली के अंदर लाल व काले रंग के मिले हुए बिज पाए जाते है । इस ‌‌‌‌‌‌पौधो को रत्ती कहा जाता है । क्योकी इसका बीज जरा सा या थोडा सा होता है‌‌‌ यानि बहुत ही छोटा होता है । इस कारण से रत्ती भर मुहावरे का अर्थ भी जरा सा या थोडा सा होता है । ‌‌‌और जहां पर थोडा सा होने की बात की जाती है वहां पर इस मुहावरे का प्रयोग होता है ।

रत्ती भर मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ratti bhar muhavare ka vakya me prayog

तुमने मेरे घर मे चोरी कर ली और अब तुम चाहते हो की मैं तुम्हारी बात मानु अरे अब मुझे तुम पर रत्ती भर भी विश्वास नही रहा है ।

सरोज तो पैसो की लालची है और पैसो के कारण ‌‌‌से वह कुछ भी कर सकती है इस कारण से पैसो के मामले ‌‌‌मै उस पर रत्ती भर विश्वास नही करता हूं ।

जब रामलाल अपने घर के सदस्यो की बात पर भी रत्ती भर भरोषा नही करता तो वह तुम्हारी  बात कैसे मान लेगा ।

रत्ती भर मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ratti bhar muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌तुम्हे उस निच आदमी की बात पर विश्वास हो रहा है अरे वह तो रत्ती भर भोषे के काबिल नही है ।

‌‌‌वर्तमान मे लोगो पर रत्ती भर भोरोषा नही किया जा सकता ।

मैंने तुम्हे अपना समझ कर रहने के लिए घर दिया था और आज तुम उस पर अपना अधिकार कर कर बैठे हो तुम पर तो रत्ती भर भरोषा नही करना चाहिए था।

रत्ती भर मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ratti bhar muhavare ka vakya me prayog

जनाब ‌‌‌बादाम का भाव जो है वो रहने दो रत्ती भर मुझे दे दो जरा चख लेता हूं ।

मिठाई लाने के लिए गए ‌‌‌कुलदीप को रामलाल ने रत्ती भर मिठाई चखने के लिए दी ।

समय ऐसा आ गया है की अपने पडोसी की बात पर भी रत्ती भर भरोषा नही हो रहा है ।

कल तो मैं महेशदास के पास जाकर आया था और आज आप कह रहे हो वह तो मर गया है मुझे आपकी बात पर रत्ती भर भरोषा नही हो रहा ।

रत्ती भर मुहावरे का वाक्य में प्रयोग ratti bhar muhavare ka vakya me prayog

‌‌‌रत्ती भर मुहावरे पर कहानी ratti bhar muhavare par kahani

एक समय की बात है किसी नगर मे महेशदास नाम का एक आदमी रहा करता था । महेशदास पैसो का बडा ही लालची था क्योकी पैसो की उसके पास कोई कमी नही थी मगर फिर भी पैसो के कारण से वह अपने घर के सदस्यो पर भी भरोषा नही करता था । महेशदास के घर मे उसकी पत्नी और उसके दो बेटे रहा करते ‌‌‌थे । इस तरह से महेशदास के घर मे कुल 4 सदस्य थे ।

इसके अलावा महेशदास का एक भाई था जिसका नाम रामदास था । वह अपने भाई से अलग रहता था । जिसके कारण से वह कभी कभार ही अपने भाई के पास बैठता था । महेशदास इतना धनवान था की वह आराम से अपना और अपने बेटो का जीवन गुजार पाता था ।

मगर उसने लालच पन के कारण से ‌‌‌अपने बेटो को भी अच्छा जीवन नही दिया । इसके अलावा महेशदास अपने भाई की बात का ही भरोषा करता था वह और किसी की बात नही मानता था । जिसके कारण से रामदास के कहने पर महेशदास ने अपने बेटो को पढाया लिखाया ।

जब महेशदास के बेटे बडे हो गए तो एक दिन की बात है महेशदास के अचानक हाथ पैर इस तरह से जम गए थे ‌‌‌की उससे हिला भी नही जा रहा था । जिसके कारण से महेशदास को रामदास डॉक्टर के पास लेकर चला गया ।

जब डॉक्टर ने महेशदास की जांच पडताल की तो उसे पता चला की यह लकवे का सिकार हो गया है। जब इस बारे मे रामदास को पता चला तो उसे झटका सा लगा । क्योकी उसने लकवे के बारे मे सुन रखा था की जब कोई व्यक्ति ‌‌‌लकवे का सिकार हो जाता है तो वह उम्र भर इसी तरह से रहता है जब तक की उसकी मृत्यु न हो जाए ।

इस दुविधा को रामदास ने डॉक्टर के सामने रखा तो डॉक्टर ने बताया की ऐसा नही होता है इसका कोई ‌‌‌पक्का इलाज नही है मगर कभी कभार आपकी बात सच हो सकती है मगर कभी कभार ऐसा भी होता है की लोग जल्दी ही ठिक हो जाते ‌‌‌है । जिसके कारण से वे अपने पहले की तरह जीवन बिताने लग जाते है ।

मगर यह सब उनके खान पान पर निर्भर करता है । तब रामदास ने डॉक्टर की बात सुन कर फिर पूछा की डॉक्टर साहब खान पान कैसा होना चाहिए । तब डॉक्टर ने कहा की प्रोटीन से भरी अगर सब्जी खाई जाए और सलाज खाए जाए साथ ही जितना हो सके उठने बैठने ‌‌‌की कोशिश करे तो मरीज जल्दी ठिक हो सकता है ।

इस तरह से फिर डॉक्टर ने महेशदास को ‌‌‌उसके घर भेज दिया था । साथ ही रामदास ने महेशदास की पत्नी को डॉक्टर की सारी बात बता दी । जब महेशदास घर चला गया तो उसकी पत्नी उसे डॉक्टर की बताइ गई बात के हिसाब से खाना पीना करवाने लगी । क्योकी महेशदास को बोली ‌‌‌आ रही थी । जिसके कारण से उसने अपनी पत्नी से कहा की तुम मुझे जान बुझ कर ऐसा खाना दे रही हो ।

तब महेशदास की पत्नी ने कहा की ऐसा डॉक्टर ने कहा है । यह सुन कर महेशदास ने कहा की  डॉक्टर ने ऐसा कुछ नही कहा है अगर कहा है तो राम को बुलाकर लाओ मैं उसकी बात पर ही भरोषा करूगा । जिसके कारण से महेशदास के ‌‌‌बेटा रामदास को बुलाकर ले आया ।

तब रामदास ने कहा की भाई तुम्हे अपनी पत्नी की बात माननी होगी क्योकी यह जो भी कर रही है सब डॉक्टर की बात के हिसाब से कर रही है । जिसके कारण से वह अपनी पत्नी की बात मानने लगा था । जिससे वह अपनी पत्नी के द्वारा खिलाए जाने वाली सभी चिजो को आराम से खा लेता ‌‌‌था । जिसके कारण से महेशदास अब धिरे धिरे ठिक होने लगा था ।

इस बात को एक महिना ओर बिता तो महेशदास अब चलने फिरने लगा था । जिसे देख कर सभी खुश थे । अब महेशदास आराम से अपना जीवन गुजार रहा था । मगर अब वह और ठिक नही हो रहा था । मगर जितना हो गया था वह उसके लिए अच्छा था वह आराम से खाना पीना करने ‌‌‌लगा था । अपने भाई का हालचाल जानने के लिए रामदास उससे रोजाना मिलने के लिए जाता था ।

इसी तरह से एक बार की बात है रामदास अपने भाई से मिलने के लिए गया हुआ था । तब उसने देखा की उसका भाई बहुत ही अच्छा है । अब वह पूरी तरह से ठिक होने लगा था । यह देख कर रामदास खुश था और फिर अपने घर आकर अपनी ‌‌‌पत्नी के पास आकर इस बात को बताने लगा था । अब रात हो गई जिसके कारण से रामदास आराम करने के लिए सो गया ।

जब सुबह आख खुल तो उसके मुबाईल मे फोन आ रहा था तब उसने बात की तो उसे पता चला की उसके भाई की मृत्यु हो गई है । यह खबर पा कर रामदास हंसने लगा और फोन करने वाले से कहने लगा की ‌‌‌मैं कल ही उससे मिलकर आया था वह पूरी तरह से ठिक है ।

मगर फिर से उस आदमी ने कहा की नही उनकी मृत्यु रात को ही हो गई थी। क्योकी आप अपने भाई से काफी दूर रहते हो  इस कारण से आपको इस बारे मे पता नही चला होगा । तब फिर से रामदास ने कहा की मुझे तुम्हारी बात पर रत्ती भर भारोषा नही है वे कल तो पूरी ‌‌‌तरह से ठिक थे । इतना कह कर उसने फोन काट दिया ।

जब वह अपने कमरे से बाहर गया तो उसकी पत्नी ने भी उसे यह बात बताई तो वह फिर से कहने लगा की वह कल तो पूरी तरह से ठिक थे और अब तुम ऐसा कह ‌‌‌रही हो मुझे इस बात पर रत्ती भर भरोषा नही हो रहा है । मगर अब रामदास के पास एक आदमी की और ‌‌‌सुचना आई तो उसे इस बात ‌‌‌का ‌‌‌यकिन हुआ ।

जिसके कारण से वह अपने भाई के घर मे दोडते हुए गया । वहां जाने के बाद में उसे पता चला की रात को हार्ट अटेक आने के कारण से इनकी मोत हो गई । यह जान कर राम को बहुत दुख पहुंचा । मगर क्या हो सकता था । इस कारण से वह अपने भाई के बेटो को संभाल रहा था । और जब समय हुआ तो उसका अंतिम सस्कार ‌‌‌करवाया ।

इस तरह से महेशदास की मृत्यु हो गई जिसके बारे मे जान कर अनेक लोगो को विश्वास नही हुआ । क्योकी वे एक रात पहले ही तो पूरी तरह से ठिक थे । इस तरह से आपको इस कहानी से समझ मे आ गया होगा की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ।

‌‌‌रत्ती भर मुहावरे पर निबंध ratti bhar muhavare par nibandh

साथियो रत्ती एक प्रकार का पौधा है जिसके बारे मे मैंने आपको उपर बताया था । इस पौधे मे बिजो की थोडी सख्या होने के कारण से ही रत्ती भर के लिए थोडा सा कहा जाता है । जीस तरह से रामदास को किसी की बात पर भरोषा नही हो रहा था तो वह यह नही कह रहा था की मुझे तुम्हारी ‌‌‌बात पर ‌‌‌थोडा सा भी भरोषा नही है बल्की वह तो कह रहा था की मुझे तुम पर रत्ती भर भरोषा नही है ।

इस तरह से कह कर वह थोडा सा की जगह रत्ती भर का प्रयोग करता है । क्योकी रत्ती भर के लिए थोडा सा होता है और ऐसा हीरामलाल कह रहा था इस कारण से यह पता चल जाता है की यह इस मुहावरे का अर्थ होता है । साथ ही यह भी पता ‌‌‌चलता है की इस मुहावरे का वाक्य ‌‌‌में प्रयोग थोडा सा शब्द की जगह पर होता है जिस तरह से रामलाल ने किया था । इस तरह से आप इस मुहावरे के बारे मे काफी अधिक जानकारी जान गए होगे ।

अगर अब भी आपके मन मे कोई प्रशन है तो आप कमेंट कर कर पुछ सकते है मैं आपको उचित उत्तर दे दूगा जिसके लिए आपको अपनी समस्या को हल ‌‌‌करने मे आसानी हो ।

रत्ती भर मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of in Hindi

दोस्तो वैसे आपने इस मुहावरे के बारे में उपर काफी कुछ पढा है तो आशा है की आप इसके अर्थ के बारे में जान गए है । मगर आपको बात दे की मुहावरा असल में थोडा सा को दर्शाता है और इसका मतलब होता है की  ratti bhar muhavare ka arth – थोडा सा है ।

वैसे अगर आप किसी वस्तु की माग करते है और उसकी मात्रा आपको थोड़ी सी चाहिए है तो आप ऐसे में रत्ती भर शब्द का प्रयोग कर सकते है ।

जैसे की मान ले की आपका मित्र सुपारी खा रहा है तो ऐसे मे आपको भी अपने मित्र से सुपारी लेकर खानी है । मगर आप मित्र से मागते है तो आप कहेगे की मित्र जरा रत्ती भर मुझे भी सुपारी दे दो । और आपका मित्र अगर इस मुहावरे के अ​र्थ के बारे में जानता है तो आपको वह तुरन्त दे देगा और नही जानता है तो फिर आप उसे समझने लग जाओ की आखिर यह रत्ती भर मुहावरा है और इसका प्रयोग कैसे किया जाता है ।

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