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वीरगति को प्राप्त होना मुहावरे का अर्थ और वाक्य में प्रयोग

वीरगति को प्राप्त होना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है

वीरगति को प्राप्त होना मुहावरे का अर्थ veergati ko prapt hona muhavare ka arth – मृत्यु हो जाना

वीरगति को प्राप्त होना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त वीरगति को प्राप्त होना  मुहावरे का मृत्यु हो जाना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
वीरगति को प्राप्त होना   मृत्यु हो जाना ।
वीरगति को प्राप्त होना  मुहावरे का अर्थ क्या होता है

वीरगति को प्राप्त होना  मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो जो भी संसार में आता है वह एक दिन जरूर मरता है । मगर हर किसी की अलग अलग तरह से मृत्यु होती है जिनमें से बहुत से अधिक लोगो का जीवन ऐसा ही गुजर जाता है और ‌‌‌वे दुनिया में उनका नाम हो ऐसा कुछ नही कर सकते है । यानि अपने लिए ही पूरा का पूरा जीवन गुजार देते है । मगर कुछ लोग ऐसे भी होते है जो अपने लिए नही बल्की दुनिया के लिए जीवन जीते है ।

जिस तरह से भारत के सैनिक जो भारत की रक्षा करने के लिए मरने को भी तैयार रहते है । ‌‌‌इस तरह से कुछ अच्छा करते हुए मर जाना जिसके बाद में लोगो में उसका नाम रहे तब इसे विरगती को प्राप्त होना कहा जाता है । और इसी समय इस मुहावरे का प्रयोग होता है ।

विरगति को प्राप्त होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग veergati ko prapt hona muhavare vakya me prayog

‌‌‌कुछ दिन पहले ही तो भारत के नोजवान भारत की रक्षा में विरगति को प्राप्त हुए थे और तुम इस बात को भुल गए ।

रामायण के युद्ध में बहुत से सैनिक विरगति को प्राप्त हुए थे ।

दिल्ली को बचाने के लिए कई सैनिको ने अपना बलिदान दिया है इसे विरगति को प्राप्त होना ही कहा जाएगा ।

विरगति को प्राप्त होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग veergati ko prapt hona muhavare vakya me prayog

अगर तुम अपने ‌‌‌देश की हिफाजत में विरगति को प्राप्त हो जाओगे तो भी हमें कोई गम नही होगा ।

भारतवासियो की माता भी अपने बेटे को देश के लिए विरगति को प्राप्त होने के लिए शरद पार भेज देती है ।

तुम्हारे पिता इस राज्य को बचाने के लिए विरगति को प्राप्त हो गए मगर तुम एक हो जो राज्य ‌‌‌को नष्ट करने में ‌‌‌तुले हो ।

विरगति को प्राप्त होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग veergati ko prapt hona muhavare vakya me prayog

देश की हिफाजत के लिए रामलाल जब विरगति को प्राप्त हुआ तो गाव के लोगो ने उनके बलिदान पर सलामी दी ।

जब भारत का फौजी देश की हिफाजत के लिए विरगति को प्राप्त होता है तो उसे 21 तोपो की सलामी दी जाती है ।

आज भले ही मैं विरगति को प्राप्त हो जाओ मगर अपने गाव के लोगो को दुष्ट आतंकवादियों से छुटकारा दिलाकर रहुगा ।

विरगति को प्राप्त होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग veergati ko prapt hona muhavare vakya me prayog

सुभाषचंद्र बॉस जब देश की आजादी के लिए विरगति को प्राप्त होने के लिए खडे हुए तब जाकर देश को आजादी मिली ।

चन्द्रशेखर आजाद में भी इस देश के लिए विरगति को प्राप्त की थी ।

दुर्गा बाई देशमुख भी देश की आजादी के लिए विरगति को प्राप्त होने से नही डरी ।

विरगति को प्राप्त होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग veergati ko prapt hona muhavare vakya me prayog

‌‌‌विरगति को प्राप्त होना मुहावरे पर कहानी veergati ko prapt hona muhavare par kahani

प्राचीन समय की बात है किसी नगर में एक बहुत ही अच्छा राजा रहा करता था जिसका नाम प्रताबसिंह था । राजा अपनी प्रजा के लिए बहुत ही अच्छा था वह अपने लोगो को कभी भी मुसीबत में नही देखना चाहता था । अगर कभी राजा की प्रजा का कोई सैनिक जो राजा की प्रजा के लिए ‌‌‌मुसीबत में फस जाता है तो राजा उसे किसी न किसी तरह से मुसीबत से बाहर निकाल कर जरूर लाता था ।

जिसके लिए चाहे उसे कितना भी धन देना क्यो न पड जाता था । अगर कभी राजा प्रताबसिंह का सैनिक युद्ध या राज्य की हिफाजत में मृत्यु को प्राप्त हो जाता तो राजा अपनी पूरी प्रजा के सामने ‌‌‌उसका जोरो सोरो से अंतिम संस्कार किया करता था । इसी तरह की एक बार की बात है राजा के राज्य में महावीर सिंह नाम का एक बहुत ही अच्छा सैनिक रहा करता था ।

जो हर उस कला को जानता था जिसे एक राजा को जानना चाहिए और वह युद्ध में भी कभी हार नही मानता था । यहां तक की जो कार्य राजा को नही आता था वह ‌‌‌महावीर बडे ही आराम से कर दिया करता था । राजा को इस बारे मे बडी अच्छी तरह से मालूम था जिसके कारण से वह कभी भी महावीर को अपने से दूर नही रखता और उससे हर समय कुछ न कुछ सिखने में लगा रहता था ।

इसका कारण यह था की महावीर का पिता जो था वह राजा के पिता का बिल्कुल निजी था जिसके कारण से राजा ‌‌‌के पिता ने महावीर के पिता को वे सभी युद्ध कला सिखा दी जो एक राजा को आनी चाहिए । यह युद्ध कला महावीर का पिता महावीर को सिखता था । मगर जब तक राजा के पिता और महावीर के पिता की  मृत्यु हुई तब तक तो महावीर युद्ध कला में परीपूर्ण हो चुका था ।

मगर राजा प्रताबसिंह को अभी युद्ध कला के बारे में ‌‌‌पता नही था । क्योकी प्रताबसिंह राजा से बहुत छोटा था । अब महावीर ने ही अपना कर्तव्य समझ कर राजा को शिक्षा दी थी क्योकी ऐसी शिक्षा राजा के पिता के कारण से ही उसके पास आई थी तो वह राजा को सिखाने मे कैसे आनाकानी कर सकता था । इस तरह से राजा और प्रताबसिंह में बडा प्रेम भाव था ।

इसी के ‌‌‌साथ जब राजा और उसकी ‌‌‌प्रजा पर कोई मुसीबत आती तो प्रताबसिंह राजा से भी आगे होकर युद्ध लडता और सामने वाले राजा को धुल चटा देता था । मगर एक दिन ‌‌‌महावीर युद्ध में हार गया और उसकी मृत्यु हो गई थी । उस दिन युद्ध चल रहा था और महावीर पहले की तरह ही प्रताबसिंह से आगे युद्ध कर रहा था ।

मगर तभी ‌‌‌ ‌‌‌महावीर के चिखने की आवाज राजा के पास गई । तो राजा को लगा की वह घायल हो गया है तो वह जल्दी से उसकी जान बचाने के लिए आगे ‌‌‌चले गए । तब उसने देखा की ‌‌‌महावीर बहुत बुरी तरह से घायल था तो राजा उसके पास जाकर उसकी मदद करने लगा । तब ‌‌‌महावीर ने कहा की महाराज इनकी सेना को छोडना नही इन्हे जरूर हराना ‌‌‌इन्होने पीछे से हमला कर कर मुझे घायल कर दिया है ।

महावीर की बात सुनकर राजा को भी क्रोध आया जीसके कारण से राजा ने अपनी सेना को आदेश दे दिया की इस सेना को हरा दो और राजा को बंदी बना लो । राजा की बात सुन कर सेना ने तुरन्त जोश दिखाया और कुछ समय के बाद में सामने वाली सेना हल्की नजर आने लगी थी ‌‌‌जब यही चलता रहा तो सामने वाली सेना को हारा कर राजा को बंदी बना दिया और प्रताबसिंह के पास ‌‌‌उस बंदी राजा को लेकर आ गए ।

मगर अब तक देर इतनी अधिक हो गई थी की महावीर की मृत्यु हो गई । यह दुख राजा से देखा नही गया जिसके कारण से उसने उस राजा को बंदी बनाते हुए कारागार मे डाल दिया । इसके बाद में राजा ‌‌‌महाविर को अपने राज्य में लेकर ‌‌‌गया । जब प्रजा ने महावीर की यह हालत देखी तो वे भी दुख के जरीय रोने लगे थे ।

यह देख कर राजा ने कहा की आप दूखी मत होओ यह मरा नही है बल्की राज्य के लिए विरगति को प्राप्त हुआ है । राजा की बात सुन कर प्रजा दूख से बाहर आने लगी थी । और अब राजा भी दूख से बहार आया और ‌‌‌महावीर के शरीर को आदर देते हुए उसके बलिदान को याद कर कर उसे हाथी पर बैठा कर समसान घाट लेकर गया और फिर उसके शरीर का अंतिम संस्कार किया ।

ऐसा करने के कारण से महावीर को देख कर हर कोई सोचने लगा की महावीर ने जो आज राज्य के लिए किया है वह मरा नही है बल्की वह तो राज्य को बचाने के लिए विरगति ‌‌‌को प्राप्त हुआ है और इस तरह से विरगति को प्राप्त हर किसी को होना चाहिए । इस तरह से समान को देख कर राजा के राज्य की प्रजा भी अपने राज्य के लिए मरने से पिछे से नही हठते थे ।

 इस घटना के बाद मे राजा की सेना हमेशा ही युद्ध का नाम सुन कर जोरो सोरो से टूट पडती थी यह देख कर उनसे युद्ध लडने के ‌‌‌लिए जो आता था वह आराम से हार जाता था । इस तरह से आपको इस कहानी से समझ में आ गया की जब महावीर मरा तो उसे विरगति को प्राप्त होना कहा गया जिसका अर्थ होता है की मर जाना ।

‌‌‌वीरगति को  प्राप्त होना मुहावरे पर निबंध veergati ko prapt hona muhavare par nibandh

साथियो आपने सुना होगा की देश की जब आजादी हुई थी तो अनेक देशवासियो की मोत हुई थी । मगर उनमें से बहुत से लोगो का तो हम नाम ही नही जानते है । क्योकी वे ऐसे लोग थे जो पीछे रहकर आजादी के लिए लड रहे थे । मगर जो लोग आगे खडे होकर लड रहे थे उनका नाम आज हम ‌‌‌आसानी से जानते है जैसे गांधीजी । मगर गांधीजी एक ही ऐसे नही थे जो लड रहे थे बल्की उनके साथ भी बहुत से देशवासी थी जिन्होने देश को आजाद कराने के लिए अपना बलिदान भी दिया था ।

इस तरह के लोगो के होसले और उनकी ताक्त व उनके किए गए कार्यो के कारण से इन्हे मृत्यु को प्राप्त होना नही ‌‌‌कहते है । ‌‌‌बल्की कहते है की देश को आजाद कराने में वे विरगति को प्राप्त हो गए । इस तरह से महान कार्यो के लिए मरने पर ही इस मुहावरे का प्रयोग होता है । मगर इसका अर्थ मृत्यु को प्राप्त होना होता है । जिसके कारण से अगर इसका प्रयोग ऐसी जगह पर किया जाए तो भी मुहावरे का वाक्य में प्रयोग गलत नही कहा जा सकता ‌‌‌है ।

 हमारे देश में ऐसे नोजवानो की आज भी कोई कमी नही है भले ही आज वे किसी सरकारी नोकरी में देश की रक्षा करने का काम नही करते हो फिर भी वे अपने देश को बचाने के लिए नोकरी का इंतजार नही करते है । इस तरह के लोगो को जब लगता है की उनका कदम उठाना जरूरी है तो वे अपनी मृत्यु से नही डरते बल्की देश के ‌‌‌लिए बलिदान होने को तैयार रहते है । और ऐसा होता भी अपने देश को और अपने राज्य व गाव को मुसीबत में देख कर लोग मरते भी है ।

मगर इस तरह के लोगो के बारें मे ज्यादा जानकारी हासिल नही होती है जिसके कारण से हमें पता नही ‌‌‌चलता है । इस तरह के लोगो को ही विरगति को प्राप्त होना कहा जाता है यानि उनकी ‌‌‌मृत्यु हो गई मगर मृत्यु भी अच्छे काम में हुई है । इस तरह से इस मुहावरे का अर्थ सरल भाषा में समझ मे आता है की मृत्यु को प्राप्त होना होता है । और जहां पर मृत्यु को प्राप्त होने की बात होती है वही इस मुहावरे का प्रयोग होता है इस तरह से इस मुहावरे अर्थ आप समझ गए होगे ।

वीरगति को प्राप्त होना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of veergati ko prapt hona in Hindi

दोस्तो पहले के समय में आपको पता है की राजा महाराजा होते थे और उनके बिच में हमेशा ही युद्ध होता रहता था जिसमें करोड़ो लोगो की जान चली जाती थी । मगर उन लोगो के लिए कहा जाता था की युद्ध में सेनिक वीरगति को प्राप्त हुए है ।

और इसी तरह से वर्तमान में होता है क्योकी जब हमारा सेनिक यानि हमारे किसी फोजी भाई की मृत्यु हो जाती है तो यह कहा जाता है की सेनिक ​वीरगति को प्राप्त हुआ है ।

मगर वह सिधे रूप में मर रहा है मगर ऐसा नही कहा जाता है बल्की ​वीरगति को प्राप्त होना कहा जाता है और इसका मतलब हुआ की वीरगति को प्राप्त मुहावरे का अर्थ मृत्यु हो जाना होता है ।

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