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लार टपकना मुहावरे का अर्थ और वाक्य व एक कहानी

लार टपकना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

लार टपकना मुहावरे का अर्थ laar tapakna muhavare ka arth- बहुत अधिक लालच होना या लालची होना

लार टपकना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

दोस्त लार टपकना मुहावरे का बहुत अधिक लालच होना या लालची होना होता है । यानि दोस्त,

मुहावरा अर्थ
लार टपकना– बहुत अधिक लालच होना या लालची होना ।
लार टपकना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

लार टपकना मुहावरे को कैसे समझे

दोस्तो जैसा की आपको मालूम है की जब किसी मिठाई को देखा जाता है तो उसके स्वाद का ज्ञान हो जाता है और इसी स्वाद के कारण से हमारे मुंह में पानी आते देर नही लगता है । और ‌‌‌कभी कभार कोई वस्तु बहुत ही अधिक स्वादिष्ट होती है जिसके कारण से मुंह पूरा का पूरा पानी से भर जाता है और ऐसा भी होता है की यह पानी या थुक बहार आकार गिर जाता है ।

जिसके कारण से इसे लार टपकना कहा जाता है । हालाकी यह तभी होता है जब खाने का बहुत अधिक लालच होता है । और इस कारण से लार टपकना मुहावरेका अर्थ लालच होना होता है ।

लार टपकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

  1. जैसे ही महेश के सामने मिठाईयो से भरा कटोरा लाकर रखा तो महेश की लार टपकने लगी ।
  • जब बाजार में सरला के बेटे ने गुलाब जामुन को देखा तो उसकी लार टपकने लगी ।

  • हरीवंद्र बहुत ही लालची है वह जब भी स्वादिष्ट भोजन देख लेता है तो ‌‌‌उसकी लार टपकने लग जाती है ।
लार टपकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग
  • हजारीलाल हलवाई की सब्जी को देख कर मेरी तो लार टपकने लगी ।
  • बालाजी मिठास भंडार का नाम सुनते ही इसकी लार टपकने लगी है ।
  • ‌‌‌पिज्जा को देख कर घर के सभी लोगो की लार टपकने लगी और पल भर में पूरा खत्म कर दिया मेरे लिए तो बचा तक नही ।
लार टपकना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

‌‌‌लार टपकना मुहावरे पर एक प्रसिद्ध कहानी (साधू को आया मिठाई का लालच)

प्राचीन समय की बात है ‌‌‌गुरखानगर नाम का एक गाव हुआ करता था । जिसमें बहुत ही मेहन्ती लोग रहा करते थे और अपनी मेहन्त के कारण से उनके पास इतना अधिक समय तक नही रहता था की वे स्वादिष्ट भौजन बना कर खा सके । इस कारण से उन्हे जैसा भौजन बनाना आता था वैसा बना कर खा लेते थे ।

उसी नगर में एक ज्ञानी साधू रहा करता था । साधू ‌‌‌का अपना कोई नही था जिसके कारण से वह भिक्षा माग कर अपना पेट भरता था । उस गाव के लोगो में साधू का महत्व था जिसके कारण से वे साधू को देखने मात्र ही उन्हे खाना दे दिया करते थे । क्योकी गाव के लोगो में भगवान के प्रति बडी अस्था थी ।

जिसके कारण से वे साधू को भी एक भग्त मानते थे और उनकी सहायता ‌‌‌करना अपना धर्म समझते थे । और यही कारण था की साधू को पूरा का पूरा गाव भिक्षा में जैसा भौजन स्वयं खाते थे वैसा ही देते थे । क्योकी गाव बडा था और साधू को खाना हर कोई दे देता था । जिसके कारण से साधू बारी बारी गाव के घरो में जाया करता था ।

इस तरह से साधू का जीवन बडा मस्त चल रहा था और साधू अपने ‌‌‌प्रभु मे व्यस्थ था । मगर एक बार गाव में किसी का विवाह चल रहा था और तीन दिन के बाद में साधू की उसी घर में भौजन लेने की बारी थी । साधू अपने नीयम का पक्का था जिसके कारण से विवाह का मोका देखते हुए भी साधू उनके घर नही गया था ।

मगर जैसी ही विवाह खत्म हुआ और तीन दिन हुए तो साधू उनके घर चला गया ‌‌‌साधू जैसे ही उनके घर गया तो उसे बडी ही अच्छी सुगंध आई जिसने उसका मन हिला दिया । तब साधू को और अधिक भूख लगने लगी थी तभी साधू ने आवाज लगाई की माई जरा खाने को लाकर दे दो ।

यह सुन कर अंदर घर की मालकीन बाहर आई और साधू को कुछ खाने को दे दिया था । क्योकी विवाह का समय था तो अच्छे अच्छे पकवान ‌‌‌बनने का भी मतलब था और उस दिन इतने अधिक अच्छे पकवान बने थे की साधू ने जैसे ही अपने मुंह में रखे तो साधू का मुंह पानी से भर गया ।

अब जैसे ही दूसरा पकवान अपने मुंह मे रखने को तैयार था तो साधू के मुंह मे बहुत अधिक मात्रा में थूक आने ‌‌‌लगा था और साधू बडे ही चाव से खा रहा था । इस तरह से उस दिन ‌‌‌साधू का पेट भरा सो भरा साथ ही साधू को लालच आ गया और इसी कारण से अगले दिन फिर से साधू उसी घर में चला गया ।

साधू की अब जैसे ही घर की मालकीन ने आवाज सुनी तो वह चौक गई क्योकी साधू ने आज से पहले ऐसा नही किया की वह लगातार किसी के घर में गया हो । यह देख कर घर की मालकिन को लगा की विवाह के मोके पर ‌‌‌साधू हमारे घर में दो बार आया होगा । मगर फिर घर की मालकीन ने साधू को भौजन दिया और कहा की महाराज कल भी आ जाना ।

इस तरह से अगले दिन फिर से साधू आ गया । क्योकी अब घर की मालकीन ने उन्हे बुलाया था तो वे आ गए मगर अब घर की मालकीन आराम कर रही थी तब घर में नई दुल्हन खाना बना रही थी और जैसे ही साधू की ‌‌‌आवाज सूनाई दी तो उन्हे सबसे पहले पकवान देने के लिए चली गई ।

मगर आज जैसे ही साधू ने पकवानो को देखा तो साधू की लार टपकने लगी और साधू ने जल्दी से उसके हाथो से लेकर खाने लगा था । इस तरह से खाते देख कर दुल्हने को कुछ समझ में नही आया । जब साधू का पेट भर गया तो वह कहने लगा की बेटा पकवान तो बडे ‌‌‌ही स्वादिष्ट बनाती हो । इतने में घर की मालकिन आ गई यानि दुल्हन की सास आ गई ।

तब उसने कहा की साधू बाबा यह हलवाई की बेटी है जिसके कारण से ही अच्छे अच्छे पकवान बनाती है और आज से पहले आपने ऐसे खाए तक नही होगे । तब साधू ने कहा की सच का सेठानी ‌‌‌आपके इन पकवानो को देखने मात्र मेरे पेट मे अधिक ‌‌‌भूख लग जाती है । इस तरह से कहते हुए साधू वहां से चला गया ।

अगले दिन फिर से जब ‌‌‌साधू उनके घर आया तो यह देख कर घर की मालकिन को लगा की साधू तो पकवान खा खा कर लार टपकाने लगा है । मगर अब मालकिन कर भी क्या सकती थी घर में आए किसी को भी मना करना अच्छा नही था । इसी तरह से अगले कुछ दिनो तक जब साधू आता ‌‌‌रहा तो घर की मालकिन ने सोचा की इस तरह से साधू मेरे ही घर में खाना खाता रहेगा और इसे लालच आता रहेगा ।

ऐसा सोचकर उसी दिन मालकिन ने अपनी बहूं को मायके भेज दिया । जिसके कारण से जैसे ही साधू अगले दिन उनके घर आया तो साधू को अच्छे पकवान नही मिले । मगर साधू ने मन मार कर उसे ले लिया और वहां से चला ‌‌‌गया । जब फिर से अगले दिन साधू के साथ ऐसा हुआ तो साधू ने मालकिन से पूछा लिया तब मालकिन ने कहा की मेरी बहूं मायके गई है अब मेरे से उसके जैसे पकवान बनना आसान नही है ।

इस तरह से तीसरे दिन साधू वहां से अगले घर गया था । जब साधू अगले घर गया तो घर के लोगो ने आपस में बात की आज तो साधू महाराज कई दिनो ‌‌‌से घर आए है यह साधू को सुनाई दे गया । जिसके कारण से साधू अपने निवास स्थान पर जाकर सोचने लगा तो उसे समझ में आया की वह हलवाई की बेटी की बनाई गई मिठाईयो को खा खाकर लालची बनता जा रहा था मगर अब वह यहां पर नही है ।

साथ ही साधू ने सोचा की मुझे अपने आप को रोकना होगा वरना मैं पूरा लालची बन जाउगा । इस ‌‌‌तरह से साधू ने किसी तरह से अपने आप को रोक लिया । अब साधू जहां भी जाता तो वह अपना पेट भर जाए इतना ही खाना लेता था । इस तरह से 6 महिनो के बाद में वापस वही घर आया और साधू उसी घर में गया । और अब भी साधू के साथ पहले वाली बात हुई यानि साधू को अच्छे पकवान मिल गए क्योकी हलवाई की बेटी घर पर थी।

जिसके ‌‌‌कारण से फिर से साधू की लार टपकने लगी थी। अब साधू अपने आपको रोक नही पा रहा था । इसके बाद में साधू अपने मार्ग से भी भटकने लगा था । अंत में साधू थक हार कर पास के ही जंगल में चला गया और वहां पर ध्यान में लीन हो गया ताकी उसका मन शांत हो सके और वह लालची न बन सके ।

इस तरह से 3 महिनो तक लगातार तप करने ‌‌‌के बाद में साधू अपने नगर लोटा तो उसमें पूरा बदलाव आग गया था अब वह भौजन को देख कर लार नही टपका रहा था । यह देख कर घर की मालकीन समझ गई की साधू अब और अधिक ज्ञानी बन गए है । इस तरह से फिर साधू का जीवन सरल बन गया और वह मोह माया से दूर हो गए थे । इस तरह से कुछ पलो के लिए साधू में ‌‌‌लालच आ गया था ।

लार टपकाना मुहावरे पर निबंध

साथियो लालच एक ऐसी कला होती है जिसके रोक पाना आसान नही है लोग इसी आदद के कारण से अपने जीवन तक को नष्ट कर देते है । क्योकी जब किसी ‌‌‌को खाने का लालच होगा ‌‌‌तो ‌‌‌वह क्षमता से अधिक खाना खा ‌‌‌लेता है तो वह नुकसान ही करेगा । ‌‌‌

उदहारण के रूप में हम ऐसे व्यक्ति को लेते है जो बहुत ही दूबला पतला है और किसी कारण से उसके मुंह मे ऐसा भौजन चला जाता है की वह उसका दिवाना बन जाता है । इस तरह से फिर वह उसी भौजन को अपना पेट भरने के बाद भी खाता है जैसे साधू के साथ हुआ था ।

इस तरह से क्षमता से अधिक खाने के कारण से एक समय ऐसा ‌‌‌आ जाता है जिसके कारण से कई तरह की बिमारीया शरीर कें अंदर पलने लग जाती है मगर अभ भी खाना इतना ही अधिक खाया जाता है । क्योकी अब उस दुबले पतले व्यक्ति में लालच आ जाता है और लगातार इसी तरह से खाने के कारण से वह दुबले से मोटा हो जाता है क्योकी उसके शरीर की चर्बी अधिक हो जाता है ।

वजन बहुत ‌‌‌अधिक हो जाता है । मगर अब उसके सा‌‌‌मने किसी प्रकार का पकवान आ जाता है तो वह देखने मात्र खुश हो जाता है और उसकें मुंह मे पानी आ जाता है । इस तरह से मुंह में पानी आने को ही लालच होना कहा जाता है । मगर कभी कभार यह पानी बहार आकर गिर जाता है जिसे लार टपकना कहा जाता है और इसे बहुत अधिक लालच होना होना कहा ‌‌‌जाता है । इस तरह से आप समझ गए होगे ।

लार टपकना मुहावरे का तात्पर्य क्या होता है || What is the meaning of laar tapakna in Hindi

दोस्तो हमेशा से मानव को एक तोफहा मिला है की जब भी वह अपनी पसंद का भोजन देखता है तो उसके मुंह में अपने आप लार बन जाती है । और कई बार तो इतनी ज्यादा लार बनती है क वह मुंह से बहार भी गिर जाती है ।

मेरे अनुसार आपके जीवन में ज्यादा नही तो एक बार ऐसा जरूर हुआ होगा । हालाकी आपको बता दे की बहुत सारे ऐसे लोग है जो की खाने के शोकिन होते है और उनके साथ ऐसा कुछ ज्यादा ही होता है । और वे जब भी कुछ खाने का देखते है तो लार बन जाती है और वह मुह से बहार आ जाती है ।

इसे लार टपकना कहा जाता है जो की साधारण बात है और इसे समझा जा सकता है । मगर वही पर लार किस कारण से टपक रही है तो इसका एक ही कारण होता है की खाने का लालच होना और इसी से समझा जा सकता है की laar tapakna muhavare ka arth- बहुत अधिक लालच होना या लालची होना ।

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